{"_id":"69bc5a0564ec8b2da309e746","slug":"another-hurdle-for-exporters-freight-rates-rise-and-companies-refuse-to-insure-cargo-sambhal-news-c-275-1-smbd1030-133287-2026-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sambhal News: निर्यातकों की मुश्किल एक और मुश्किल, किराया बढ़ा और माल का बीमा नहीं कर रहीं कंपनियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sambhal News: निर्यातकों की मुश्किल एक और मुश्किल, किराया बढ़ा और माल का बीमा नहीं कर रहीं कंपनियां
विज्ञापन
विज्ञापन
संभल। निर्यातकों की मुश्किल अमेरिका-इस्राइल और ईरान के युद्ध से बढ़ती जा रही हैं। चिंतित निर्यातक मानते हैं कि यदि युद्ध जल्द बंद नहीं हुआ तो बड़ी मुश्किल सामने आ जाएगी। निर्यातकों की मानें तो यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों के लिए जाने वाले माल का बीमा कंपनियां बीमा नहीं कर रही हैं। इससे निर्यातकों की चिंता ज्यादा बढ़ी हुई है। हालांकि जो डील पुरानी हैं उनको निर्यातक पूरा कर रहे हैं। भले उनको इस डील से मुनाफा मिले या न मिले। नुकसान भी फिलहाल उठाने के लिए निर्यातक तैयार हैं।
संभल मेंथोल उत्पाद का निर्यात करने में पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश का पहला जिला था। इस वित्तीय वर्ष में अमेरिका के टैरिफ, युद्ध और चीन के सिंथेटिक मेंथोल से कारोबार 40 प्रतिशत तक कम हो गया। हालांकि अभी भी प्रदेश में दूसरे नंबर का जिला है जो निर्यात करता है।
दरअसल प्रदेश में संभल, रामपुर और बाराबंकी जिले से ही मेंथोल उत्पाद का निर्यात बड़े पैमाने पर किया जाता है। आंकड़ों के अनुसार करीब 90 प्रतिशत निर्यात यही तीन जिले करते हैं। प्रदेश के बाकी जिलों में मामूली निर्यात किया जाता है। संभल से पिछले वित्तीय वर्ष में करीब एक हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया गया था। यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों में मेंथोल के कई उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। इन उत्पाद को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला रॉ मेटेरियल आयात किया जाता है।
अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के चलते निर्यात पर पूरा असर पड़ा है। आयात भी महंगा हो गया है। 70 प्रतिशत तक महंगाई बढ़ी है। यही स्थित निर्यात में है। किराया डेढ़ से दोगुना तक वसूला जा रहा है। यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों के लिए जाने वाले माल का बीमा कंपनियां बीमा नहीं कर रही हैं। इससे निर्यातकों की चिंता ज्यादा बढ़ी हुई है। हालांकि जो डील पुरानी हैं उनको निर्यातक पूरा कर रहे हैं। भले उनको इस डील से मुनाफा मिले या न मिले। नुकसान भी फिलहाल उठाने के लिए निर्यातक तैयार हैं।
000000
कंटेनर का बार सरचार्ज के नाम पर बढ़ा किराया
अमेरिका-इस्राइल और ईरान का युद्ध 28 फरवरी से शुरू हुआ है। इससे पहले ही माल बंदरगाहों से निकल चुका था। बीच में जहां माल रुक गया वहां से ही बार सरचार्ज के नाम पर किराया बढ़ाया गया। यूरोप को जाने वाले मार्ग पूरी तरह सुरक्षित हैं लेकिन बार सरचार्ज के नाम पर किराया वहां भी डेढ़ से दोगुना वसूला जा रहा है। ऐसी स्थिति में माल है कि यदि वापस करते हैं तो पुराना किराया तो अदा करना ही पड़ेगा और इससे पूरा नुकसान होगा। डील भी पूरी नहीं हो सकेगी। इसलिए मजबूरन किराया बढ़ाकर अदा करना पड़ रहा है।
00000
चीन ने सिंथेटिक मेंथोल से निर्यातकों को दिया है झटका
चीन सिंथेटिक मेंथोल का निर्यात करता है। चीन की जो मांग हुआ करती थी वह खत्म हो गई है। इसके साथ ही चीन सिंथेटिक मेंथोल का निर्यात भी करता है। इसका भी कारोबार पर पूरा असर हुआ है। निर्यातकों का कहना है कि सिंथेटिक मेंथोल बड़ी चुनौती है। अमेरिका का टैरिफ दूसरी समस्या बना और अब युद्ध से निर्यात पर पूरी तरह असर पड़ा है।
0000000
किराया बढ़ा है और बीमा भी माल का नहीं किया जा रहा। जबकि यूरोप जाने वाले मार्ग पूरी तरह सुरक्षित हैं। हमारी जो पुरानी डील हैं उनको तो पूरा करना ही पड़ेगा। हालांकि नया ऑर्डर नहीं मिल रहा है। सिंथेटिक मेंथोल, अमेरिका का टैरिफ और युद्ध निर्यात पर पूरा असर कर रहे हैं। इसके चलते इस वर्ष निर्यात कम हो गया है।
