{"_id":"69daa991204a7afd7b08992e","slug":"more-votes-were-cut-than-the-margin-of-victory-or-defeat-shamli-news-c-26-1-sal1002-163247-2026-04-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shamli News: हार-जीत के अंतर से ज्यादा कट गए वोट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shamli News: हार-जीत के अंतर से ज्यादा कट गए वोट
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 12 Apr 2026 01:35 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
शामली। जिले में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद सामने आए आंकड़ों ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। कुल 9,75,697 मतदाताओं में से 1.86 लाख मतदाता कम हो गए हैं, जबकि 56,768 नए मतदाता जुड़े हैं।
खास बात यह है कि तीनों विधानसभा सीटों पर कटे वोट पिछले चुनाव के जीत के अंतर से ज्यादा हैं, जिससे आगामी चुनावी समीकरण प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
सबसे ज्यादा वोट राष्ट्रीय लोकदल के कब्जे वाली सीटों पर कटे है। थानाभवन विधानसभा में 41,157 वोट कटे हैं, जबकि वर्ष 2022 में यहां अशरफ अली की जीत का अंतर मात्र 10,806 था। इसी तरह शामली विधानसभा सीट पर 41,992 वोट कटे हैं, जबकि 2022 में जीत का अंतर 7,107 रहा था, जहां से प्रसन्न चौधरी विधायक हैं।
वहीं समाजवादी पार्टी के कब्जे वाली कैराना विधानसभा सीट पर सबसे कम 25,541 वोट कटे हैं। यहां विधायक नाहिद हसन की जीत का अंतर 25,887 था, जो कटे वोटों के लगभग बराबर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन आंकड़ों ने चुनावी गणित पूरी तरह बदल दिया है। भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत सभी दल अब बूथ स्तर पर जोड़-घटाव में जुट गए हैं। गठबंधनों की स्थिति भी आगामी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है, खासकर राष्ट्रीय लोकदल और भारतीय जनता पार्टी के साथ आने के बाद।
n भाजपा तीनों सीटों पर नहीं खोल सकी थी खाता : कैराना सीट लंबे समय से प्रदेश की सियासत का केंद्र रही है। हुकुम सिंह के बाद यहां समाजवादी पार्टी का प्रभाव बढ़ा है। 2014 के उपचुनाव से लेकर 2017 और 2022 तक यह सीट सपा के कब्जे में बनी रही। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा तीनों सीट शामली, थानाभवन और कैराना में खाता तक नहीं खोल सकी थी।
Trending Videos
खास बात यह है कि तीनों विधानसभा सीटों पर कटे वोट पिछले चुनाव के जीत के अंतर से ज्यादा हैं, जिससे आगामी चुनावी समीकरण प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे ज्यादा वोट राष्ट्रीय लोकदल के कब्जे वाली सीटों पर कटे है। थानाभवन विधानसभा में 41,157 वोट कटे हैं, जबकि वर्ष 2022 में यहां अशरफ अली की जीत का अंतर मात्र 10,806 था। इसी तरह शामली विधानसभा सीट पर 41,992 वोट कटे हैं, जबकि 2022 में जीत का अंतर 7,107 रहा था, जहां से प्रसन्न चौधरी विधायक हैं।
वहीं समाजवादी पार्टी के कब्जे वाली कैराना विधानसभा सीट पर सबसे कम 25,541 वोट कटे हैं। यहां विधायक नाहिद हसन की जीत का अंतर 25,887 था, जो कटे वोटों के लगभग बराबर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन आंकड़ों ने चुनावी गणित पूरी तरह बदल दिया है। भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत सभी दल अब बूथ स्तर पर जोड़-घटाव में जुट गए हैं। गठबंधनों की स्थिति भी आगामी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है, खासकर राष्ट्रीय लोकदल और भारतीय जनता पार्टी के साथ आने के बाद।
n भाजपा तीनों सीटों पर नहीं खोल सकी थी खाता : कैराना सीट लंबे समय से प्रदेश की सियासत का केंद्र रही है। हुकुम सिंह के बाद यहां समाजवादी पार्टी का प्रभाव बढ़ा है। 2014 के उपचुनाव से लेकर 2017 और 2022 तक यह सीट सपा के कब्जे में बनी रही। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा तीनों सीट शामली, थानाभवन और कैराना में खाता तक नहीं खोल सकी थी।