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Sant Kabir Nagar News: ईद नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ी
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सेमरियावां, बाघनगर लोहरौली, सालेहपुर, नव्वागांव, चिउटना दानोकुइयां, दुधारा आदि बाजारों में नए कपड़े, जूते, और इत्र की खूब खरीदारी हो रही है। घर की साफ-सफाई, सेवई व ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी के साथ ही दर्जी की दुकानों पर भीड़ है। मस्जिदों में नमाज के लिए साफ-सफाई हो रही है। मंगलवार को रमजान का 27 रोजा मुकम्मल हो गया है। बुधवार को 28वां रोजा रखा गया है। रोजेदार लोग पारंपरिक कुर्ते, पायजामे, और सलवार-सूट खरीद रहे हैं। बच्चों के लिए विशेष फैशन वाले कपड़ों की मांग ज्यादा है।
पकवान में शीर खुरमा, सेवईं, बिरयानी और कबाब के लिए ड्राई फ्रूट्स, दूध की खरीदारी की जा रही है। घरों और मस्जिदों की विशेष सफाई व सजावट की जा रही है, ताकि नमाजियों को असुविधा न हो। स्वास्थ्य के लिहाज से तला-भुना खाने से बचने और हाइड्रेटेड रहने की सलाह दी जा रही है। सेमरियावां के जफीर अली करखी ने बताया कि रमजान का आखिरी अशरा जहन्नुम से निजात दिलाता है। रमजान इंसान को संयम, परहेज और अनुशासन की सीख देता है।
उन्होंने कहा कि ईद का त्योहार समाज में भाईचारा बढ़ाने और खुशियां बांटने का अवसर होता है। पवित्र माहे रमजान अपनी सारी रहमतों, बरकतों और रूहानी नेमतों के साथ खत्म होने वाला है।अब गिनती के सिर्फ तीन या चार दिन बचे हैं। यह पूरा महीना अल्लाह की इबादत, रोजा, तौबा, कुरान की तिलावत, तरावीह, दान-पुण्य, और दुआ और माफी मांगने में बिताया है। रमजान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने और कामुक इच्छाओं से बचने के बारे में नहीं है, बल्कि यह रूह को ट्रेनिंग देने, रूह को पवित्र करने और किरदार को बेहतर बनाने का महीना है। इस महीने में एक मुसलमान अपने रब के और करीब जाने की कोशिश करता है। वह अल्लाह के हुक्म का पालन करते हुए दिन भर हलाल चीज़ों को भी छोड़ देता है ताकि उसमें तक़वा और पवित्रता आए। ताकि इंसान तक़वा पैदा करे और अपनी इच्छाओं पर काबू रखना सीखे।
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पकवान में शीर खुरमा, सेवईं, बिरयानी और कबाब के लिए ड्राई फ्रूट्स, दूध की खरीदारी की जा रही है। घरों और मस्जिदों की विशेष सफाई व सजावट की जा रही है, ताकि नमाजियों को असुविधा न हो। स्वास्थ्य के लिहाज से तला-भुना खाने से बचने और हाइड्रेटेड रहने की सलाह दी जा रही है। सेमरियावां के जफीर अली करखी ने बताया कि रमजान का आखिरी अशरा जहन्नुम से निजात दिलाता है। रमजान इंसान को संयम, परहेज और अनुशासन की सीख देता है।
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उन्होंने कहा कि ईद का त्योहार समाज में भाईचारा बढ़ाने और खुशियां बांटने का अवसर होता है। पवित्र माहे रमजान अपनी सारी रहमतों, बरकतों और रूहानी नेमतों के साथ खत्म होने वाला है।अब गिनती के सिर्फ तीन या चार दिन बचे हैं। यह पूरा महीना अल्लाह की इबादत, रोजा, तौबा, कुरान की तिलावत, तरावीह, दान-पुण्य, और दुआ और माफी मांगने में बिताया है। रमजान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने और कामुक इच्छाओं से बचने के बारे में नहीं है, बल्कि यह रूह को ट्रेनिंग देने, रूह को पवित्र करने और किरदार को बेहतर बनाने का महीना है। इस महीने में एक मुसलमान अपने रब के और करीब जाने की कोशिश करता है। वह अल्लाह के हुक्म का पालन करते हुए दिन भर हलाल चीज़ों को भी छोड़ देता है ताकि उसमें तक़वा और पवित्रता आए। ताकि इंसान तक़वा पैदा करे और अपनी इच्छाओं पर काबू रखना सीखे।