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Sant Kabir Nagar News: सांथा के तीन पीएचसी में नहीं हैं एमबीबीएस चिकित्सक, परेशान होते हैं मरीज
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सांथा। ब्लॉक के तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एमबीबीएस चिकित्सकों की तैनाती न होने से मरीजों को परेशानी होती है। यहां आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हैं। गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सीएचसी, जिला अस्पताल या निजी अस्पताल रेफर किया जाता है। समय पर विशेषज्ञों से इलाज न मिलने से मरीजों और उनके परिजन को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ब्लॉक क्षेत्र की लगभग दो लाख आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर एमबीबीएस चिकित्सक की तैनाती नहीं है। हालत यह है कि तीन पीएचसी मेंहदूपार में डॉक्टर हरिवंश मौर्या बीएचएमएस यानी होम्योपैथिक डॉक्टर, हरैया में डॉक्टर नेहा गोस्वामी हैं जो बीएमएस और पीएचसी रमवापुर सरकारी में डॉक्टर प्रवीण गौड़ की तैनाती है जो बीएमएस हैं।
पीएचसी बीएमएस, बीएचएमएस और फार्मासिस्टों के भरोसे संचालित हो रही हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांव-गांव बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का दावा कर रही है लेकिन क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दावों की पोल खोल रही है। पीएचसी पर इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को अक्सर निराश होकर लौटना पड़ता है। गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल अथवा निजी अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वर्षों से एमबीबीएस चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े है लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन्हें भरने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई।
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पीएचसी में होती है परेशानी
बनवारी, फातमा, अमरनाथ, अनमोल, शिवा, रमावती समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पीएचसी पर एमबीबीएस चिकित्सकों की तैनाती न होने के कारण क्षेत्र के लोग मजबूरी में निजी अस्पतालों में इलाज कराने को विवश हैं। उनका कहना है कि गरीब मरीजों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार समय पर उचित उपचार न मिलने से मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब दो लाख आबादी की स्वास्थ्य व्यवस्था तीन पीएचसी पर टिकी हो और वहां एक भी एमबीबीएस डॉक्टर न हो, तो सरकारी दावे सवालों के घेरे में आ जाते हैं।
सभी पीएचसी पर तैनात डाक्टरों द्वारा मरीजों का इलाज करते हुए सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। एमबीबीएस डाक्टरों की कमी है। जैसे ही जिले पर तैनाती होगी, यहां भी तैनात कर दिए जाएंगे।
राजेश कुमार चौधरी,
अधीक्षक, सीएचसी लोहरसन
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ब्लॉक क्षेत्र की लगभग दो लाख आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर एमबीबीएस चिकित्सक की तैनाती नहीं है। हालत यह है कि तीन पीएचसी मेंहदूपार में डॉक्टर हरिवंश मौर्या बीएचएमएस यानी होम्योपैथिक डॉक्टर, हरैया में डॉक्टर नेहा गोस्वामी हैं जो बीएमएस और पीएचसी रमवापुर सरकारी में डॉक्टर प्रवीण गौड़ की तैनाती है जो बीएमएस हैं।
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पीएचसी बीएमएस, बीएचएमएस और फार्मासिस्टों के भरोसे संचालित हो रही हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांव-गांव बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का दावा कर रही है लेकिन क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दावों की पोल खोल रही है। पीएचसी पर इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को अक्सर निराश होकर लौटना पड़ता है। गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल अथवा निजी अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वर्षों से एमबीबीएस चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े है लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन्हें भरने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई।
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पीएचसी में होती है परेशानी
बनवारी, फातमा, अमरनाथ, अनमोल, शिवा, रमावती समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पीएचसी पर एमबीबीएस चिकित्सकों की तैनाती न होने के कारण क्षेत्र के लोग मजबूरी में निजी अस्पतालों में इलाज कराने को विवश हैं। उनका कहना है कि गरीब मरीजों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार समय पर उचित उपचार न मिलने से मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब दो लाख आबादी की स्वास्थ्य व्यवस्था तीन पीएचसी पर टिकी हो और वहां एक भी एमबीबीएस डॉक्टर न हो, तो सरकारी दावे सवालों के घेरे में आ जाते हैं।
सभी पीएचसी पर तैनात डाक्टरों द्वारा मरीजों का इलाज करते हुए सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। एमबीबीएस डाक्टरों की कमी है। जैसे ही जिले पर तैनाती होगी, यहां भी तैनात कर दिए जाएंगे।
राजेश कुमार चौधरी,
अधीक्षक, सीएचसी लोहरसन