Shahjahanpur News: गंगा नदी में फिर उफान, खतरे के निशान के करीब पहुंचा जलस्तर, अलर्ट जारी
शाहजहांपुर जिले में गंगा नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है, जिससे कलान तहसील क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। जिला प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है।
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शाहजहांपुर के कलान तहसील क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर शुक्रवार को 15 सेमी बढ़कर 143.05 मीटरगेज हो गया। एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार ने सिंचाई विभाग शारदा नहर खंड के बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बृहस्पतिवार की रात बिजनौर के मध्य गंगा बैराज से दो लाख 12 हजार 680 क्यूसेक पानी की निकासी संबंधी सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों सहित सभी बाढ़ चौकियों के कर्मचारियों को राहत और बचाव कार्य के लिए दोबारा सतर्क कर दिया है।
अभी गंगा में जनपद की सीमा से बारिश समेत वह पानी आगे बढ़ रहा है जो दो दिन पहले तक बैराजों से निकला है। बिजनौर के बैराज से निकला पानी आधी रात के बाद पहुंच जाएगा। फिलहाल, गंगा खतरे के निशान से 60 सेमी नीचे बह रही है, लेकिन एडीएम का मानना है कि बैराज से निकले पानी के प्रभाव से भैंसार ढाई घाट तटबंध क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर लगभग 50 सेमी बढ़कर खतरे के निशान के निकट पहुंच सकता है।
उनका कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा के कारण रामगंगा नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है। उससे कलान और जलालाबाद तहसील क्षेत्र के कई गांव प्रभावित हो सकते हैं। एडीएम ने बताया कि बाढ़ के स्थिति में किसी भी अप्रिय घटना से बचाव और जन-धन की सुरक्षा के लिए सीएमओ के अलावा कलान के एसडीएम, सीओ, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, सिंचाई तथा लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अधिकारियों को एडवायजरी जारी करने के साथ विस्तृत दिशा निर्देश दिए गए हैं।
मुनादी के जरिए लोगों को सतर्क करने के निर्देश
उन्होंने एसडीएम और सीओ को गंगा नदी के तटीय और दूब क्षेत्रों में लगातार निगरानी के साथ मुनादी के जरिये जन सामान्य को जागरूक और सतर्क करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बाढ़ चौकियों को लगातार अलर्ट मोड पर रखने और राजस्व निरीक्षकों तथा लेखपालों को क्षेत्र में तैनात रहने पर जोर दिया है। इन अधिकारियों से निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति में प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने के लिए नावों और शरणालयों की व्यवस्था करने के लिए भी कहा गया है।
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एडीएम ने सीएमओ को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों, जीवन रक्षक दवाओं, एंटी-वेनम, क्लोरीन की गोलियों और ओआरएस के पैकेट की पर्याप्त उपलब्धता रखने और सीवीओ को तटीय गांवों के पशुओं के टीकाकरण, चारे की व्यवस्था और सुरक्षित पशु-आश्रय स्थलों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं।
लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंताओं से एडीएम ने भैंसार ढाई घाट तटबंध और अन्य संवेदनशील स्थलों पर लगातार पेट्रोलिंग करने और भूमि कटान होने पर तत्काल मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने मोबाइल फोन 24 घंटे चालू रखने के विशेष निर्देश देते हुए कहा है कि किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल जिला आपदा नियंत्रण कक्ष को दें।
रामगंगा तीन सेमी घटने के बावजूद चार दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा बरकरार
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को शुक्रवार को सुबह प्राप्त सूचनाओं के अनुसार फर्रुखाबाद जिले की सीमा पर स्थित जनपद के डबरी घाट पर रामगंगा का जलस्तर बीते 24 घंटों में तीन सेमी कम होकर 134.38 मीटरगेज हो गया। हालांकि, रामगंगा अभी खतरे के निशान से 2.92 मीटर नीचे बह रही है, लेकिन जैतीपुर, जलालाबाद और परौर से लेकर अल्हागंज क्षेत्र तक नदी के दोनों तटों पर बसे करीब चार दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
इन सभी गांवों के आबादी वाले हिस्से अभी बाढ़ से दूर हैं, लेकिन नदी के किनारे के सभी खेत डूबे हुए हैं। गंगा में बाढ़ के विकराल होने पर उसकी सहायक रामगंगा नदी में भी स्वभाविक रूप से उफान बढ़ जाता है। परौर क्षेत्र में नदी से कटान अभी थमा हुआ है, लेकिन मिट्टी-पत्थर की क्रेट से बनाई गईं कई कच्ची ठोकरें तेज बहाव में बह जाने से वहां पानी कम होते ही भूमि कटान तेज हो जाने की आशंका है। इसे देखते हुए क्षेत्र के किसानों ने क्षतिग्रस्त ठोकरों की मरम्मत जल्द कराने की मांग की है।