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Shamli News: किसानों को मोबाइल एप से मिलेगा उर्वरक
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Tue, 16 Jun 2026 01:26 AM IST
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शामली। सरकार द्वारा प्रस्तावित नेशनल फ्रेमवर्क फॉर सेल्स फर्टिलाइज़र के तहत देश में उर्वरक वितरण प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की तैयारी है। इस नई व्यवस्था में किसानों को मोबाइल एप के जरिए उर्वरक की बुकिंग करनी होगी और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन मॉनिटर की जाएगी।
जिला कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार किसान मोबाइल एप के माध्यम से उर्वरक बुक कर सकेंगे। जिन किसानों की फार्मर आईडी बनी हुई है, वे आधार या फार्मर आईडी से लॉगिन करते ही अपनी भूमि का विवरण स्वतः देख सकेंगे। वहीं जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है, उन्हें आधार कार्ड के जरिए लॉगिन कर अपनी भूमि की जानकारी स्वयं दर्ज करनी होगी। जिन किसानों के पास खुद की जमीन नहीं है और वे बटाई या ठेके पर खेती करते हैं, उन्हें भी आधार से लॉगिन कर भूमि का विवरण और भूमि स्वामी का नाम दर्ज करना होगा। किसान को अपनी बोई गई फसल का विवरण दर्ज करना होगा। इसके आधार पर पोर्टल किसान की भूमि और फसल के अनुसार उर्वरक की अधिकतम सीमा तय करेगा, जिससे जरूरत से अधिक उर्वरक की खरीद रोकी जा सके। किसान अपने आसपास के उर्वरक विक्रेताओं का चयन कर सकेंगे। विक्रेता चुनने के बाद किसान को अपनी जरूरत के अनुसार बुकिंग करनी होगी। बुकिंग के बाद सिस्टम एक बारकोड और बुकिंग आईडी जनरेट करेगा।
बुकिंग के बाद किसान को 48 घंटे के भीतर संबंधित विक्रेता से उर्वरक प्राप्त करना होगा, अन्यथा बुकिंग अमान्य हो सकती है। विक्रेता पहले किसान का आधार नंबर पोओएस मशीन में दर्ज करेगा। इसके बाद मशीन में बारकोड स्कैन करने का विकल्प आएगा। बारकोड स्कैन होने के बाद ही किसान को उर्वरक जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रणाली का उद्देश्य उर्वरक वितरण को डिजिटल बनाकर पारदर्शिता लाना, कालाबाजारी रोकना और वास्तविक किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंचाना है।
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जिला कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार किसान मोबाइल एप के माध्यम से उर्वरक बुक कर सकेंगे। जिन किसानों की फार्मर आईडी बनी हुई है, वे आधार या फार्मर आईडी से लॉगिन करते ही अपनी भूमि का विवरण स्वतः देख सकेंगे। वहीं जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है, उन्हें आधार कार्ड के जरिए लॉगिन कर अपनी भूमि की जानकारी स्वयं दर्ज करनी होगी। जिन किसानों के पास खुद की जमीन नहीं है और वे बटाई या ठेके पर खेती करते हैं, उन्हें भी आधार से लॉगिन कर भूमि का विवरण और भूमि स्वामी का नाम दर्ज करना होगा। किसान को अपनी बोई गई फसल का विवरण दर्ज करना होगा। इसके आधार पर पोर्टल किसान की भूमि और फसल के अनुसार उर्वरक की अधिकतम सीमा तय करेगा, जिससे जरूरत से अधिक उर्वरक की खरीद रोकी जा सके। किसान अपने आसपास के उर्वरक विक्रेताओं का चयन कर सकेंगे। विक्रेता चुनने के बाद किसान को अपनी जरूरत के अनुसार बुकिंग करनी होगी। बुकिंग के बाद सिस्टम एक बारकोड और बुकिंग आईडी जनरेट करेगा।
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बुकिंग के बाद किसान को 48 घंटे के भीतर संबंधित विक्रेता से उर्वरक प्राप्त करना होगा, अन्यथा बुकिंग अमान्य हो सकती है। विक्रेता पहले किसान का आधार नंबर पोओएस मशीन में दर्ज करेगा। इसके बाद मशीन में बारकोड स्कैन करने का विकल्प आएगा। बारकोड स्कैन होने के बाद ही किसान को उर्वरक जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रणाली का उद्देश्य उर्वरक वितरण को डिजिटल बनाकर पारदर्शिता लाना, कालाबाजारी रोकना और वास्तविक किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंचाना है।