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Sant Kabir Nagar News: भीख में नहीं, संघर्ष कर प्राप्त करनी पड़ती है स्वतंत्रता
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 24 Jan 2026 02:54 AM IST
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-नेता जी सुभाष चंद बोस की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ
संतकबीरनगर। हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में शुक्रवार को सुभाष चन्द्र बोस जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो ब्रजेश त्रिपाठी ने कहा कि नेताजी का जीवन हमें यह सिखाता है कि स्वतंत्रता भीख में नहीं मिलती, उसे संघर्ष करके प्राप्त करना पड़ता है। उन्होंने भारतीय सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित नौकरी को त्यागकर देश की आजादी के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। उनका प्रसिद्ध नारा तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। आज भी हर भारतीय के हृदय में जोश और उत्साह भर देता है। उन्होंने कहा कि नेताजी ने आजाद हिंद फौज का गठन कर अंग्रेजी शासन को सीधी चुनौती दी। उनका विश्वास था कि भारत को आजादी केवल अहिंसा से ही नहीं, बल्कि संगठित और सशक्त संघर्ष से भी मिल सकती है। उन्होंने देशवासियों में आत्मसम्मान और स्वाभिमान की भावना जाग्रत की। इस अवसर पर महाविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो प्रताप विजय कुमार ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन युवाओं के लिए विशेष प्रेरणास्रोत है। वे हमें सिखाते हैं कि देशहित सर्वोपरि होना चाहिए, कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए और लक्ष्य प्राप्ति तक संघर्ष जारी रखना चाहिए। बीएड विभाग के अध्यक्ष डॉ पूर्णेश नारायण सिंह ने कहा कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने भारतीय युवाओं को उनके कर्तव्य से अवगत कराया इसी लिए सरकार ने उनकी जंयती को कर्तव्य बोध दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। कार्यक्रम में डॉ अमर सिंह गौतम, डॉ शशिकांत राव, डॉ विजय कुमार मिश्र, डॉ मनोज मिश्र, पुरुषोत्तम पांडेय, डॉ मनोज वर्मा आदि शिक्षक एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
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संतकबीरनगर। हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में शुक्रवार को सुभाष चन्द्र बोस जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो ब्रजेश त्रिपाठी ने कहा कि नेताजी का जीवन हमें यह सिखाता है कि स्वतंत्रता भीख में नहीं मिलती, उसे संघर्ष करके प्राप्त करना पड़ता है। उन्होंने भारतीय सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित नौकरी को त्यागकर देश की आजादी के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। उनका प्रसिद्ध नारा तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। आज भी हर भारतीय के हृदय में जोश और उत्साह भर देता है। उन्होंने कहा कि नेताजी ने आजाद हिंद फौज का गठन कर अंग्रेजी शासन को सीधी चुनौती दी। उनका विश्वास था कि भारत को आजादी केवल अहिंसा से ही नहीं, बल्कि संगठित और सशक्त संघर्ष से भी मिल सकती है। उन्होंने देशवासियों में आत्मसम्मान और स्वाभिमान की भावना जाग्रत की। इस अवसर पर महाविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो प्रताप विजय कुमार ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन युवाओं के लिए विशेष प्रेरणास्रोत है। वे हमें सिखाते हैं कि देशहित सर्वोपरि होना चाहिए, कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए और लक्ष्य प्राप्ति तक संघर्ष जारी रखना चाहिए। बीएड विभाग के अध्यक्ष डॉ पूर्णेश नारायण सिंह ने कहा कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने भारतीय युवाओं को उनके कर्तव्य से अवगत कराया इसी लिए सरकार ने उनकी जंयती को कर्तव्य बोध दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। कार्यक्रम में डॉ अमर सिंह गौतम, डॉ शशिकांत राव, डॉ विजय कुमार मिश्र, डॉ मनोज मिश्र, पुरुषोत्तम पांडेय, डॉ मनोज वर्मा आदि शिक्षक एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
