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Shahjahanpur News: मरेना के प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज, प्रशासनिक शक्तियों पर रोक
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बंडा। नाली और खड़ंजा के निर्माण कार्यों की आरंभिक जांच में लाखों रुपये की सरकारी धनराशि का घोटाला पाए जाने पर डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने मरेना के प्रधान पूरन वर्मा के वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए हैं। इसके साथ ही प्रधान की प्रशासनिक शक्तियों पर भी रोक लगा दी गई है।
मरेना के प्रदीप कुमार और दिनेश वर्मा ने गांव में वित्तीय वर्ष 2024-25 में कराए गए इंटरलॉकिंग और नाली, खड़ंजा आदि निर्माण कार्य में घोटाले की शिकायत कर जांच कराने की मांग की थी। शिकायत की जांच के लिए एसडीएम चित्रा निर्वाल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई। टीम ने कई कार्यों की जांच करने पर पाया कि खर्च की गई धनराशि की तुलना में विभिन्न मदों में ज्यादा धनराशि आहरित कर उसका बंटवारा कर लिया गया। बाद में जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने ग्राम प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगाकर मामले की गहन जांच करने के निर्देश दिए।
एसडीएम के अनुसार जांच से पता चला कि इंटरलॉकिंग कार्य में ग्राम निधि से 336202 रुपये और मनरेगा से 77925 रुपये सहित कुल 4,14,127 रुपये निकाल लिए गए, जबकि वास्तविक लागत 2,81,407 रुपये आई। गांव में दूसरे मार्ग के इंटरलॉकिंग कार्य में 3,35,336 रुपये आहरित किए गए, जबकि जांच के आधार पर वास्तविक व्यय 2,50,078 रुपये हुआ।
इस प्रकार जांच में 2,17,978 रुपये का घोटाला सामने आया। एसडीएम के अनुसार आगे की जांच के लिए ग्राम पंचायत के तीन सदस्यों की प्रशासनिक और वित्तीय टीम का गठन किया गया है। इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। संवाद
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मरेना के प्रदीप कुमार और दिनेश वर्मा ने गांव में वित्तीय वर्ष 2024-25 में कराए गए इंटरलॉकिंग और नाली, खड़ंजा आदि निर्माण कार्य में घोटाले की शिकायत कर जांच कराने की मांग की थी। शिकायत की जांच के लिए एसडीएम चित्रा निर्वाल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई। टीम ने कई कार्यों की जांच करने पर पाया कि खर्च की गई धनराशि की तुलना में विभिन्न मदों में ज्यादा धनराशि आहरित कर उसका बंटवारा कर लिया गया। बाद में जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने ग्राम प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगाकर मामले की गहन जांच करने के निर्देश दिए।
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एसडीएम के अनुसार जांच से पता चला कि इंटरलॉकिंग कार्य में ग्राम निधि से 336202 रुपये और मनरेगा से 77925 रुपये सहित कुल 4,14,127 रुपये निकाल लिए गए, जबकि वास्तविक लागत 2,81,407 रुपये आई। गांव में दूसरे मार्ग के इंटरलॉकिंग कार्य में 3,35,336 रुपये आहरित किए गए, जबकि जांच के आधार पर वास्तविक व्यय 2,50,078 रुपये हुआ।
इस प्रकार जांच में 2,17,978 रुपये का घोटाला सामने आया। एसडीएम के अनुसार आगे की जांच के लिए ग्राम पंचायत के तीन सदस्यों की प्रशासनिक और वित्तीय टीम का गठन किया गया है। इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। संवाद