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Saharanpur News: मरीजों का दर्द बढ़ा रहा सिस्टम, स्ट्रेचर खुद खींच रहे तीमारदार
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जिला अस्पताल में बिना वार्ड ब्वाय के व्हीलचेयर पर मरीज को वार्ड में ले जाते परिजन
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- जिला अस्पताल में मरीजों को वार्ड तक ले जाने की व्यवस्था पटरी से उतरी
- इमरजेंसी के बाहर नदारद मिले स्ट्रेचर, वार्ड बॉय फरमा रहे थे आराम
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। सरकार भले ही स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने में लगी हो, लेकिन जिला अस्पताल में मरीजों की कोई सुनने वाला नहीं है। हालत यह है कि तीमारदार खुद ही मरीज को स्ट्रेचर पर लेटाकर खींचते हैं। वार्ड तक खुद ही ले जाते हैं। कुछ वार्ड बॉय अपनी ड्यूटी तक सीमित हैं। यह हाल तब है जब कई बार कार्रवाई भी हो चुकी है।
इस समय बुखार, डायरिया, गले में खराश, सीने में दर्द समेत अन्य बीमारियों से लोग जूझ रहे हैं, जिससे एसबीडी जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है। ओपीडी एक हजार से ऊपर तक पहुंच गई। पंजीकरण खिड़की से ओपीडी तक मरीज व तीमारदारों की कतार लगी रही। जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, फिर भी मरीजों और तीमारदारों को समस्याओं से जूझना पड़ता है।
बृहस्पतिवार को अस्पताल में तीमारदार मरीजों को स्ट्रेचर पर बैठाकर ले जाते मिले। मनोहरपुर निवासी तीमारदार अपने मरीज सुरेश को इमरजेंसी से स्ट्रेचर पर लिटाकर ओपीडी में हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचे। सुरेश के कूल्हे में फ्रैक्चर आया था। स्ट्रेचर खींचते समय तीमारदार पसीने से तर-बतर थे। डॉक्टरों को दिखाने के लिए कुछ देर तक बाहर ही खड़े रहे, जिस स्ट्रेचर से मरीज को लेकर जा रहे थे, उसकी हालत भी ठीक नहीं थी।
इसके अलावा एंबुलेंस से उतरने के बाद मरीज को तीमारदार व्हीलचेयर से ले जाते दिखे। जिला अस्पताल में यह रोज का हाल है। जिस पर चिकित्साधिकारियों का ध्यान नहीं जाता। सबसे बड़ी समस्या उन तीमारदारों के साथ होती है, जो महिलाएं होती हैं या फिर मरीज अकेले होते हैं। सवाल यह उठता है कि यदि तीमारदार को ही यह सब करना है तो वार्ड बॉय, अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आदि जिम्मेदारी से बचते रहेंगे।
-- वर्जन
अस्पताल के हर वार्ड व इमरजेंसी में वार्ड बॉय की तैनाती है। उनका काम है कि अगर कोई भर्ती मरीज एक्सरे या अन्य जांच कराने के लिए डॉक्टर ने लिखा और वह चल नहीं सकता है तो वार्ड बॉय की जिम्मेदारी है कि वह मरीज को स्ट्रेचर व व्हीलचेयर से लेकर जाए। अगर कोई कर्मचारी अपने काम में लापरवाही कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. रविप्रकाश, कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। सरकार भले ही स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने में लगी हो, लेकिन जिला अस्पताल में मरीजों की कोई सुनने वाला नहीं है। हालत यह है कि तीमारदार खुद ही मरीज को स्ट्रेचर पर लेटाकर खींचते हैं। वार्ड तक खुद ही ले जाते हैं। कुछ वार्ड बॉय अपनी ड्यूटी तक सीमित हैं। यह हाल तब है जब कई बार कार्रवाई भी हो चुकी है।
इस समय बुखार, डायरिया, गले में खराश, सीने में दर्द समेत अन्य बीमारियों से लोग जूझ रहे हैं, जिससे एसबीडी जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है। ओपीडी एक हजार से ऊपर तक पहुंच गई। पंजीकरण खिड़की से ओपीडी तक मरीज व तीमारदारों की कतार लगी रही। जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, फिर भी मरीजों और तीमारदारों को समस्याओं से जूझना पड़ता है।
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बृहस्पतिवार को अस्पताल में तीमारदार मरीजों को स्ट्रेचर पर बैठाकर ले जाते मिले। मनोहरपुर निवासी तीमारदार अपने मरीज सुरेश को इमरजेंसी से स्ट्रेचर पर लिटाकर ओपीडी में हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचे। सुरेश के कूल्हे में फ्रैक्चर आया था। स्ट्रेचर खींचते समय तीमारदार पसीने से तर-बतर थे। डॉक्टरों को दिखाने के लिए कुछ देर तक बाहर ही खड़े रहे, जिस स्ट्रेचर से मरीज को लेकर जा रहे थे, उसकी हालत भी ठीक नहीं थी।
इसके अलावा एंबुलेंस से उतरने के बाद मरीज को तीमारदार व्हीलचेयर से ले जाते दिखे। जिला अस्पताल में यह रोज का हाल है। जिस पर चिकित्साधिकारियों का ध्यान नहीं जाता। सबसे बड़ी समस्या उन तीमारदारों के साथ होती है, जो महिलाएं होती हैं या फिर मरीज अकेले होते हैं। सवाल यह उठता है कि यदि तीमारदार को ही यह सब करना है तो वार्ड बॉय, अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आदि जिम्मेदारी से बचते रहेंगे।
अस्पताल के हर वार्ड व इमरजेंसी में वार्ड बॉय की तैनाती है। उनका काम है कि अगर कोई भर्ती मरीज एक्सरे या अन्य जांच कराने के लिए डॉक्टर ने लिखा और वह चल नहीं सकता है तो वार्ड बॉय की जिम्मेदारी है कि वह मरीज को स्ट्रेचर व व्हीलचेयर से लेकर जाए। अगर कोई कर्मचारी अपने काम में लापरवाही कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. रविप्रकाश, कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल

जिला अस्पताल में बिना वार्ड ब्वाय के व्हीलचेयर पर मरीज को वार्ड में ले जाते परिजन