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Sambhal News: एक साल से पोषण सहायता राशि का इंतजार कर रहे टीबी मरीज
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चंदौसी। टीबी के मरीजों को इलाज के दौरान मिलने वाली पोषण सहायता की राशि लंबे समय से नहीं मिल सकी है। इसके चलते मरीजों को पौष्टिक आहार का खर्च खुद उठाना पड़ रहा है। कई मरीज मजबूरी में खुद खर्च कर पौष्टिक आहार की व्यवस्था कर रहे हैं।
टीबी के इलाज में दवा के साथ संतुलित और पौष्टिक आहार को भी जरूरी माना जाता है। इसी उद्देश्य से सरकार की ओर से उपचाराधीन मरीजों को हर माह एक हजार रुपये की पोषण सहायता राशि उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। इसके लिए मरीज का निश्चय पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाता है, ताकि सहायता राशि सीधे उसके खाते में पहुंच सके। लेकिन जिले के मरीजों के खातों में लंबे समय से यह राशि नहीं आई है।
राशि नहीं मिलने का असर मरीजों के खानपान पर भी पड़ रहा है। कई मरीजों का कहना है कि दवाएं तो अस्पताल से मिल रही हैं, लेकिन दूध, फल, दाल, अंडे, मूंगफली और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ खरीदना उनके लिए आसान नहीं है। बढ़ती महंगाई के बीच रोजमर्रा के खर्च पूरे करना ही मुश्किल हो रहा है, ऐसे में अतिरिक्त पोषण का खर्च उठाना कई परिवारों की क्षमता से बाहर हो गया है।
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पौष्टिक आहार मिलने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और मरीज के स्वस्थ होने में मदद मिलती है। लंबे समय से सहायता राशि न मिलने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नोडल अधिकारी डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि पोषण सहायता राशि शासन स्तर से सीधे मरीजों के बैंक खातों में भेजी जाती है। राशि जारी होते ही सभी पात्र मरीजों के खातों में भुगतान कर दिया जाएगा।
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टीबी के इलाज में दवा के साथ संतुलित और पौष्टिक आहार को भी जरूरी माना जाता है। इसी उद्देश्य से सरकार की ओर से उपचाराधीन मरीजों को हर माह एक हजार रुपये की पोषण सहायता राशि उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। इसके लिए मरीज का निश्चय पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाता है, ताकि सहायता राशि सीधे उसके खाते में पहुंच सके। लेकिन जिले के मरीजों के खातों में लंबे समय से यह राशि नहीं आई है।
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राशि नहीं मिलने का असर मरीजों के खानपान पर भी पड़ रहा है। कई मरीजों का कहना है कि दवाएं तो अस्पताल से मिल रही हैं, लेकिन दूध, फल, दाल, अंडे, मूंगफली और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ खरीदना उनके लिए आसान नहीं है। बढ़ती महंगाई के बीच रोजमर्रा के खर्च पूरे करना ही मुश्किल हो रहा है, ऐसे में अतिरिक्त पोषण का खर्च उठाना कई परिवारों की क्षमता से बाहर हो गया है।
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पौष्टिक आहार मिलने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और मरीज के स्वस्थ होने में मदद मिलती है। लंबे समय से सहायता राशि न मिलने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नोडल अधिकारी डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि पोषण सहायता राशि शासन स्तर से सीधे मरीजों के बैंक खातों में भेजी जाती है। राशि जारी होते ही सभी पात्र मरीजों के खातों में भुगतान कर दिया जाएगा।