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Shahjahanpur News: स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी के साथ तन-मन-धन से खड़ा रहा शाहजहांपुर

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 11:41 PM IST
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Shahjahanpur stood by Netaji with all its heart, mind, and resources during the freedom struggle.
हथौड़ा चौराहा ​स्थित सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा। संवाद
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शाहजहांपुर। आजाद हिंद फौज के संस्थापक और तुम मुझे खून दो, मैंं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा देकर स्वतंत्रता संग्राम को नया मोड़ देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस का शाहजहांपुर की शहीद धरा से भी नाता रहा है। वह दो बार यहां आए। इस दौरान शाहजहांपुर के लोगों ने उनका तन-मन-धन से साथ दिया। लोगों ने जब एक हजार रुपये का चंदा जुटाकर नेताजी को दिया तो उन्होंने कहा कि एक-एक पैसा राष्ट्र की सेवा में लगेगा।
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नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था। एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष और इतिहासकार डॉ. विकास खुराना बताते हैं कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस का शाहजहांपुर से भी गहरा नाता रहा। 1939 में उन्होंने जब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की तब अपने अखिल भारतीय दौरों के चलते वे दो बार शाहजहांपुर आए। पहली बार 22 जनवरी 1940 तथा दूसरी बार पांच मार्च 1940 को वह यहां आए।
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अपने प्रथम आगमन के दौरान वे इनायत अली के आवास पर रुके। यहां उन्होंने वायसराय के दमनात्मक रवैये की खुली आलोचना की थी। अपने दूसरे दौरे के दौरान उन्होंने टाउनहॉल में एक सभा को संबोधित भी किया था। इस अवसर पर शहरवासियों ने उन्हें एक हजार रुपया चंदे के रूप में दिया था। आभार जताते हुए नेताजी ने मंच से कहा था कि इसकी एक-एक पाई राष्ट्र सेवा में लगेगी।
अगस्त 1940 में जब कलकत्ता में उन्हें नजरबंद किया गया तब शहर में उनके समर्थकों और और फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता रामकिशन खत्री ने जोरदार आंदोलन छेड़ा था। उनकी नजरबंदी का पुवायां में भी विरोध हुआ। एसडीएम आफताब खान ने अनेक लोगों के विरुद्ध जिलाबदर एवं निरुद्ध करने की कार्रवाई की थी।

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इन्होंने दिया नेताजी का साथ
डॉ. विकास खुराना ने बताया कि जब नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने जुलाई 1943 में आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च कमांडर पद की शपथ ली, तब भी जिले के युवाओं में उत्साह का संचार हुआ। स्टेशन रोड के रहने वाले जेएस बेदी, सिंधौली के रामकुमार, कांट के औदापुर निवासी रहीमतुल्ला, कटरा के सैयद वाहिद अली ने उनकी सेना में नियुक्तियां लीं।
जेएस बेदी ने कभी पेंशन नहीं ली। वहीं, रहीमतुल्ला आजाद हिंद फौज की मेडिकल कोर का हिस्सा थे। उनका जन्म 19 जून 1921 को हुआ था। 20 वर्ष की उम्र में ही वे घर तथा नई नवेली दुल्हन को छोड़कर चले गए थे। 15 अगस्त 1972 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें ताम्रपत्र से सम्मानित किया था। उनकी मृत्यु वर्ष 1991 में हुई।
इसी प्रकार कटरा के मोहल्ला आतिश बाजार में रहने वाले सैय्यद वाजिद अली 1944 में आजाद हिंद फौज का हिस्सा बने। दूसरे विश्व युद्ध में भाग लिया था। उनकी मृत्यु 21 सितंबर 2020 को 105 वर्ष की आयु में हुई थी। ओसीएफ कर्मी सुभाषदास ने युवाओं को नेताजी की फौज की तर्ज पर प्रशिक्षण देने के लिए सुभाष यूथ विंग बनाई थीं।
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शाहजहांपुर के लोग नेताजी सुभाषचंद्र बोस के प्रति कृतज्ञ रहे। शहर के घंटाघर का नाम उनके नाम पर सुभाष टावर, हथौड़ा चौराहा सुभाष स्क्वायर के रूप में जाना जाता है। कैंट म्यूजियम के सामुदायिक भवन का नाम भी उनके नाम पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस सामुदायिक भवन है।

- डॉ. विकास खुराना, इतिहासकार

हथौड़ा चौराहा स्थित सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा। संवाद

हथौड़ा चौराहा स्थित सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा। संवाद

हथौड़ा चौराहा स्थित सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा। संवाद

हथौड़ा चौराहा स्थित सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा। संवाद

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