संभल हिंसा: तत्कालीन सीओ अनुज चाैधरी समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज नहीं, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में पुलिस
संभल हिंसा मामले में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर सहित 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट के आदेश के बावजूद रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। संभल पुलिस मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई का कहना है कि बवाल के दौरान पुलिस ने फायरिंग नहीं की और घायल युवक को लगी गोली पुलिस की नहीं थी।
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संभल के तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी व तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी है। बल्कि संभल पुलिस मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने की तैयारी में जुटी है। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई का कहना है कि हाईकोर्ट में अपील कर आदेश को निरस्त कराने की मांग करेंगे।
क्योंकि पुलिस की ओर से बवाल में गोली ही नहीं चलाई गई थी। युवक को जो गोली लगी है, वह भी पुलिस की नहीं है। युवक के पिता ने निराधार आरोप लगाए हैं। संभल के तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी का प्रमोशन हो चुका है और वह वर्तमान में फिरोजाबाद में एएसपी के पद पर तैनात हैं।
संभल कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी अनुज तोमर की तैनाती चंदौसी कोतवाली में है। अनुज चौधरी व अनुज तोमर को खग्गू सराय निवासी यामीन ने नामजद किया है। 15 से 20 अज्ञात पुलिसकर्मी अर्जी में बताए हैं। इन सभी पर बवाल में गोली चलाने का आरोप है।
यामीन का यह भी आरोप है कि उसके बेटे आलम को पुलिसवालों की तीन गोलियां लगी हैं। बवाल में बेटे को आरोपी बनाया गया है, जबकि आलम ठेले पर बिस्किट बेचने का काम करता है और वह 24 नवंबर की सुबह भी बिस्किट बेचने के लिए ही निकला था। इस दौरान ही पुलिस ने गोली चलाई। जिसमें बेटा घायल हुआ।
छिपकर उपचार कराया, तब कहीं जाकर जान बची। हालांकि यामीन के सभी आरोप डीएम और एसपी ने नकार दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बवाल 7:45 बजे के भीड़ ने कर दिया था। ठेला जामा मस्जिद तक पहुंच नहीं सकता था। पुलिस-प्रशासन की थ्री लेयर सुरक्षा थी। ऐसे में ठेला लेकर युवक के पहुंचने का सवाल ही नहीं उठता है।
पहले से ही दिव्यांग है आलम
22 वर्षीय आलम की बहन रजिया ने बताया कि उनका भाई तो पहले से दिव्यांग है। तीन पहिया ठेले से बिस्किट बेचता है। गोली लगने के बाद किसी तरह जान तो बच गई है लेकिन शरीर पूरी तरह कमजोर हो गया है। बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर है। पिता के अलावा भाई भी कमाता था जिससे घर का खर्च चलता है। लेकिन इलाज में उधार तक हो गया है।
यामीन की बेटी बोली-उन्हें धमकाया जा रहा
यामीन की बेटी रजिया ने बताया कि उनका भाई तो मजदूरी पेशा है। तीन गोलियां लगी थीं। बमुश्किल जान बची है। हमारी अधिकारियों ने सुनवाई नहीं की तो पिता कोर्ट पहुंचे। जहां से न्याय मिलने की उम्मीद है। एक वर्ष से हमारा पूरा परिवार परेशान है। घर पर पुलिस आती है और धमकाती है। हमारे पिता और भाई कहीं चले गए हैं। पूरा परिवार डरा हुआ है।
