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Sant Kabir Nagar News: यह कबीरा की जमीं है रूह में ईमान बसता है...
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 31 Jan 2026 01:58 AM IST
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महोत्सव मंच पर कवि सम्मेलन में अपनी कविता पढ़ते कवि-संवाद
- फोटो : punch news
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मगहर। कबीर मगहर महोत्सव में बृहस्पतिवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व कुलहिंद मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसकी निजामत कवि बेशरम ने बखूबी निभाई। यह मुशायरा व कवि सम्मेलन बृहस्पतिवार देर रात तक चलता रहा। कवियों और शायरों के गीतों व गजलों पर श्रोता झूमते रहे। शायर अशद मेहताब ने...यह कबीरा की जमीं है रूह में ईमान बसता है कहीं पर राम बसता है, कहीं रहमान बसता है..के जरिये मगहर की महत्ता बताई।
कार्यक्रम की शुरुआत संचालक अशोक बेशर्म ने की। उन्होंने ...जिन्दगी से बड़ी सजा नहीं जुर्म हमें पता नहीं। इतने हिस्से में बंट गया हूं मुझे पता ही नहीं.. से की। इसके बाद मुशायरे के आगाज के लिए आए शायर अशद मेहताब ने संत कबीर को समर्पित ...यह कबीरा की जमी है रूह में ईमान बसता है कहीं पर राम बसता है, कहीं रहमान बसता है, उठो ए नौजवानों कह दो यह मुत्तहिद होकर हमारे दिल की हर धड़कन में हिन्दुस्तान बसता है... पेश किया। इसके बाद ..हिन्दू हो मुसलमान या सिख ईसाई सबके इरादे सदा नेक रहेंगे, आओ दे वादा करते हैं मगहर की जमीं पर हम एक थे हम एक है एक रहेंगे...सुनाकर एकता का संदेश दिया।
मशहूर शायरा शबीना अदीब ने ...अपना गम इस तरह थोड़ा कम कीजिए, दूसरों के लिए आंख नम कीजिए, कुछ गरीबों के दिल भी संवर जायेंगे, आप अपनी जरूरत को कम कीजिए...सुनाकार खूब वाहवाही लूटी। प्रियांशु गजेंद्र ने ..इतने निर्मोही कैसे सजन हो गए, किसी की बाहों में जाकर मगन हो गए, लौटकर के न फिर आए परदेश से आदमी न होकर काला धन हो गए.. पर पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा।
शायर अज्म शाकिरी ने ...लाखों सदमे ढेरा गम फिर भी नहीं है आंख नम, इक मुद्दत से रोये नहीं क्या पत्थर के हो गए हम.. सुनाकर लोगों के दिलों को कुरेदा। बिलाल सहारनपुरी रे ...पहले हर आदमी इंसान हुआ करता था, बाद में हिन्दू मुसलमान हुआ करता था... सुनाकर आपसी भाईचारे का पैगाम दिया। कवयित्री वंदना शुक्ला ने ...प्रेम दिल का सुकूं करार भी है, प्रेम जीवन का ऐतबार भी है प्रेम केवल नहीं है चाहत ही प्रेम मीरा का संस्कार भी है..सुनाया। हास्य व्यंग्य शायर लोकेश त्रिपाठी ने ...चीज कोई नहीं दूसरी चाहिए बात जिसकी हुई थी वही चाहिए...सुनाकर लोगो को गुदगुदाया। फैज खलीलाबादी ने ...करना पड़ता है अंधेरों के बदन में सुराख, रोशनी इतनी सहूलियत से नहीं मिलती है... सुनाकर वाहवाही लूटी।
