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Saharanpur News: रसोई गैैस की किल्लत से स्कूलों में मिड-डे मील पर संकट
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 13 Mar 2026 12:49 AM IST
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सहारनपुर। घरेलू गैस सिलिंडरों की बुकिंग के लिए 25 दिन वेटिंग से परिषदीय स्कूलों में पकने वाले मिड-डे मील पर भी संकट खड़ा हो गया है। सभी सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत रोजाना विद्यार्थियों के लिए दोपहर का भोजन रसोई गैस पर ही तैयार किया जाता है। स्कूलों में एसएमसी के नाम पर घरेलू गैस सिलिंडर के कनेक्शन लिए गए हैं। गैस कंपनियों ने सिलिंडर की डिलीवरी प्राप्त होने के बाद नई बुकिंग के लिए न्यूनतम 25 दिन का समय तय किया है, जबकि स्कूल से एक सिलिंडर दस से 15 दिन ही बच्चों की संख्या के हिसाब से चल पाता है। ऐसे में जिन स्कूलों में गैस सिलिंडर खत्म हो गए, वहां चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं।
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स्कूलों में बची एक या दो दिन की गैस
बड़गांव के प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में प्रधानाध्यापिका ममता का कहना है कि अभी तक विद्यालय में एक दो दिन की रसोई गैस उपलब्ध है, लेकिन रोजाना बच्चों के लिए भोजन बनाने पर सिलिंडर 15 से 18 दिन तक ही चलता है। ऐसे में अब गैस कंपनियों की नई व्यवस्था ने एक नई परेशानी को खड़ा कर दिया है। प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर के प्रधानाध्यापक सेवाराम ने बताया कि स्कूल में मात्र एक या दो दिन की गैस उपलब्ध है। गाड़ी आई थी, लेकिन बिना बुकिंग गैस देने को मना कर दिया और सर्वर बिजी होने के चलते बुकिंग हो नहीं पा रही है।
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जमीन पर सिलिंडर लिटाया, फिर भी पूरी नहीं बनी दाल
बेहट के मंडी रोड स्थित पीएम श्री विद्यालय में बृहस्पतिवार को सिलिंडर में गैस लगभग खत्म होने के बाद उसे जमीन लिटाकर रोटियां बनाई जा रही थीं। शाइस्ता, अंगूरी, शाहीन समेत पांचों रसोईयां ने बताया कि सिलिंडर खत्म होने वाला है। दाल पूरी तरह से बनी नहीं है। सिलिंडर वाले को सुबह से फोन कर रहे है, वह फोन नहीं उठा रहा। एजेंसी से भी गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। अगर सिलिंडर नहीं मिला तो आज तो जैसे तैसे हो जाएगा, लेकिन कल से चूल्हा चलाना पड़ेगा।
गैस खत्म होने पर चूल्हों पर बनाया जा रहा खाना
नकुड़। नगर के पीएम श्री विद्यालय में मिड-डे मील बनाते समय बीच में ही गैस खत्म हो गई, इसके बाद लकड़ियों का इंतजाम कर ईंटों का चूल्हा बनाकर खाना बच्चों के लिए खाना बनाया जा रहा है। प्रधानाचार्य अनूप सिंह ने बताया कि स्कूल में एक महीने में चार से पांच सिलिंडर की खपत है। पिछले कई दिनों से सिलिंडर नहीं मिला है। इसके अलावा कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी ईंटों के चूल्हे रोटियां बनायी जा रही थी। प्रधानाचार्या मधुबाला ने बताया कि दो सिलिंडर खाली पड़े हुए हैं, तीसरे सिलिंडर में भी थोड़ी बहुत ही गैस बची है। इसीलिए गैस पर सब्जी और चूल्हे पर रोटियां बनायी जा रही हैं।
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लकड़ी या अन्य वैकल्पिक ईंधन के उपयोग पर है रोक
गंगोह। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक मंत्री नीरज सैनी ने बताया कि फिलहाल अधिकांश विद्यालयों में एक-दो दिन की गैस ही शेष बची है। बताया कि जिन विद्यालयों में लगभग 50 बच्चे हैं, वहां मिड-डे मील बनाने में एक गैस सिलिंडर करीब सात दिन तक चलता है, जबकि जिन विद्यालयों में डेढ़ सौ या उससे अधिक छात्र हैं, वहां तीन से चार दिन में ही सिलिंडर समाप्त हो जाता है।
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स्कूलों में बची एक या दो दिन की गैस
बड़गांव के प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में प्रधानाध्यापिका ममता का कहना है कि अभी तक विद्यालय में एक दो दिन की रसोई गैस उपलब्ध है, लेकिन रोजाना बच्चों के लिए भोजन बनाने पर सिलिंडर 15 से 18 दिन तक ही चलता है। ऐसे में अब गैस कंपनियों की नई व्यवस्था ने एक नई परेशानी को खड़ा कर दिया है। प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर के प्रधानाध्यापक सेवाराम ने बताया कि स्कूल में मात्र एक या दो दिन की गैस उपलब्ध है। गाड़ी आई थी, लेकिन बिना बुकिंग गैस देने को मना कर दिया और सर्वर बिजी होने के चलते बुकिंग हो नहीं पा रही है।
जमीन पर सिलिंडर लिटाया, फिर भी पूरी नहीं बनी दाल
बेहट के मंडी रोड स्थित पीएम श्री विद्यालय में बृहस्पतिवार को सिलिंडर में गैस लगभग खत्म होने के बाद उसे जमीन लिटाकर रोटियां बनाई जा रही थीं। शाइस्ता, अंगूरी, शाहीन समेत पांचों रसोईयां ने बताया कि सिलिंडर खत्म होने वाला है। दाल पूरी तरह से बनी नहीं है। सिलिंडर वाले को सुबह से फोन कर रहे है, वह फोन नहीं उठा रहा। एजेंसी से भी गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। अगर सिलिंडर नहीं मिला तो आज तो जैसे तैसे हो जाएगा, लेकिन कल से चूल्हा चलाना पड़ेगा।
गैस खत्म होने पर चूल्हों पर बनाया जा रहा खाना
नकुड़। नगर के पीएम श्री विद्यालय में मिड-डे मील बनाते समय बीच में ही गैस खत्म हो गई, इसके बाद लकड़ियों का इंतजाम कर ईंटों का चूल्हा बनाकर खाना बच्चों के लिए खाना बनाया जा रहा है। प्रधानाचार्य अनूप सिंह ने बताया कि स्कूल में एक महीने में चार से पांच सिलिंडर की खपत है। पिछले कई दिनों से सिलिंडर नहीं मिला है। इसके अलावा कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी ईंटों के चूल्हे रोटियां बनायी जा रही थी। प्रधानाचार्या मधुबाला ने बताया कि दो सिलिंडर खाली पड़े हुए हैं, तीसरे सिलिंडर में भी थोड़ी बहुत ही गैस बची है। इसीलिए गैस पर सब्जी और चूल्हे पर रोटियां बनायी जा रही हैं।
लकड़ी या अन्य वैकल्पिक ईंधन के उपयोग पर है रोक
गंगोह। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक मंत्री नीरज सैनी ने बताया कि फिलहाल अधिकांश विद्यालयों में एक-दो दिन की गैस ही शेष बची है। बताया कि जिन विद्यालयों में लगभग 50 बच्चे हैं, वहां मिड-डे मील बनाने में एक गैस सिलिंडर करीब सात दिन तक चलता है, जबकि जिन विद्यालयों में डेढ़ सौ या उससे अधिक छात्र हैं, वहां तीन से चार दिन में ही सिलिंडर समाप्त हो जाता है।