UP: शाहजहांपुर में पुनर्स्थापित कराई गईं अमर नायकों की प्रतिमाएं, महापौर और नगर आयुक्त ने किया माल्यार्पण
शाहजहांपुर में काकोरी केस के अमर नायकों की नई प्रतिमाओं को नगर निगम के बाहर स्थित स्थल पर पुनर्स्थापित करा दिया गया है। यहां पहले से स्थापित प्रतिमाएं बुलडोजर से तोड़ दी गई थीं। इस पर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर नई प्रतिमाओं को लगाया गया है।
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शाहजहांपुर में नगर निगम के बाहर स्थित काकोरी केस के अमर नायकों की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त करने के बाद मचे हंगामे और मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद बृहस्पतिवार सुबह प्रतिमाओं को पुनर्स्थापित कर दिया गया। इसके बाद महापौर अर्चना वर्मा और नगर आयुक्त के साथ पहुंचे पार्षदों व अन्य लोगों ने अमर बलिदानियों की प्रतिमाओं पर फूलमालाएं पहनाकर पुष्प अर्पित किए।
टाउन हॉल स्थित नगर निगम कार्यालय के बाहर काकोरी केस के अमर नायकों पं. रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामकृष्ण खन्ना की प्रतिमाएं स्थापित थीं। अमर बलिदानियों की प्रतिमास्थल और तिराहे के सुंदरीकरण के लिए मै. फ्लाई इंफ्राटेक को नगर निगम की ओर से 40 लाख रुपये में ठेका दिया गया था। 22 मार्च की रात फर्म ने प्रतिमाओं को बुलडोजर से क्षतिग्रस्त कर दिया।
मामले में दो इंजीनियर किए गए निलंबित
अमर बलिदानियों के अनादर की जानकारी लोगों को हुई तो हंगामा हो गया। विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर सख्त रुख अपनाया। उनके निर्देश पर नगर निगम के निर्माण विभाग के एई मनोज कुमार और जेई प्रमोद कुमार को निलंबित कर दिया था। फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के साथ ही मुख्य अभियंता आशीष त्रिवेदी की ओर से उसके खिलाफ थाना सदर बाजार में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई।
देर रात तक चलता रहा काम
मुख्यमंत्री के 24 घंटे में प्रतिमाओं को पुनर्स्थापित करने के आदेश के बाद बुधवार को क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं को ठीक करने और प्लेटफार्म बनाने का काम शुरू हुआ। देर रात तक काम चलता रहा। बृहस्पतिवार तड़के करीब चार बजे प्रतिमाओं को स्थापित करा दिया गया। सुबह लोगों को प्रतिमाएं दोबारा रखे जाने की जानकारी हुई। तमाम लोग मौके पर पहुंचे और प्रतिमाओं के साथ फोटो खींची। नगर आयुक्त डॉ. बिपिन कुमार मिश्रा ने बताया कि प्रतिमाओं को स्थापित करा दिया गया है। जेई और एई के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शासन स्तर से प्रचलित है।