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Saharanpur News: युद्ध के असर से 30 फीसदी घटा औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन
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कारोबार की खबरः रामजी सुनेजा
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- बढ़ते तनाव और औद्योगिक डीजल के दामों का पड़ रहा असर
- ट्रांसपोर्टेशन से लेकर खाने-पीने की वस्तुओं के दाम में उछाल की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। पश्चिम एशिया में युद्ध का असर जनपद की औद्योगिक इकाइयों पर पड़ने लगा है। साथ ही औद्योगिक डीजल की कीमतों में वृद्धि का भी असर दिखने लगा है। नतीजा, औद्योगिक इकाइयों ने अपना उत्पादन करीब 30 फीसदी कम कर दिया है।
जनपद से बड़े स्तर पर यूरोप सहित खाड़ी के देशों में वुडन हैंडीक्राफ्ट का निर्यात होता है। साथ ही होजरी उद्योग भी प्रदेश के विभिन्न राज्यों में अपना माल भेजता है। पहले तो ईरान, अमेरिका-इस्राइल युद्ध के चलते जिले का निर्यात प्रभावित हो रहा था। अब सरकार की ओर से औद्योगिक इकाइयों को सप्लाई होने वाले डीजल की कीमतों में 25 फीसदी का इजाफा कर दिया है।
पश्चिम एशिया में युद्ध की जल्द समाप्ति के आसार नहीं है। साथ ही मांग भी घटने की आशंका है। ऐसे में जिले के निर्यातक और कारोबारी चिंतित हैं। अमेरिका के टैरिफ के बाद जो कुछ थोड़ी बहुत उम्मीद ईद-उल-फितर पर खाड़ी के देशों से थी। उसे युद्ध ने खत्म कर दिया है। इस्राइल से लेकर खाड़ी के देशों द्वारा दिए गए 150 करोड़ रुपये के ऑर्डर होल्ड पर चले गए हैं। अब औद्योगिक डीजल के महंगा होने से मांग घटने और कच्चे माल की लागत बढ़ने की उम्मीद है। यदि सामान्य डीजल के दाम भी बढ़ते हैं तो इसका सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ेगा। ऐसे में कच्चे माल से लेकर सब्जी आदि के दामों में इजाफा होगा। उद्यमियों ने वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रखते हुए इकाइयों में उत्पादन को कम कर दिया है। जिले में करीब 2500 से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। इनमें बड़ी संख्या में वुडन हैंडीक्राफ्ट और होजरी इकाइयां शामिल हैं।
- बोले कारोबारी
पहले ही टैरिफ के चलते उद्योग बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है। पश्चिमी एशिया में युद्ध के चलते स्थितियां बिगड़ रहीं हैं। इसका सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम उद्योग पर पड़ रहा है। इकाइयों में करीब 30 फीसदी उत्पादन कम हो गया है। - रामजी सुनेजा, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आईआईए।
युद्ध के चलते पहले ही होजरी उद्योग पर महंगाई की मार पड़ रही है। पॉलिएस्टर से लेकर पॉलीकेमिकल भी महंगे हो गए हैं। करीब 12 फीसदी दाम कच्चे माल के बढ़े हैं। स्थिति में सुधार न होने पर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। - वैभव कांबोज, कोषाध्यक्ष होजरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन
सरकार ने औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ाए हैं। ट्रांसपोर्ट उद्योग पहले ही कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहा है। डीजल के दाम यदि बढ़ गए तो यह इंडस्ट्री तबाह हो जाएगी। जब कंपनियों में ही उत्पादन ही कम है तो ट्रांसपोर्ट कारोबारी नुकसान में ट्रक कैसे रवाना करेगा। - ब्रित चावला, अध्यक्ष सहारनपुर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
युद्ध का असर कारोबार पर पड़ रहा है। प्लास्टिक महंगी हुई है। इससे पैकेजिंग के दाम बढ़ गए हैं। साथ ही पेंट के दामों में भी इजाफा हुआ है। इन सभी चीजों का असर तैयार माल के दामों पर पड़ रहा है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरती तो वुडन हैंडीक्राफ्ट को और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। - मयंक अग्रवाल उद्यमी और निर्यातक
