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Shamli News: परिषदीय स्कूलों में अब माताएं करेंगी मिड-डे मील की निगरानी, रोज चखेंगी भोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले के परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) की महिला अभिभावकों में से प्रतिदिन एक माता विद्यालय पहुंचकर मध्याह्न भोजन, फल, दूध, रसोई और बर्तनों की स्वच्छता का निरीक्षण करेंगी। निरीक्षण के बाद वह अपनी टिप्पणी विद्यालय में रखी रोस्टर पंजिका में दर्ज करेंगी।
जनपद के 596 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में 78 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। प्रत्येक विद्यालय में 11 सदस्यीय विद्यालय प्रबंध समिति होती है, जिसमें कम से कम 50 प्रतिशत महिलाएं शामिल रहती हैं। इनमें से छह साक्षर एवं इच्छुक महिला अभिभावकों का चयन कर रोस्टर तैयार किया जाएगा।
रोस्टर के अनुसार प्रतिदिन एक महिला अभिभावक विद्यालय पहुंचकर मिड-डे मील का स्वाद चखेंगी और फल, दूध, बर्तनों की सफाई तथा रसोई की स्वच्छता का निरीक्षण करेंगी। यदि किसी प्रकार की कमी मिलती है तो उसे रोस्टर पंजिका में दर्ज किया जाएगा, ताकि समय रहते सुधार कराया जा सके। यह व्यवस्था उन विद्यालयों में भी लागू होगी, जहां स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
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जिला समन्वयक जितेंद्र कुमार ने बताया कि इस पहल से मिड-डे मील की गुणवत्ता में सुधार होगा, भोजन की स्वच्छता और पोषण मानकों की नियमित निगरानी संभव होगी। साथ ही विद्यालयों के प्रति समुदाय और अभिभावकों की सहभागिता बढ़ेगी तथा भोजन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के आदेश पहले भी जारी किए गए थे, लेकिन अब सभी विद्यालयों को इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए दोबारा निर्देश दिए गए हैं।
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शामली। जिले के परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) की महिला अभिभावकों में से प्रतिदिन एक माता विद्यालय पहुंचकर मध्याह्न भोजन, फल, दूध, रसोई और बर्तनों की स्वच्छता का निरीक्षण करेंगी। निरीक्षण के बाद वह अपनी टिप्पणी विद्यालय में रखी रोस्टर पंजिका में दर्ज करेंगी।
जनपद के 596 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में 78 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। प्रत्येक विद्यालय में 11 सदस्यीय विद्यालय प्रबंध समिति होती है, जिसमें कम से कम 50 प्रतिशत महिलाएं शामिल रहती हैं। इनमें से छह साक्षर एवं इच्छुक महिला अभिभावकों का चयन कर रोस्टर तैयार किया जाएगा।
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रोस्टर के अनुसार प्रतिदिन एक महिला अभिभावक विद्यालय पहुंचकर मिड-डे मील का स्वाद चखेंगी और फल, दूध, बर्तनों की सफाई तथा रसोई की स्वच्छता का निरीक्षण करेंगी। यदि किसी प्रकार की कमी मिलती है तो उसे रोस्टर पंजिका में दर्ज किया जाएगा, ताकि समय रहते सुधार कराया जा सके। यह व्यवस्था उन विद्यालयों में भी लागू होगी, जहां स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
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जिला समन्वयक जितेंद्र कुमार ने बताया कि इस पहल से मिड-डे मील की गुणवत्ता में सुधार होगा, भोजन की स्वच्छता और पोषण मानकों की नियमित निगरानी संभव होगी। साथ ही विद्यालयों के प्रति समुदाय और अभिभावकों की सहभागिता बढ़ेगी तथा भोजन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के आदेश पहले भी जारी किए गए थे, लेकिन अब सभी विद्यालयों को इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए दोबारा निर्देश दिए गए हैं।