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Sant Kabir Nagar News: मौखिक तर्कशीलता पर चर्चा कर बच्चों में भाषा कौशल विकसित करें
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मेंहदावल। बीआरसी सभागार में बृहस्पतिवार को चल रहे एफएलएन प्रशिक्षण के दूसरे दिन प्रशिक्षण ले रहे शिक्षकों से चर्चा करते हुए संदर्भदाता शिक्षकों ने प्रशिक्षण सत्रों में मौखिक तर्कशीलता, ब्लेंडिंग व ग्रिड का समुचित उपयोग, रिमिडियल शिक्षण और समावेशी कक्षा वातावरण के बारे में कई प्रश्न किए।
प्रशिक्षक अनूप कुमार सिंह, उदयशंकर पाठक, सर्वेश त्रिपाठी, प्रफुल्ल त्रिपाठी और निशांत त्रिपाठी ने कहा कि मौखिक तर्कशीलता पर चर्चा कर बच्चों में भाषा व संख्यात्मक कौशल विकसित करना काफी आसान रहेगा। यह शिक्षकों को बच्चों में मौखिक तर्कशीलता विकसित करने के तरीके सिखाता है, जिससे वे प्रभावी ढंग से संवाद कर सकें, समस्याओं का समाधान करते हुए अवधारणाओं को समझ सकते हैं। मौखिक तर्कशीलता का अर्थ शब्दों का उपयोग करके सोच और समस्या-समाधान, बच्चों को विभिन्न संदर्भों में मौखिक रूप से संवाद करने, कहानी सुनाने और प्रश्नों के उत्तर देने की क्षमता बढ़ाना है।
बच्चों को मौखिक भाषा उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित करना, जैसे कि कहानी सुनाना, प्रश्न पूछना और विचारों को व्यक्त करना, बच्चों को सुनने और समझने के लिए प्रोत्साहित करना, और फिर अपनी समझ मौखिक रूप से व्यक्त करने, बच्चों को समस्याओं को समझने और उनका मौखिक रूप से समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करने, बच्चों में तार्किक सोच विकसित करने, कारण, प्रभाव समझना आदि के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों को कक्षा में सक्रिय रूप से भाग लेने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए बच्चों को शब्द खेल खेलने व नए शब्दों को सीखने के लिए प्रोत्साहित करना सिखाया गया।
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उन्होंने बताया कि एफएलएन प्रशिक्षण में मौखिक तर्कशीलता पर चर्चा बच्चों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उन्हें प्रभावी ढंग से संवाद करने, समस्याओं को हल करने और दुनिया को समझने में मदद करता है। शिक्षकों ने मौखिक तर्कशीलता पर सामूहिक गतिविधि भी किया। इस अवसर पर ब्लॉक के कई आशुतोष कुमार वर्मा, चंद्रलता कुमकुम, मनोज कुमार, कैलाश चंद्र, अभिषेक श्रीवास्तव, अभिषेक त्रिपाठी, अनुपम समेत शिक्षक और शिक्षामित्र मौजूद रहे।
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प्रशिक्षक अनूप कुमार सिंह, उदयशंकर पाठक, सर्वेश त्रिपाठी, प्रफुल्ल त्रिपाठी और निशांत त्रिपाठी ने कहा कि मौखिक तर्कशीलता पर चर्चा कर बच्चों में भाषा व संख्यात्मक कौशल विकसित करना काफी आसान रहेगा। यह शिक्षकों को बच्चों में मौखिक तर्कशीलता विकसित करने के तरीके सिखाता है, जिससे वे प्रभावी ढंग से संवाद कर सकें, समस्याओं का समाधान करते हुए अवधारणाओं को समझ सकते हैं। मौखिक तर्कशीलता का अर्थ शब्दों का उपयोग करके सोच और समस्या-समाधान, बच्चों को विभिन्न संदर्भों में मौखिक रूप से संवाद करने, कहानी सुनाने और प्रश्नों के उत्तर देने की क्षमता बढ़ाना है।
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बच्चों को मौखिक भाषा उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित करना, जैसे कि कहानी सुनाना, प्रश्न पूछना और विचारों को व्यक्त करना, बच्चों को सुनने और समझने के लिए प्रोत्साहित करना, और फिर अपनी समझ मौखिक रूप से व्यक्त करने, बच्चों को समस्याओं को समझने और उनका मौखिक रूप से समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करने, बच्चों में तार्किक सोच विकसित करने, कारण, प्रभाव समझना आदि के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों को कक्षा में सक्रिय रूप से भाग लेने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए बच्चों को शब्द खेल खेलने व नए शब्दों को सीखने के लिए प्रोत्साहित करना सिखाया गया।
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उन्होंने बताया कि एफएलएन प्रशिक्षण में मौखिक तर्कशीलता पर चर्चा बच्चों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उन्हें प्रभावी ढंग से संवाद करने, समस्याओं को हल करने और दुनिया को समझने में मदद करता है। शिक्षकों ने मौखिक तर्कशीलता पर सामूहिक गतिविधि भी किया। इस अवसर पर ब्लॉक के कई आशुतोष कुमार वर्मा, चंद्रलता कुमकुम, मनोज कुमार, कैलाश चंद्र, अभिषेक श्रीवास्तव, अभिषेक त्रिपाठी, अनुपम समेत शिक्षक और शिक्षामित्र मौजूद रहे।