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एक्सप्रेसवे परियोजना : किसानों ने मुजफ्फरनगर के बराबर मुआवजा मांगा
Sat, 01 Aug 2026 01:22 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sat, 01 Aug 2026 01:22 AM IST
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शामली। पानीपत-शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत शुक्रवार को नवीन कलक्ट्रेट सभागार में 3-सी की 20 आपत्तियों पर सुनवाई हुई। सक्षम अधिकारी एवं एडीएम (वित्त एवं राजस्व) सतेंद्र कुमार सिंह ने गोगवान जलालपुर और भैंसानी इस्लामपुर गांव के किसानों की आपत्तियां सुनीं।
सुनवाई के दौरान किसानों ने मांग की कि उनकी भूमि का मुआवजा शामली जिले के बजाय मुजफ्फरनगर जिले के सर्किल रेट के आधार पर दिया जाए।
किसानों का कहना था कि दोनों जिलों के सर्किल रेट में काफी अंतर है, इसलिए उन्हें भी समान दर पर मुआवजा मिलना चाहिए। सुनवाई में किसान अरविंद सिंह, ओमपाल सिंह, शिवराज सिंह और प्रमोद राणा की ओर से अधिवक्ता ने पैरवी की।
एडीएम सतेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर आपत्तियों के निस्तारण की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग, वन विभाग और अन्य संबंधित विभाग एक्सप्रेसवे की जद में आने वाली भूमि, भवन, नलकूप, पेड़ों व अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करेंगे।
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मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर 3-डी की अधिसूचना की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। 3-डी की प्रक्रिया पूरी होने और आपत्तियों के निस्तारण के बाद मुआवजा तय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसानों को नियमानुसार जिले के प्रचलित सर्किल रेट के आधार पर देय गुणांक के अनुसार मुआवजा मिलेगा।
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सुनवाई के दौरान किसानों ने मांग की कि उनकी भूमि का मुआवजा शामली जिले के बजाय मुजफ्फरनगर जिले के सर्किल रेट के आधार पर दिया जाए।
किसानों का कहना था कि दोनों जिलों के सर्किल रेट में काफी अंतर है, इसलिए उन्हें भी समान दर पर मुआवजा मिलना चाहिए। सुनवाई में किसान अरविंद सिंह, ओमपाल सिंह, शिवराज सिंह और प्रमोद राणा की ओर से अधिवक्ता ने पैरवी की।
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एडीएम सतेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर आपत्तियों के निस्तारण की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग, वन विभाग और अन्य संबंधित विभाग एक्सप्रेसवे की जद में आने वाली भूमि, भवन, नलकूप, पेड़ों व अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करेंगे।
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मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर 3-डी की अधिसूचना की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। 3-डी की प्रक्रिया पूरी होने और आपत्तियों के निस्तारण के बाद मुआवजा तय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसानों को नियमानुसार जिले के प्रचलित सर्किल रेट के आधार पर देय गुणांक के अनुसार मुआवजा मिलेगा।