अरविंद अरोरा, निर्यातक, संभल
000000
चीन और ऑस्ट्रेलिया की तरफ जाने वाले माल का बीमा कंपनियां बीमा कर रही हैं। यूरोप को जाने वाले माल पर किराया भी डेढ़ से दोगुना कर दिया है। उम्मीद है कि युद्ध ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। इसके बाद ही कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल तो पुराने ऑर्डर ही भेजे जा रहे हैं।
फूल प्रकाश वार्ष्णेय, निर्यातक, चंदौसी
Trending Videos
संभल मेंथोल उत्पाद का निर्यात करने में पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश का पहला जिला था। इस वित्तीय वर्ष में अमेरिका के टैरिफ, युद्ध और चीन के सिंथेटिक मेंथोल से कारोबार 40 प्रतिशत तक कम हो गया। हालांकि अभी भी प्रदेश में दूसरे नंबर का जिला है जो निर्यात करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल प्रदेश में संभल, रामपुर और बाराबंकी जिले से ही मेंथोल उत्पाद का निर्यात बड़े पैमाने पर किया जाता है। आंकड़ों के अनुसार करीब 90 प्रतिशत निर्यात यही तीन जिले करते हैं। प्रदेश के बाकी जिलों में मामूली निर्यात किया जाता है। संभल से पिछले वित्तीय वर्ष में करीब एक हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया गया था। यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों में मेंथोल के कई उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। इन उत्पाद को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला रॉ मेटेरियल आयात किया जाता है।
अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के चलते निर्यात पर पूरा असर पड़ा है। आयात भी महंगा हो गया है। 70 प्रतिशत तक महंगाई बढ़ी है। यही स्थित निर्यात में है। किराया डेढ़ से दोगुना तक वसूला जा रहा है। यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों के लिए जाने वाले माल का बीमा कंपनियां बीमा नहीं कर रही हैं। इससे निर्यातकों की चिंता ज्यादा बढ़ी हुई है। हालांकि जो डील पुरानी हैं उनको निर्यातक पूरा कर रहे हैं। भले उनको इस डील से मुनाफा मिले या न मिले। नुकसान भी फिलहाल उठाने के लिए निर्यातक तैयार हैं।
000000
कंटेनर का बार सरचार्ज के नाम पर बढ़ा किराया
अमेरिका-इस्राइल और ईरान का युद्ध 28 फरवरी से शुरू हुआ है। इससे पहले ही माल बंदरगाहों से निकल चुका था। बीच में जहां माल रुक गया वहां से ही बार सरचार्ज के नाम पर किराया बढ़ाया गया। यूरोप को जाने वाले मार्ग पूरी तरह सुरक्षित हैं लेकिन बार सरचार्ज के नाम पर किराया वहां भी डेढ़ से दोगुना वसूला जा रहा है। ऐसी स्थिति में माल है कि यदि वापस करते हैं तो पुराना किराया तो अदा करना ही पड़ेगा और इससे पूरा नुकसान होगा। डील भी पूरी नहीं हो सकेगी। इसलिए मजबूरन किराया बढ़ाकर अदा करना पड़ रहा है।
00000
चीन ने सिंथेटिक मेंथोल से निर्यातकों को दिया है झटका
चीन सिंथेटिक मेंथोल का निर्यात करता है। चीन की जो मांग हुआ करती थी वह खत्म हो गई है। इसके साथ ही चीन सिंथेटिक मेंथोल का निर्यात भी करता है। इसका भी कारोबार पर पूरा असर हुआ है। निर्यातकों का कहना है कि सिंथेटिक मेंथोल बड़ी चुनौती है। अमेरिका का टैरिफ दूसरी समस्या बना और अब युद्ध से निर्यात पर पूरी तरह असर पड़ा है।
0000000
किराया बढ़ा है और बीमा भी माल का नहीं किया जा रहा। जबकि यूरोप जाने वाले मार्ग पूरी तरह सुरक्षित हैं। हमारी जो पुरानी डील हैं उनको तो पूरा करना ही पड़ेगा। हालांकि नया ऑर्डर नहीं मिल रहा है। सिंथेटिक मेंथोल, अमेरिका का टैरिफ और युद्ध निर्यात पर पूरा असर कर रहे हैं। इसके चलते इस वर्ष निर्यात कम हो गया है।
अरविंद अरोरा, निर्यातक, संभल
000000
चीन और ऑस्ट्रेलिया की तरफ जाने वाले माल का बीमा कंपनियां बीमा कर रही हैं। यूरोप को जाने वाले माल पर किराया भी डेढ़ से दोगुना कर दिया है। उम्मीद है कि युद्ध ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। इसके बाद ही कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल तो पुराने ऑर्डर ही भेजे जा रहे हैं।
फूल प्रकाश वार्ष्णेय, निर्यातक, चंदौसी