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Sambhal News: जामा मस्जिद इमाम और उनके भाई पर सात करोड़ का जुर्माना

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 02:10 AM IST
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Jama Masjid Imam and his brother fined Rs 7 crore
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संभल। शहर के चंदौसी मार्ग पर स्थित गांव सैफखां सराय में मौलाना खुर्शीद मियां की मजार, मस्जिद और मकान को तहसीलदार न्यायालय से खाली करने का आदेश किया है। यह निर्माण ग्राम समाज की जमीन पर है। खाली करने के लिए 30 दिन का समय दिया है। वहीं, वर्षों तक कब्जा करने के आरोप पर जामा मस्जिद के शाही इमाम और उनके भाई पर सात करोड़ का जुर्माना भी लगाया है। कब्जा छोड़ने के साथ सात करोड़ का जुर्माना भी अदा करना होगा।
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वर्तमान में इस परिसर में बने मकान में जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना आफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन रहते हैं। इसी परिसर में शाही इमाम के पिता मौलाना खुर्शीद मियां की मजार है और एक अन्य मजार बनी हुई है। मस्जिद भी इसी परिसर में बनी है। वहीं, दूसरी ओर तहसीलदार धीरेंद्र सिंह का कहना है कि उनकी कोर्ट में मामला विचाराधीन था। जिसमें शनिवार को बहस पूरी हो चुकी है। अब बेदखली का आदेश किया गया है। साथ ही दोनों भाइयों पर सात करोड़ का जुर्माना भी लगाया है।
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तहसीलदार ने बताया गया है कि गाटा संख्या 452 की करीब दो बीघा ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर मस्जिद, मजार और मकान का निर्माण किया गया है। 1972 में तत्कालीन तहसीलदार ने इस जमीन के पट्टे निरस्त कर ग्राम समाज की जमीन घोषित किया था। इसके बाद भी इस जमीन पर कब्जा कर लिया गया। हल्का लेखपाल की रिपोर्ट पर धारा 67 के तहत कार्रवाई आगे बढ़ी है। मालूम हो 2016 और 2017 में सरकारी जमीन होने का दावा करते हुए शिकायत की गई थी। बाद में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। लेकिन आगे की कार्रवाई अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं, दूसरी ओर एक शिकायत तहसीलदार न्यायालय में भी दर्ज कराई गई थी। उसमें ही सुनवाई के दौरान अब कब्जा मुक्त किए जाने का आदेश किया गया है।


शाही इमाम का तर्क- इबादतगाह है, हम देखभाल करते हैं

मस्जिद और मजार सुन्नी वक्फ बोर्ड में दर्ज है और वर्षों पहले निर्माण किया गया था। जिसके मुतवल्ली मौलाना खुर्शीद मियां थे। उनके निधन के बाद मुतवल्ली मौलाना आफताब हुसैन वारसी हैं। मजार पर प्रशासन की अनुमति से हर साल उर्स भी आयोजित किया जाता है। यह इबादतगाह है और हम इसकी देखभाल करते हैं। यह तर्क मौलाना आफताब हुसैन वारसी की ओर से तहसीलदार न्यायालय में दाखिल किया गया था। तहसीलदार का कहना है कि निर्माण 20 वर्ष पहले किया गया था। 1972 में इस जमीन को ग्राम समाज की घोषित कर दिया गया था।
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1972 में तत्कालीन तहसीलदार संभल ने पट्टे निरस्त कर ग्राम समाज की भूमि घोषित किया था। इसके बाद भी दो लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया। अब न्यायालय से बेदखली का आदेश किया है। अब कब्जा हटाने के लिए कार्रवाई की जाएगी। कब्जाधारकों को खाली करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।

धीरेंद्र सिंह, तहसीलदार, संभल
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