ताविश रुदौलवी ने ...ईयर फोन उसने तकब्बुर का हटाया ही नहीं यार हर मोड पे आवाज लगाई मैंने...। इसके बाद ...न तन खूबसूरत न धन खूबसूरत शहीद को अपना वतन खूबसूरत... सुनाकर देश भक्ति का जज्बा पैदा किया। मुशायरा कवि/ सम्मेलन में नासिर जौनपुरी, साक्षी तिवारी, शारिक खलीलाबाद, पवन शबा आदि ने अपने कलाम सुनाये। इस अवसर सीडीओ जयकेश त्रिपाठी, नायब तहसीलदार प्रियंका त्रिपाठी, पूर्व चेयरमैन नुरूज्जमा अंसारी, संस्थापक सदस्य शिवकुमार गुप्त, सभासद अवधेश सिंह, रईस अंसारी, पूर्व सभासद सिबतैन मुस्तफा, मो.असअद,अब्दुल कलाम,गयासुद्दीन उर्फ पप्पू खान,स्वीटी सिंह, अभिनव रवि वत्स आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की शुरुआत संचालक अशोक बेशर्म ने की। उन्होंने ...जिन्दगी से बड़ी सजा नहीं जुर्म हमें पता नहीं। इतने हिस्से में बंट गया हूं मुझे पता ही नहीं.. से की। इसके बाद मुशायरे के आगाज के लिए आए शायर अशद मेहताब ने संत कबीर को समर्पित ...यह कबीरा की जमी है रूह में ईमान बसता है कहीं पर राम बसता है, कहीं रहमान बसता है, उठो ए नौजवानों कह दो यह मुत्तहिद होकर हमारे दिल की हर धड़कन में हिन्दुस्तान बसता है... पेश किया। इसके बाद ..हिन्दू हो मुसलमान या सिख ईसाई सबके इरादे सदा नेक रहेंगे, आओ दे वादा करते हैं मगहर की जमीं पर हम एक थे हम एक है एक रहेंगे...सुनाकर एकता का संदेश दिया।
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मशहूर शायरा शबीना अदीब ने ...अपना गम इस तरह थोड़ा कम कीजिए, दूसरों के लिए आंख नम कीजिए, कुछ गरीबों के दिल भी संवर जायेंगे, आप अपनी जरूरत को कम कीजिए...सुनाकार खूब वाहवाही लूटी। प्रियांशु गजेंद्र ने ..इतने निर्मोही कैसे सजन हो गए, किसी की बाहों में जाकर मगन हो गए, लौटकर के न फिर आए परदेश से आदमी न होकर काला धन हो गए.. पर पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा।
शायर अज्म शाकिरी ने ...लाखों सदमे ढेरा गम फिर भी नहीं है आंख नम, इक मुद्दत से रोये नहीं क्या पत्थर के हो गए हम.. सुनाकर लोगों के दिलों को कुरेदा। बिलाल सहारनपुरी रे ...पहले हर आदमी इंसान हुआ करता था, बाद में हिन्दू मुसलमान हुआ करता था... सुनाकर आपसी भाईचारे का पैगाम दिया। कवयित्री वंदना शुक्ला ने ...प्रेम दिल का सुकूं करार भी है, प्रेम जीवन का ऐतबार भी है प्रेम केवल नहीं है चाहत ही प्रेम मीरा का संस्कार भी है..सुनाया। हास्य व्यंग्य शायर लोकेश त्रिपाठी ने ...चीज कोई नहीं दूसरी चाहिए बात जिसकी हुई थी वही चाहिए...सुनाकर लोगो को गुदगुदाया। फैज खलीलाबादी ने ...करना पड़ता है अंधेरों के बदन में सुराख, रोशनी इतनी सहूलियत से नहीं मिलती है... सुनाकर वाहवाही लूटी।
ताविश रुदौलवी ने ...ईयर फोन उसने तकब्बुर का हटाया ही नहीं यार हर मोड पे आवाज लगाई मैंने...। इसके बाद ...न तन खूबसूरत न धन खूबसूरत शहीद को अपना वतन खूबसूरत... सुनाकर देश भक्ति का जज्बा पैदा किया। मुशायरा कवि/ सम्मेलन में नासिर जौनपुरी, साक्षी तिवारी, शारिक खलीलाबाद, पवन शबा आदि ने अपने कलाम सुनाये। इस अवसर सीडीओ जयकेश त्रिपाठी, नायब तहसीलदार प्रियंका त्रिपाठी, पूर्व चेयरमैन नुरूज्जमा अंसारी, संस्थापक सदस्य शिवकुमार गुप्त, सभासद अवधेश सिंह, रईस अंसारी, पूर्व सभासद सिबतैन मुस्तफा, मो.असअद,अब्दुल कलाम,गयासुद्दीन उर्फ पप्पू खान,स्वीटी सिंह, अभिनव रवि वत्स आदि मौजूद रहे।

महोत्सव मंच पर कवि सम्मेलन में अपनी कविता पढ़ते कवि-संवाद- फोटो : punch news
