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Sambhal News: केमिकल मुक्त गुलाल से सजेगी होली
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चंदौसी/बनियाठेर। गांव बनियाखेड़ा गांव में होली के त्योहार को देखते हुए स्वयं सहायता समूह की महिलाएं केमिकल रहित प्राकृतिक गुलाल तैयार कर रही हैं। सुरक्षित और त्वचा के अनुकूल इस गुलाल की बाजार में अच्छी मांग हो रही है, जिससे ग्रामीण आंचल की महिलाओं को रोजगार के साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिल रहा है। कम लागत में तैयार हो रहा यह गुलाल लोगों के लिए सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रहा है।
तीन व चार मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर चंदौसी के गांव बनियाखेड़ा में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं केमिकल रहित प्राकृतिक गुलाल तैयार करने में जुटी हुई हैं। जिससे महिलाओं को रोजगार के साथ आत्मनिर्भर बनने का मौका मिल रहा है। समूह की अध्यक्ष अनुपमा सिंह ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की दस, श्रीजी समूह की आठ और मधु स्वयं सहायता समूह की सात महिलाओं सहित करीब 25 महिलाएं गुलाल बनाने का कार्य कर रही हैं।
महिलाएं फूड कलर और अरारोट से गुलाल तैयार कर रही हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित और त्वचा के लिए नुकसान रहित है। इसकी खासियत यह है कि हाथों से रगड़ने पर इसका रंग और अधिक निखरकर आता है। बताया कि एक किलो गुलाल बनाने में करीब 180 रुपये की लागत आती है, जबकि बाजार में इसे लगभग 240 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा जाएगा। बताया कि इससे गांव की महिलाओं को रोजगार मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक रंगों को बढ़ावा भी मिल रहा है।
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उत्पादों की मांग के अनुसार ब्लॉक व जिला स्तरीय बाजारों में आपूर्ति की जा रही है, जिसमें प्रशासन का विशेष सहयोग मिल रहा है।
अनूपमा सिंह, अध्यक्ष स्वयं सहायता समूह
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पूरी तरह ऑर्गेनिक फूड कलर का उपयोग कर विभिन्न रंगों के गुलाल तैयार किए जा रहे हैं। फिलहाल भगवा रंग के गुलाल की मांग सबसे अधिक देखने को मिल रही है।
रशिम, सदस्य स्वयं सहायता समूह
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तीन व चार मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर चंदौसी के गांव बनियाखेड़ा में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं केमिकल रहित प्राकृतिक गुलाल तैयार करने में जुटी हुई हैं। जिससे महिलाओं को रोजगार के साथ आत्मनिर्भर बनने का मौका मिल रहा है। समूह की अध्यक्ष अनुपमा सिंह ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की दस, श्रीजी समूह की आठ और मधु स्वयं सहायता समूह की सात महिलाओं सहित करीब 25 महिलाएं गुलाल बनाने का कार्य कर रही हैं।
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महिलाएं फूड कलर और अरारोट से गुलाल तैयार कर रही हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित और त्वचा के लिए नुकसान रहित है। इसकी खासियत यह है कि हाथों से रगड़ने पर इसका रंग और अधिक निखरकर आता है। बताया कि एक किलो गुलाल बनाने में करीब 180 रुपये की लागत आती है, जबकि बाजार में इसे लगभग 240 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा जाएगा। बताया कि इससे गांव की महिलाओं को रोजगार मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक रंगों को बढ़ावा भी मिल रहा है।
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उत्पादों की मांग के अनुसार ब्लॉक व जिला स्तरीय बाजारों में आपूर्ति की जा रही है, जिसमें प्रशासन का विशेष सहयोग मिल रहा है।
अनूपमा सिंह, अध्यक्ष स्वयं सहायता समूह
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पूरी तरह ऑर्गेनिक फूड कलर का उपयोग कर विभिन्न रंगों के गुलाल तैयार किए जा रहे हैं। फिलहाल भगवा रंग के गुलाल की मांग सबसे अधिक देखने को मिल रही है।
रशिम, सदस्य स्वयं सहायता समूह
