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Shamli News: लंपी वायरस की चपेट में 12 से अधिक गाय
Sat, 01 Aug 2026 01:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sat, 01 Aug 2026 01:16 AM IST
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जलालाबाद। देहात क्षेत्र में लंपी स्किन डिजीज ने दस्तक दी है। दखौड़ी, उमरपुर और चंदेनामाल गांव में 12 से अधिक गायें इस रोग की चपेट में आ गई हैं, जिससे पशुपालकों में चिंता बढ़ गई है।
पशुओं के शरीर पर गांठें बनने, तेज बुखार आने और चारा छोड़ देने से दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कई पशुओं की हालत गंभीर बनी हुई है।दखौड़ी, उमरपुर और चंदेनामाल गांव के पशुपालक चंद्रबोस, मेनपाल, कालूराम और यशपाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में क्षेत्र में अचानक बड़ी संख्या में गाय बीमार पड़ने लगी हैं।
ग्रामीणों ने पशुपालन विभाग से गांवों में विशेष चिकित्सा शिविर लगाने और प्रभावित पशुओं का उपचार कराने की मांग की है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता कम कर देता है
पशु चिकित्सक डॉ. सतपाल सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही विभाग की टीम प्रभावित गांवों में पहुंची और बीमार पशुओं का उपचार शुरू कर दिया गया। साथ ही टीकाकरण भी कराया गया है। उन्होंने बताया कि लंपी रोग मक्खी और मच्छरों के माध्यम से एक पशु से दूसरे पशु में फैलता है। यह पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। यदि समय पर उपचार नहीं मिले और पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता लगातार गिरती जाए तो उसकी जान को भी खतरा हो सकता है।
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लंपी रोग की रोकथाम के लिए विभाग को 72 हजार वैक्सीन खुराक प्राप्त हो चुकी हैं। जहां-जहां लंपी के मामले मिल रहे हैं, वहां तत्काल टीकाकरण कराया जा रहा है। पशुपालकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
— डॉ. चंद्रभानू कश्यप, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, शामली
ये उपाय करें
पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं। बीमार पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। पशुशाला और आसपास की जगह की नियमित सफाई करें तथा कीटाणुनाशक दवा का छिड़काव कराएं। मक्खी और मच्छरों से बचाव के लिए कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करें। पशुओं को पौष्टिक आहार और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएं। संक्रमित पशु के संपर्क में आने के बाद हाथ, उपकरण और रस्सी आदि को अच्छी तरह साफ करें। तेज बुखार, शरीर पर गांठें, आंख या नाक से पानी आने जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
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पशुओं के शरीर पर गांठें बनने, तेज बुखार आने और चारा छोड़ देने से दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कई पशुओं की हालत गंभीर बनी हुई है।दखौड़ी, उमरपुर और चंदेनामाल गांव के पशुपालक चंद्रबोस, मेनपाल, कालूराम और यशपाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में क्षेत्र में अचानक बड़ी संख्या में गाय बीमार पड़ने लगी हैं।
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ग्रामीणों ने पशुपालन विभाग से गांवों में विशेष चिकित्सा शिविर लगाने और प्रभावित पशुओं का उपचार कराने की मांग की है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता कम कर देता है
पशु चिकित्सक डॉ. सतपाल सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही विभाग की टीम प्रभावित गांवों में पहुंची और बीमार पशुओं का उपचार शुरू कर दिया गया। साथ ही टीकाकरण भी कराया गया है। उन्होंने बताया कि लंपी रोग मक्खी और मच्छरों के माध्यम से एक पशु से दूसरे पशु में फैलता है। यह पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। यदि समय पर उपचार नहीं मिले और पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता लगातार गिरती जाए तो उसकी जान को भी खतरा हो सकता है।
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लंपी रोग की रोकथाम के लिए विभाग को 72 हजार वैक्सीन खुराक प्राप्त हो चुकी हैं। जहां-जहां लंपी के मामले मिल रहे हैं, वहां तत्काल टीकाकरण कराया जा रहा है। पशुपालकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
— डॉ. चंद्रभानू कश्यप, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, शामली
ये उपाय करें
पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं। बीमार पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। पशुशाला और आसपास की जगह की नियमित सफाई करें तथा कीटाणुनाशक दवा का छिड़काव कराएं। मक्खी और मच्छरों से बचाव के लिए कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करें। पशुओं को पौष्टिक आहार और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएं। संक्रमित पशु के संपर्क में आने के बाद हाथ, उपकरण और रस्सी आदि को अच्छी तरह साफ करें। तेज बुखार, शरीर पर गांठें, आंख या नाक से पानी आने जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।