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Shamli News: टैक्स माफी के फर्जीवाड़ा में चेयरमैन समेत पांच को समन
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 12 Apr 2026 01:41 AM IST
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कांधला। नगर पालिका परिषद में टावर मालिक का छह वर्षों का गृहकर व जलकर माफ कर पालिका को 54 हजार रुपये की आर्थिक हानि पहुंचाने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पालिका अध्यक्ष सहित पांच अधिकारियों को समन जारी किया है।
नगर पालिका सभासद अरुण गर्ग द्वारा दायर शिकायती पत्र पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने सभी को 21 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं। मामले में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, पद का दुरुपयोग करने और आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप लगाए गए हैं।
आरोप है कि नगर के एक व्यक्ति ने मोहल्ला सरावज्ञान में अपनी संपत्ति पर टावर लगाने के लिए 1 नवंबर 2006 को पालिका के साथ अनुबंध किया था, जिस पर प्रतिवर्ष 9 हजार रुपये कर निर्धारित था। टावर बंद होने का हवाला देते हुए 14 मई 2019 को कर माफी का आवेदन किया गया। पालिका अधिकारियों ने मिलीभगत कर पत्रावली में फर्जीवाड़ा कर दिया।
सभासद अरुण गर्ग के अनुसार कर माफी से संबंधित 10 सितंबर 2019, 15 जुलाई 2020, 18 अक्तूबर 2021 और 6 नवंबर 2023 के पत्र कूटरचित हैं। इन पर न तो तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के आदेश दर्ज हैं और न ही ये पालिका के डाक रजिस्टर में अंकित किए गए। पत्रावली में मूल प्रतियों के बजाय केवल फोटोकॉपी लगाई गई हैं। यह भी आरोप है कि 30 सितंबर 2024 की बोर्ड बैठक के एजेंडे में प्रस्ताव शामिल किए बिना ही पालिका अध्यक्ष की फर्जी अनुमति दर्शाकर इसे कार्यवाही पुस्तिका में दर्ज कर दिया गया। इसके बाद तत्कालीन अधिशासी अधिकारी सुरेश कुमार ने 16 दिसंबर 2024 को कर निर्धारण व मांग रजिस्टर से इस राशि को समाप्त करने की अनुमति दे दी।
कुल 54 हजार रुपये की कर राशि अवैध रूप से माफ कर पालिका को वित्तीय क्षति पहुंचाई गई। मामले में पालिका अध्यक्ष, पूर्व अधिशासी अधिकारी सुरेश कुमार, वर्तमान अधिशासी अधिकारी पूर्णिमा, पूर्व कर अधीक्षक शीतल गुप्ता और लिपिक अशोक कुमार को अदालत में तलब किया गया है।
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नगर पालिका सभासद अरुण गर्ग द्वारा दायर शिकायती पत्र पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने सभी को 21 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं। मामले में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, पद का दुरुपयोग करने और आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप लगाए गए हैं।
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आरोप है कि नगर के एक व्यक्ति ने मोहल्ला सरावज्ञान में अपनी संपत्ति पर टावर लगाने के लिए 1 नवंबर 2006 को पालिका के साथ अनुबंध किया था, जिस पर प्रतिवर्ष 9 हजार रुपये कर निर्धारित था। टावर बंद होने का हवाला देते हुए 14 मई 2019 को कर माफी का आवेदन किया गया। पालिका अधिकारियों ने मिलीभगत कर पत्रावली में फर्जीवाड़ा कर दिया।
सभासद अरुण गर्ग के अनुसार कर माफी से संबंधित 10 सितंबर 2019, 15 जुलाई 2020, 18 अक्तूबर 2021 और 6 नवंबर 2023 के पत्र कूटरचित हैं। इन पर न तो तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के आदेश दर्ज हैं और न ही ये पालिका के डाक रजिस्टर में अंकित किए गए। पत्रावली में मूल प्रतियों के बजाय केवल फोटोकॉपी लगाई गई हैं। यह भी आरोप है कि 30 सितंबर 2024 की बोर्ड बैठक के एजेंडे में प्रस्ताव शामिल किए बिना ही पालिका अध्यक्ष की फर्जी अनुमति दर्शाकर इसे कार्यवाही पुस्तिका में दर्ज कर दिया गया। इसके बाद तत्कालीन अधिशासी अधिकारी सुरेश कुमार ने 16 दिसंबर 2024 को कर निर्धारण व मांग रजिस्टर से इस राशि को समाप्त करने की अनुमति दे दी।
कुल 54 हजार रुपये की कर राशि अवैध रूप से माफ कर पालिका को वित्तीय क्षति पहुंचाई गई। मामले में पालिका अध्यक्ष, पूर्व अधिशासी अधिकारी सुरेश कुमार, वर्तमान अधिशासी अधिकारी पूर्णिमा, पूर्व कर अधीक्षक शीतल गुप्ता और लिपिक अशोक कुमार को अदालत में तलब किया गया है।