मोहर्रम: शाहजहांपुर में अकीदत के रंग में रंगी कई परिवारों की आजीविका, बरकत का जरिया बने ताजिये
मोहर्रम से पहले शाहजहांपुर के अंटा मोहल्ले में ताजिया निर्माण का काम तेज हो गया है। यह कई परिवारों के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। सात मोहर्रम से ताजियों की बिक्री शुरू होगी। दस मोहर्रम यानी 26 जून को इन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
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मोहर्रम का महीना मुस्लिम समुदाय की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। वहीं, कई परिवारों के लिए यह रोजगार का भी माध्यम बन गया। शाहजहांपुर में चांद का दीदार होने के साथ ही अंटा मोहल्ले समेत आसपास के क्षेत्रों में ताजिया निर्माण का तेजी से शुरू हो गया। सात मोहर्रम से बिक्री शुरू होगी और दस मोहर्रम यानी 26 जून को ताजिये गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक किए जाएंगे।
मोहल्ला अंटा मोहल्ले में कई परिवार ताजियों के निर्माण कार्य से जुड़े हैं। उनके पुरखे भी यही काम करते आए हैं। मोहर्रम माह के एक महीने पहले ही ताजिये बनाना शुरू कर देते हैं। इस बार शासन की गाइडलाइन के हिसाब से ही ताजियों को बनाया जा रहा है। ताजिया बनाने के कार्य से जुड़े सरताज अली बताते हैं कि उनका परिवार वर्षों से ताजिया निर्माण का कार्य करता आ रहा है। यहां सौ रुपये से लेकर छह सौ रुपये तक के ताजिये तैयार किए जाते हैं। सजावटी कागज, बांस और अन्य सजावटी सामग्री के दाम लगातार बढ़ने से लागत में इजाफा हुआ है। इसके बावजूद पत्नी और बच्चों के सहयोग से इस बार करीब 30 ताजिये तैयार किए गए हैं।
सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी
मोहल्ले की शाहीन बानो के लिए ताजिया निर्माण ही परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है। उनके पति साजिद को आंखों से कम दिखाई देता है, ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी शाहीन बानो पर ही है। शाहीन बानो बताती हैं कि पिछले कुछ वर्षों में कागज, बांस और सजावटी सामग्री की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। छह सौ रुपये में बिकने वाले एक ताजिये को तैयार करने में लगभग चार सौ रुपये की लागत आ जाती है। इसके बावजूद यह काम उनके परिवार के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है।