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Sambhal News: शासन को भेजी गई मैनाठेर बवाल की रिपोर्ट....
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मुरादाबाद। मैनाठेर बवाल से संबंधित मुकदमों और 16 दोषियों को सजा सुनाए जाने के मामले में पुलिस अफसरों ने रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी है। बंद फाइलों को दोबारा खोलने का निर्णय भी लिया जा सकता है। जिस तरह लगातार इस मामले पर नजर रखी जा रही है उससे माना जा रहा है कि मैनाठेर बवाल की बंद फाइलें दोबारा खुल सकती हैं।
23 मार्च को एडीजे- दो कृष्ण कुमार सिंह की अदालत ने मैनाठेर बवाल में 16 मुलजिमों को दोषी करार दिया था। इसके बाद ही शासन ने इस मामले में रिपोर्ट तलब कर ली थी। 28 मार्च को कोर्ट ने 16 दोषियों को आजीवन कारावास और 55-55 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। इसके बाद पुलिस अफसरों की ओर से शासन को रिपोर्ट भेज दी है। जिसमें बताया कि छह जुलाई 2011 को मैनाठेर के असालतनगर में मुस्लिम नाम के युवक की तलाश में पुलिस ने दबिश दी थी। इसके बाद आरोपी के परिजन और अन्य लोगों ने साजिश के तहत धार्मिक पुस्तक का अपमान लगाकर हंगामा किया और मुरादाबाद लखनऊ मार्ग पर तीन जगह जाम लगा दिया था। डींगरपुर चौकी और मैनाठेर थाने में आग लगा दी थी और पुलिस कर्मियों पर हमला कर हथियार छीन लिए थे। तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर हमला किया था। उसी दिन मैनाठेर थाने में थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ने बलवा, आगजनी समेत अन्य धाराओं में 14 नामजद और 300 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें पांच आरोपी गिरफ्तार भी किए गए थे लेकिन 11 जुलाई 2012 को फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगा दी गई। दूसरी प्राथमिकी इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार की ओर से लिखवाई गई थी। जिसमें 30 नामजद और 300-350 अज्ञात आरोपी बनाए गए थे। इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी भी की गई थी। नौ अक्तूबर 2011 को आठ आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल गई। इस मामले में अदालत ने सभी को दोषमुक्त कर दिया। तीसरी प्राथमिकी पीएसी के हेड कांस्टेबल की ओर से दर्ज कराई गई थी। जिसमें 15 नामजद आरोपी बनाए गए थे लेकिन 11 जुलाई 2012 को इस मामले में एफआर लगा दी गई। चौथी प्राथमिकी बिलारी थाने के इंस्पेक्टर राजीव कुमार की ओर से लिखाई गई थी। जिसमें दो नामजद आरोपी बनाए गए लेकिन 11 जुलाई 2012 में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। पांचवां मुकदमा डींगरपुर पुलिस चौकी के कांस्टेबल उपदेश कुमार की ओर से लिखाई गई थी। जिसमें 28 आरोपी नामजद किए गए थे। दो आरोपी गिरफ्तार किए गए थे लेकिन दो आरोपियों के खिलाफ 13 नवंबर 2011 को चार्जशीट दाखिल की गई थी। जिसे शासन ने 2012 में वापस ले लिया था। इस मामले में डीआईजी अशोक कुमार के पीआरओ की ओर से लिखाया गया था। जिसमें 33 नामजद और 300 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें 25 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। इनके खिलाफ एक अक्तूबर 2011 को आरोप पत्र दाखिल किया गया था। इनमें तीन की मृत्यु हो गई जबकि छह नाबालिग होने के कारण किशोर न्याय बोर्ड में सुनवाई चल रही है। 28 मार्च 2026 को एडीजे- दो कृष्ण कुमार की अदालत ने 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह ने बताया कि मैनाठेर बवाल से संबंधित मुकदमों और एक मुकदमे में सजा सुनाए जाने के मामले की रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी गई है।
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23 मार्च को एडीजे- दो कृष्ण कुमार सिंह की अदालत ने मैनाठेर बवाल में 16 मुलजिमों को दोषी करार दिया था। इसके बाद ही शासन ने इस मामले में रिपोर्ट तलब कर ली थी। 28 मार्च को कोर्ट ने 16 दोषियों को आजीवन कारावास और 55-55 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। इसके बाद पुलिस अफसरों की ओर से शासन को रिपोर्ट भेज दी है। जिसमें बताया कि छह जुलाई 2011 को मैनाठेर के असालतनगर में मुस्लिम नाम के युवक की तलाश में पुलिस ने दबिश दी थी। इसके बाद आरोपी के परिजन और अन्य लोगों ने साजिश के तहत धार्मिक पुस्तक का अपमान लगाकर हंगामा किया और मुरादाबाद लखनऊ मार्ग पर तीन जगह जाम लगा दिया था। डींगरपुर चौकी और मैनाठेर थाने में आग लगा दी थी और पुलिस कर्मियों पर हमला कर हथियार छीन लिए थे। तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर हमला किया था। उसी दिन मैनाठेर थाने में थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ने बलवा, आगजनी समेत अन्य धाराओं में 14 नामजद और 300 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें पांच आरोपी गिरफ्तार भी किए गए थे लेकिन 11 जुलाई 2012 को फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगा दी गई। दूसरी प्राथमिकी इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार की ओर से लिखवाई गई थी। जिसमें 30 नामजद और 300-350 अज्ञात आरोपी बनाए गए थे। इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी भी की गई थी। नौ अक्तूबर 2011 को आठ आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल गई। इस मामले में अदालत ने सभी को दोषमुक्त कर दिया। तीसरी प्राथमिकी पीएसी के हेड कांस्टेबल की ओर से दर्ज कराई गई थी। जिसमें 15 नामजद आरोपी बनाए गए थे लेकिन 11 जुलाई 2012 को इस मामले में एफआर लगा दी गई। चौथी प्राथमिकी बिलारी थाने के इंस्पेक्टर राजीव कुमार की ओर से लिखाई गई थी। जिसमें दो नामजद आरोपी बनाए गए लेकिन 11 जुलाई 2012 में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। पांचवां मुकदमा डींगरपुर पुलिस चौकी के कांस्टेबल उपदेश कुमार की ओर से लिखाई गई थी। जिसमें 28 आरोपी नामजद किए गए थे। दो आरोपी गिरफ्तार किए गए थे लेकिन दो आरोपियों के खिलाफ 13 नवंबर 2011 को चार्जशीट दाखिल की गई थी। जिसे शासन ने 2012 में वापस ले लिया था। इस मामले में डीआईजी अशोक कुमार के पीआरओ की ओर से लिखाया गया था। जिसमें 33 नामजद और 300 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें 25 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। इनके खिलाफ एक अक्तूबर 2011 को आरोप पत्र दाखिल किया गया था। इनमें तीन की मृत्यु हो गई जबकि छह नाबालिग होने के कारण किशोर न्याय बोर्ड में सुनवाई चल रही है। 28 मार्च 2026 को एडीजे- दो कृष्ण कुमार की अदालत ने 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह ने बताया कि मैनाठेर बवाल से संबंधित मुकदमों और एक मुकदमे में सजा सुनाए जाने के मामले की रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी गई है।
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