{"_id":"6a7cdb3faf74e961ea0b1e57","slug":"when-17-revolutionaries-from-the-village-challenged-british-rule-sambhal-news-c-204-1-chn1003-131782-2026-08-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sambhal News: जब गांव के 17 क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत को ललकारा था","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sambhal News: जब गांव के 17 क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत को ललकारा था
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंदौसी। नगर से पांच किलोमीटर दूर गुमथल गांव की स्वतंत्रता-संग्राम गाथा साहस और बलिदान से भरी है। अंग्रेजी शासन के भय के बावजूद, गुमथल के 17 क्रांतिकारियों ने अपने अदम्य साहस से उसे चुनौती दी। इन गुमनाम नायकों ने देश की आजादी के लिए कई महत्वपूर्ण घटनाओं को अंजाम दिया।
क्रांतिकारी मिश्रीलाल मौर्य के पोते गिलेश मौर्य और महेंद्र मौर्य ने बताया कि पूर्वज अंग्रेजी शासन की गतिविधियों पर नजर रखते थे। उन दिनों बैठकों का दौर चलता था, जहां रेलवे की आवाजाही और सरकारी खजाने पर चर्चा होती थी। गुमथल की गलियों में यह प्रश्न गूंजता था कि देश गुलाम है तो क्या हम चुप बैठे रहें।
इसका उत्तर था कि जब तक भारत स्वतंत्र नहीं होगा, संघर्ष जारी रहेगा। गांव के 17 क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सरकारी खजाने को ले जाने वाली ट्रेन को निशाना बनाने की योजना बनाई। उन्होंने गुमथल स्टेशन से करीब 200 मीटर पहले रेलवे ट्रैक को बाधित कर दिया। हालांकि, संदूक का ताला नहीं टूट सका। इसी दौरान अंग्रेजी पुलिस को इसकी खबर लग गई, जिससे यह घटना काकोरी कांड होने से बच गई।
विज्ञापन
पूर्व ग्राम प्रधान विनय शर्मा ने बताया कि क्रांतिकारियों की गतिविधियों की सूचना अंग्रेजी प्रशासन तक पहुंची। अंग्रेजी पुलिस ने पूरे गांव को घेर लिया और क्रांतिकारियों को सौंपने की मांग की। ग्रामीणों ने सहयोग नहीं किया, जिससे पुलिस तीन दिन तक गांव की घेराबंदी करती रही। अंततः, अंग्रेजी प्रशासन ने गांव के चारों ओर आग लगा दी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने एक बाग में कुछ अंग्रेजों को बंदी बनाकर उन्हें घास खिलाई थी।
बाग में कुछ अंग्रेजों को पकड़ कर खिलाई थी घास
कहा जाता है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने कुछ अंग्रेजों को एक बाग में बंदी बना लिया था। और अंग्रेजाें को घास खिलाई थी। बदला लेने के लिए अंग्रेजी पुलिस ने गांव पर तोप तान दी थी और क्रांतिकारियों को उनके हवाले करने की मांग की थी। तब पूरा गांव खाली हो गया। गांव के लोग क्रांतिकारियों के साथ ही जंगल में जाकर खुद को सुरक्षित किया था। 1972 में, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लखनऊ में एक कार्यक्रम में गुमथल के क्रांतिकारियों को ताम्र पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्हें पेंशन भी निर्धारित की गई थी। ब्लॉक बनियाखेड़ा परिसर में इन 17 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम का एक शिलापट लगा है। इसमें बिहारी लाल, रामदास, गोकुल, मुकुट बिहारी, प्रेमी, भीमसेन, सालिगराम, मिश्रीलाल, डोरी उर्फ कुमरसेन, चोखे, नित्यकर, गोविंद, नसूआ, बधइयां, नारायण, रामस्वरूप और रामलाल जैसे नाम शामिल हैं।
विज्ञापन
क्रांतिकारी मिश्रीलाल मौर्य के पोते गिलेश मौर्य और महेंद्र मौर्य ने बताया कि पूर्वज अंग्रेजी शासन की गतिविधियों पर नजर रखते थे। उन दिनों बैठकों का दौर चलता था, जहां रेलवे की आवाजाही और सरकारी खजाने पर चर्चा होती थी। गुमथल की गलियों में यह प्रश्न गूंजता था कि देश गुलाम है तो क्या हम चुप बैठे रहें।
विज्ञापन
इसका उत्तर था कि जब तक भारत स्वतंत्र नहीं होगा, संघर्ष जारी रहेगा। गांव के 17 क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सरकारी खजाने को ले जाने वाली ट्रेन को निशाना बनाने की योजना बनाई। उन्होंने गुमथल स्टेशन से करीब 200 मीटर पहले रेलवे ट्रैक को बाधित कर दिया। हालांकि, संदूक का ताला नहीं टूट सका। इसी दौरान अंग्रेजी पुलिस को इसकी खबर लग गई, जिससे यह घटना काकोरी कांड होने से बच गई।
विज्ञापन
पूर्व ग्राम प्रधान विनय शर्मा ने बताया कि क्रांतिकारियों की गतिविधियों की सूचना अंग्रेजी प्रशासन तक पहुंची। अंग्रेजी पुलिस ने पूरे गांव को घेर लिया और क्रांतिकारियों को सौंपने की मांग की। ग्रामीणों ने सहयोग नहीं किया, जिससे पुलिस तीन दिन तक गांव की घेराबंदी करती रही। अंततः, अंग्रेजी प्रशासन ने गांव के चारों ओर आग लगा दी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने एक बाग में कुछ अंग्रेजों को बंदी बनाकर उन्हें घास खिलाई थी।
बाग में कुछ अंग्रेजों को पकड़ कर खिलाई थी घास
कहा जाता है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने कुछ अंग्रेजों को एक बाग में बंदी बना लिया था। और अंग्रेजाें को घास खिलाई थी। बदला लेने के लिए अंग्रेजी पुलिस ने गांव पर तोप तान दी थी और क्रांतिकारियों को उनके हवाले करने की मांग की थी। तब पूरा गांव खाली हो गया। गांव के लोग क्रांतिकारियों के साथ ही जंगल में जाकर खुद को सुरक्षित किया था। 1972 में, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लखनऊ में एक कार्यक्रम में गुमथल के क्रांतिकारियों को ताम्र पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्हें पेंशन भी निर्धारित की गई थी। ब्लॉक बनियाखेड़ा परिसर में इन 17 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम का एक शिलापट लगा है। इसमें बिहारी लाल, रामदास, गोकुल, मुकुट बिहारी, प्रेमी, भीमसेन, सालिगराम, मिश्रीलाल, डोरी उर्फ कुमरसेन, चोखे, नित्यकर, गोविंद, नसूआ, बधइयां, नारायण, रामस्वरूप और रामलाल जैसे नाम शामिल हैं।