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Shahjahanpur News: एसआईआर के लिए दस्तावेज नहीं जुटा पा रहीं दूसरे प्रांत की बहुएं

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 31 Jan 2026 12:28 AM IST
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Daughters-in-law from other states are unable to gather the documents required for the SIR (Special Investigation Report).
पुवायां तहसील ​स्थित एसआईआर के लिए बने कार्यालय में अ​भिलेख लेकर पहुंचे लोग। संवाद
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पुवायां। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए जिन लोगों के पास नोटिस पहुंचे हैं, उनमें से गैर प्रांत की बहुओं को दस्तावेज संबंधी समस्या आ रही हैं। ऐसे कई लोग जानकारी लेने के लिए पुवायां के तहसील परिसर में बनाए गए सुनवाई स्थल पहुंच रहे हैं। अधिकारी उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था सुझा रहे हैं।
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एसआईआर के लिए कई ऐसे लोग पहुंच रहे हैं, जिनकी शादी बिहार प्रांत में मध्यस्थों के जरिये हुई है। शुक्रवार को कार्यालय पहुंचे कई लोगों ने अधिकारियों को बताया कि बहुएं यह नहीं बता पा रही हैं कि उनके मायके का विधानसभा क्षेत्र और बूथ कौन सा है, इस कारण ऑनलाइन मतदाता सूची भी डाउनलोड करने से लाभ नहीं हो रहा है।
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इसके अलावा प्रेम विवाह करने वाली युवतियों को भी मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए मायके से कोई दस्तावेज नहीं मिल पा रहे हैं। मायके के लोग कोई दस्तावेज मांगने पर साफ मना कर रहे हैं।
पुवायां विधानसभा और निगोही थाना क्षेत्र के गांव पिपरिया बसखेड़ा के एक व्यक्ति ने बताया कि उनके पुत्र ने दो वर्ष दूसरे समुदाय की दिल्ली निवासी युवती से प्रेम विवाह किया है। पुत्रवधू के पास आधार कार्ड के अलावा कोई कागजात नहीं है। नोटिस के जवाब में वह पुत्रवधू के आधार कार्ड की फोटोकॉपी लेकर पहुंचे थे। एई आरओ मनोज कुमार ने उनको बताया कि लड़की जहां की रहने वाली है, वहां से 2003 की मतदाता सूची लेकर आएं। मतदाता सूची ऑनलाइन निकलवाने का सुझाव भी दिया गया। इसके बाद वह लौट आए।
दूूसरी जगहों से 20 साल से क्षेत्र में आकर रह रहे लोगों के सामने भी समस्या आ रही है। सरकारी सेवा में रहते हुए क्षेत्र में स्थायी निवास बनाने वालों से भी 2003 की मतदाता सूची या अन्य दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
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प्रेम विवाह किया, मायके वालों ने दस्तावेज देने से कर दिया इन्कार
कस्बे की एक महिला अपने पति के साथ कार्यालय पहुंची। बताया कि उन्होंने प्रेम विवाह किया था, इससे मायके पक्ष के लोग नाराज हैं। एसआईआर के लिए दस्तावेज मांगने पर पिता, मां ने फिर से फोन न करने की बात कहकर कॉल काट दी। इसके बाद कॉल ही रिसीव नहीं की जा रही है।
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ये विकल्प अपनाएं
एईआरओ मनोज कुमार ने बताया कि बिहार में एसआईआर हो चुका है। बिहार की मतदाता सूची में पिता, मां का नाम होने पर उसे बीएलओ को दिया जा सकता है। इसके अलावा सक्षम अधिकारी से जारी जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, स्थानीय प्राधिकरण, बैंक, डाकघर, एलआईसी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम की ओर से एक जुलाई 1987 से पहले जारी किया गया कोई भी पहचानपत्र- प्रमाणपत्र अभिलेख जमा किया जा सकता है। जाति प्रमाणपत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर जहां के निवासी होंं, परिवार रजिस्टर की नकल, सरकार की ओर से जारी कोई भी भूमि, मकान आवंटन प्रमाणपत्र दिया जा सकता है।
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प्रतिदिन करनी है 150 नोटिसों की सुनवाई
एक एईआरओ को कुल 15 बूथ दिए गए हैं। जिसमें 150 लोगों की सुनवाई प्रतिदिन करनी है। इसी के हिसाब से बीएलओ नोटिस वितरित कर रहे हैं। दिए गए नोटिसों के सापेक्ष लगभग 70 से 80 प्रतिशत लोग एईआरओ से संपर्क कर कागज जमा कर रहे हैं।
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आज विशेष अभियान, मतदेय स्थल पर रहेंगे बीएलओ
उप जिला निर्वाचन अधिकारी, एडीएम प्रशासन रजनीश कुमार मिश्र ने बताया कि विधानसभा निर्वाचन नामावलियों के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 में दावे/आपत्तियां प्राप्त किए जाने के लिए आयोग की ओर से 31 जनवरी को विशेष अभियान के रूप में निर्धारित किया है। बीएलओ अपने मतदेय स्थलों पर पूर्वाह्न 11 से शाम चार बजे तक मौजूद रहेंगे। विशेष अभियान में 18 वर्ष आयु पूर्ण करने वाले तथा छूटे हुए लोग अपने मतदेय स्थल पर बीएलओ के पास आवेदन कर सकते हैं। मतदाता के नाम, पिता के नाम तथा जन्मतिथि आदि में संशोधन का आवेदन भी किया जा सकता है।
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