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। पश्चिम एशिया में युद्ध का असर जनपद की औद्योगिक इकाइयों पर पड़ने लगा है। साथ ही औद्योगिक डीजल की कीमतों में वृद्धि का भी असर दिखने लगा है। नतीजा, औद्योगिक इकाइयों ने अपना उत्पादन करीब 30 फीसदी कम कर दिया है।
जनपद से बड़े स्तर पर यूरोप सहित खाड़ी के देशों में वुडन हैंडीक्राफ्ट का निर्यात होता है। साथ ही होजरी उद्योग भी प्रदेश के विभिन्न राज्यों में अपना माल भेजता है। पहले तो ईरान, अमेरिका-इस्राइल युद्ध के चलते जिले का निर्यात प्रभावित हो रहा था। अब सरकार की ओर से औद्योगिक इकाइयों को सप्लाई होने वाले डीजल की कीमतों में 25 फीसदी का इजाफा कर दिया है।
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पश्चिम एशिया में युद्ध की जल्द समाप्ति के आसार नहीं है। साथ ही मांग भी घटने की आशंका है। ऐसे में जिले के निर्यातक और कारोबारी चिंतित हैं। अमेरिका के टैरिफ के बाद जो कुछ थोड़ी बहुत उम्मीद ईद-उल-फितर पर खाड़ी के देशों से थी। उसे युद्ध ने खत्म कर दिया है। इस्राइल से लेकर खाड़ी के देशों द्वारा दिए गए 150 करोड़ रुपये के ऑर्डर होल्ड पर चले गए हैं। अब औद्योगिक डीजल के महंगा होने से मांग घटने और कच्चे माल की लागत बढ़ने की उम्मीद है। यदि सामान्य डीजल के दाम भी बढ़ते हैं तो इसका सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ेगा। ऐसे में कच्चे माल से लेकर सब्जी आदि के दामों में इजाफा होगा। उद्यमियों ने वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रखते हुए इकाइयों में उत्पादन को कम कर दिया है। जिले में करीब 2500 से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। इनमें बड़ी संख्या में वुडन हैंडीक्राफ्ट और होजरी इकाइयां शामिल हैं।
- बोले कारोबारी
पहले ही टैरिफ के चलते उद्योग बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है। पश्चिमी एशिया में युद्ध के चलते स्थितियां बिगड़ रहीं हैं। इसका सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम उद्योग पर पड़ रहा है। इकाइयों में करीब 30 फीसदी उत्पादन कम हो गया है। - रामजी सुनेजा, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आईआईए।
युद्ध के चलते पहले ही होजरी उद्योग पर महंगाई की मार पड़ रही है। पॉलिएस्टर से लेकर पॉलीकेमिकल भी महंगे हो गए हैं। करीब 12 फीसदी दाम कच्चे माल के बढ़े हैं। स्थिति में सुधार न होने पर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। - वैभव कांबोज, कोषाध्यक्ष होजरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन
सरकार ने औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ाए हैं। ट्रांसपोर्ट उद्योग पहले ही कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहा है। डीजल के दाम यदि बढ़ गए तो यह इंडस्ट्री तबाह हो जाएगी। जब कंपनियों में ही उत्पादन ही कम है तो ट्रांसपोर्ट कारोबारी नुकसान में ट्रक कैसे रवाना करेगा। - ब्रित चावला, अध्यक्ष सहारनपुर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
युद्ध का असर कारोबार पर पड़ रहा है। प्लास्टिक महंगी हुई है। इससे पैकेजिंग के दाम बढ़ गए हैं। साथ ही पेंट के दामों में भी इजाफा हुआ है। इन सभी चीजों का असर तैयार माल के दामों पर पड़ रहा है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरती तो वुडन हैंडीक्राफ्ट को और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। - मयंक अग्रवाल उद्यमी और निर्यातक

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