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डाक कांवड़ : आस्था और युवा जोश का संगम
Mon, 10 Aug 2026 12:12 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Mon, 10 Aug 2026 12:12 AM IST
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शामली के धीमानपुरा में कांवड़ में भगवान शिव पार्वती और राधा-कृष्ण की झांकी। संवाद
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शामली। कांवड़ यात्रा में आस्था के साथ युवा जोश का रंग भी खूब चढ़ा है। पैदल और दंडवत कांवड़ के साथ अब युवाओं में डाक कांवड़ यानी दौड़ कांवड़ का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। जिले से डाक कांवड़ गुजरने लगी है। हरिद्वार, गाेमुख और नीलकंठ से गंगाजल लेकर युवा दौड़ते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। युवाओं का कहना है कि डाक कांवड़ में भक्ति के साथ फिटनेस भी है और समय की बचत भी।
गंगाजल लेकर दौड़ते हैं, साथी को सौंप देते हैं कांवड़
सोनीपत निवासी मनीष पिछले तीन वर्षों से डाक कांवड़ ला रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी टोली में करीब 15 युवा होते हैं। हरिद्वार, गोमुख या नीलकंठ से गंगाजल लेने के बाद युवा बारी-बारी से दौड़ते हैं। एक शिवभक्त के हिस्से में करीब 20 किलोमीटर तक दौड़ आती है। दौड़ते समय गंगाजल एक साथी से दूसरे को सौंप दिया जाता है। इस दौरान जल को खंडित न होने देने का विशेष ध्यान रखा जाता है।
तीन किलोमीटर से शुरू होती है दौड़, 500 मीटर तक आती है
पानीपत के बापौली निवासी अनुज ने बताया कि शुरुआत में एक शिवभक्त करीब तीन किलोमीटर तक दौड़ता है। इसके बाद धीरे-धीरे दौड़ की दूरी कम होती जाती है और कई बार यह 500 मीटर तक रह जाती है। साथी के दौड़ संभालते ही दूसरा युवा कुछ देर आराम करता है और फिर अपनी बारी आने पर दौड़ में शामिल होता है।
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इसी टोली के संदीप का कहना है कि डाक कांवड़ लाने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है। बड़ी संख्या में युवा सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी करते हैं। ऐसे में वे भगवान शिव की भक्ति के साथ अपनी फिटनेस और दमखम भी परख लेते हैं।
122 किलोमीटर का सफर, साथ चलता है पूरा इंतजाम
शामली से हरिद्वार की दूरी करीब 122 किलोमीटर है। डाक कांवड़ की टोली इस दूरी को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर तय करती है। एक साथी दौड़ता है तो बाकी वाहन के साथ चलते हैं। वाहन में पानी, जलपान और अन्य जरूरी सामान रहता है। थकान होने पर युवा वाहन में ही कुछ देर आराम कर फिर दौड़ संभाल लेते हैं।
आस्था देती है जोश, भोले के भरोसे पूरी होती है दौड़
करनाल निवासी बबलू ने बताया कि वह चार साल से डाक कांवड़ ला रहे हैं। लगातार दौड़ना मुश्किल जरूर है, लेकिन भगवान शिव के प्रति आस्था जोश को कम नहीं होने देती। यह यात्रा युवाओं के दमखम के साथ उनकी आस्था की भी परीक्षा लेती है।
भगत सिंह ने बताया कि डाक कांवड़ निर्धारित समय में पूरी करनी होती है और मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करना होता है। इसी के अनुसार टोली पहले से तैयारी करती है।
सुरजीत ने बताया कि उनकी टोली ने हरिद्वार से रोहतक तक का सफर 24 घंटे में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। उनका कहना है कि भोलेनाथ की कृपा से हर शिवभक्त अपनी मंजिल तक पहुंचता है।
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गंगाजल लेकर दौड़ते हैं, साथी को सौंप देते हैं कांवड़
सोनीपत निवासी मनीष पिछले तीन वर्षों से डाक कांवड़ ला रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी टोली में करीब 15 युवा होते हैं। हरिद्वार, गोमुख या नीलकंठ से गंगाजल लेने के बाद युवा बारी-बारी से दौड़ते हैं। एक शिवभक्त के हिस्से में करीब 20 किलोमीटर तक दौड़ आती है। दौड़ते समय गंगाजल एक साथी से दूसरे को सौंप दिया जाता है। इस दौरान जल को खंडित न होने देने का विशेष ध्यान रखा जाता है।
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तीन किलोमीटर से शुरू होती है दौड़, 500 मीटर तक आती है
पानीपत के बापौली निवासी अनुज ने बताया कि शुरुआत में एक शिवभक्त करीब तीन किलोमीटर तक दौड़ता है। इसके बाद धीरे-धीरे दौड़ की दूरी कम होती जाती है और कई बार यह 500 मीटर तक रह जाती है। साथी के दौड़ संभालते ही दूसरा युवा कुछ देर आराम करता है और फिर अपनी बारी आने पर दौड़ में शामिल होता है।
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इसी टोली के संदीप का कहना है कि डाक कांवड़ लाने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है। बड़ी संख्या में युवा सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी करते हैं। ऐसे में वे भगवान शिव की भक्ति के साथ अपनी फिटनेस और दमखम भी परख लेते हैं।
122 किलोमीटर का सफर, साथ चलता है पूरा इंतजाम
शामली से हरिद्वार की दूरी करीब 122 किलोमीटर है। डाक कांवड़ की टोली इस दूरी को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर तय करती है। एक साथी दौड़ता है तो बाकी वाहन के साथ चलते हैं। वाहन में पानी, जलपान और अन्य जरूरी सामान रहता है। थकान होने पर युवा वाहन में ही कुछ देर आराम कर फिर दौड़ संभाल लेते हैं।
आस्था देती है जोश, भोले के भरोसे पूरी होती है दौड़
करनाल निवासी बबलू ने बताया कि वह चार साल से डाक कांवड़ ला रहे हैं। लगातार दौड़ना मुश्किल जरूर है, लेकिन भगवान शिव के प्रति आस्था जोश को कम नहीं होने देती। यह यात्रा युवाओं के दमखम के साथ उनकी आस्था की भी परीक्षा लेती है।
भगत सिंह ने बताया कि डाक कांवड़ निर्धारित समय में पूरी करनी होती है और मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करना होता है। इसी के अनुसार टोली पहले से तैयारी करती है।
सुरजीत ने बताया कि उनकी टोली ने हरिद्वार से रोहतक तक का सफर 24 घंटे में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। उनका कहना है कि भोलेनाथ की कृपा से हर शिवभक्त अपनी मंजिल तक पहुंचता है।

शामली के धीमानपुरा में कांवड़ में भगवान शिव पार्वती और राधा-कृष्ण की झांकी। संवाद

शामली के धीमानपुरा में कांवड़ में भगवान शिव पार्वती और राधा-कृष्ण की झांकी। संवाद