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Saharanpur News: बाग ठेकेदार के पिता की हत्या में दो दोषियों को आजीवन कारावास
Sat, 01 Aug 2026 01:19 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 01 Aug 2026 01:19 AM IST
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सहारनपुर। अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायालय संख्या-एक मनीष कुमार की अदालत ने बाग ठेकेदार मुर्सलीन के पिता आबुल हसन की हत्या के मामले में दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। माहेश्वरी गांव निवासी दोषी भुट्टू व अमजद पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
वादी मुर्सलीन ने 17 जून 2014 को थाना चिलकाना में तहरीर दी थी। बताया कि वह बाग खरीदने और बेचने का कार्य करता है। उसके पिता आबुल हसन को भुट्टू मकान दिलाने गया था। उसने पिता से 80 हजार रुपये उधार लिए थे। इसके बाद न तो उसने मकान के लिए जगह दी और न ही लिए हुए रुपये वापस किए। पिता व मैंने कई बार रुपये वापस करने के लिए कहा। अमजद ने भी 50 हजार रुपये मकान बनाने के लिए उधार लिए थे। अमजद भी रुपये देने में आनाकानी कर रहा था।
अमजद ने धमकी भी दी कि जब कहीं से रुपये मिलेंगे तो एक-एक रुपया वापस कर दूंगा। यदि बीच में टोका तो तुझे व तेरे लड़के को जान से मार दूंगा। इसके बाद अमजद और भुट्टू ने योजनाबद्ध तरीके से उसके पिता आबुल हसन से कहा कि आकर मकान की जगह देख लो, फिर बैनामा करा देंगे। शाम तक भी उसके पिता घर वापस नहीं आए। शाम के समय चाचा के लड़के ने बताया कि आबुल हसन को किसी ने मार दिया है। पिता उस दिन 50 हजार रुपये भी लेकर गए थे। वह भी उनके पास से नहीं मिले। गला दबाकर हत्या की गई थी।
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पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की। विवेचना के बाद पुलिस ने मुकदमे को अदालत में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और विवेचना से जुड़े साक्ष्य कोर्ट में पेश किए। बचाव पक्ष ने निर्दोष बताते हुए उन्हें झूठा फंसाने और गवाहों के पक्षपाती होने की दलील दी। अदालत ने पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद दोषी भुट्टू और अमजद निवासी माहेश्वरी कला थाना चिलकाना को सजा सुनाई है।
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वादी मुर्सलीन ने 17 जून 2014 को थाना चिलकाना में तहरीर दी थी। बताया कि वह बाग खरीदने और बेचने का कार्य करता है। उसके पिता आबुल हसन को भुट्टू मकान दिलाने गया था। उसने पिता से 80 हजार रुपये उधार लिए थे। इसके बाद न तो उसने मकान के लिए जगह दी और न ही लिए हुए रुपये वापस किए। पिता व मैंने कई बार रुपये वापस करने के लिए कहा। अमजद ने भी 50 हजार रुपये मकान बनाने के लिए उधार लिए थे। अमजद भी रुपये देने में आनाकानी कर रहा था।
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अमजद ने धमकी भी दी कि जब कहीं से रुपये मिलेंगे तो एक-एक रुपया वापस कर दूंगा। यदि बीच में टोका तो तुझे व तेरे लड़के को जान से मार दूंगा। इसके बाद अमजद और भुट्टू ने योजनाबद्ध तरीके से उसके पिता आबुल हसन से कहा कि आकर मकान की जगह देख लो, फिर बैनामा करा देंगे। शाम तक भी उसके पिता घर वापस नहीं आए। शाम के समय चाचा के लड़के ने बताया कि आबुल हसन को किसी ने मार दिया है। पिता उस दिन 50 हजार रुपये भी लेकर गए थे। वह भी उनके पास से नहीं मिले। गला दबाकर हत्या की गई थी।
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पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की। विवेचना के बाद पुलिस ने मुकदमे को अदालत में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और विवेचना से जुड़े साक्ष्य कोर्ट में पेश किए। बचाव पक्ष ने निर्दोष बताते हुए उन्हें झूठा फंसाने और गवाहों के पक्षपाती होने की दलील दी। अदालत ने पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद दोषी भुट्टू और अमजद निवासी माहेश्वरी कला थाना चिलकाना को सजा सुनाई है।