शाहजहांपुर। श्री बालाजी मानस सेवा समिति के तत्वावधान में रामनगर कॉलोनी स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथाव्यास आचार्य अंकुर शुक्ल ब्रजराजदास ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं है। ऐसा होने पर समय रहते गलती का सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है।
कथाव्यास ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को दर्शाया। कहा कि जब-जब उन पर संकट आया, भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा की। कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि का अपमान कर देते हैं और श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव के पास जाते हैं और अपनी मुक्ति का उपाय पूछते हैं।
इसके उत्तर में शुकदेव महाराज श्रीमद्भागवत रूपी अमृत को प्रदान करते हैं। कहते हैं कि भक्ति एक ऐसा उत्तम मार्ग है, जिस पर चलकर जीवन में सब कुछ पाया जा सकता है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित है। वहीं, श्रवण शास्त्री ने वेद मंत्रों के साथ मंगल आरती करवाई। अखिलेश सक्सेना, चंद्रमोहन, मनोज वाजपेयी, लाजपत राय बत्रा, दिनेश गोगिया, राजकुमार, श्याम कपूर आदि ने कथा का आनंद लिया।