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Shamli: थाईलैंड में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवक को बुलाया, दो महीने तक म्यांमार में बंधक बना कराया ये काम
अमर उजाला नेटवर्क, शामली
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Mon, 12 Jan 2026 06:03 PM IST
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सार
गढ़ीपुख्ता निवासी शशांक धीमान को नसीम, जतिन और उनके साथियों ने धोखा देकर बुला लिया और जबरन साइबर अपराध कराए। म्यांमार की सेना ने शशांक को मुक्त कराया और थाईलैंड को सौंप दिया। इसके बाद उसे भारत भेजा गया।
बंधक। सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : iStock
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विस्तार
गढ़ीपुख्ता थानाक्षेत्र के गांव पेलखा निवासी शशांक धीमान को थाईलैंड में नौकरी दिलाने का झांसा देकर धोखे से म्यांमार ले गए और करीब दो माह तक बंधक बनाकर रखा। पीड़ित का आरोप है कि उससे वहां पर साइबर अपराधों में लिप्त रखा। म्यांमार की सेना ने युवक को मुक्त कराकर थाईलैंड सेना को सौंपा, जहां से वह भारत लौटा। पीड़ित की तरफ से साइबर क्राइम थाने पर दो नामजद व कुछ अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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शशांक ने बताया कि वह पिछले साल 2025 में दिल्ली अपने भाई के पास पार्किंग का काम करता था। वहां दोस्त अंकित निवासी गागौर थाना झिंझाना के साथ विदेश जाने की बात हुई। अंकित ने उसे बताया था कि थाईलैंड में उसका दोस्त जॉब करता है। उसकी कंपनी में भर्ती चल रही है।
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अंकित ने उसे नसीम खान उर्फ रवि श्वान का नंबर देकर बात करने को कहा। उसकी नसीम खान निवासी यमुनानगर हरियाणा से बात हुई। नसीम ने बताया कि दो लड़कों की वेकेंसी है। 12 अगस्त 2025 को उसने नसीम से वीजा लगवाने को कहा तो उसने जतिन निवासी गुजरात का नंबर दिया। जतिन ने उसे कहा कि कि वह थाईलैंड आने का टिकट खुद से बुक कर लो और पांच-सात दिन काम करके देख लो। टिकट के पैसे यहां आने पर रिफंड करवा देंगे।
17 अगस्त 2025 रात नौ बजे दिल्ली से बैंकाक थाईलैंड के लिए टिकट बुक कराया और थाईलैंड के होटल में रहने व 24 अगस्त 25 की वापसी का टिकट जतिन ने उसे व्हाट्सएप पर दिया। 18 अगस्त 2025 सुबह तीन बजे बैंकाक एयरपोर्ट पर पहुंचा। वहां उसे आरोपी म्यांमार ले गए। वहां उससे साइबर अपराधों में लिप्त कराकर गुलामों की तरह कार्य कराया गया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर नसीम व जतिन और अन्य अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
शशांक को जंगल के रास्ते से म्यांमार ले गए आरोपी
शशांक ने बताया कि जब वह 18 अगस्त की रात तीन बजे थाइलैंड एयरपोर्ट पर उतरा तो वहां से कार द्वारा होटल ले जाया गया। उसी रात आठ बजे उसे होटल से कार लेने आई। उसने जतिन से बात की तो उसने कहा कि वह घुमाने ले जा रहा है। कार उसे जंगल के रास्ते लेकर चली। इसके बाद दूसरी कार में बैठा दिया। चालक से पूछा तो उसने बंदूक दिखाकर उसे चुप कर दिया। इसके बाद एक के बाद एक कई कार बदलीं और 18 घंटे की यात्रा के बाद म्यांमार ले जाया गया। उसने जतिन व नसीम से वापस भारत जाने के लिए कहा तो उसके साथ गाली-गलौज करते हुए धमकी दी गई। भारत वापस भेजने के लिए उससे पांच लाख रुपये मांगे गए।
शशांक ने बताया कि जब वह 18 अगस्त की रात तीन बजे थाइलैंड एयरपोर्ट पर उतरा तो वहां से कार द्वारा होटल ले जाया गया। उसी रात आठ बजे उसे होटल से कार लेने आई। उसने जतिन से बात की तो उसने कहा कि वह घुमाने ले जा रहा है। कार उसे जंगल के रास्ते लेकर चली। इसके बाद दूसरी कार में बैठा दिया। चालक से पूछा तो उसने बंदूक दिखाकर उसे चुप कर दिया। इसके बाद एक के बाद एक कई कार बदलीं और 18 घंटे की यात्रा के बाद म्यांमार ले जाया गया। उसने जतिन व नसीम से वापस भारत जाने के लिए कहा तो उसके साथ गाली-गलौज करते हुए धमकी दी गई। भारत वापस भेजने के लिए उससे पांच लाख रुपये मांगे गए।
म्यांमार सेना ने मुक्त कराकर थाइलैंड सेना के किया था सुपुर्द
शशांक ने बताया कि उसने वहां के दूतावास में चार सितंबर को शिकायत दर्ज कराई थी। 21 अक्तूबर 2025 को केके पार्क म्यावाडी में म्यांमार की सेना आई, जिसकी मदद से वह वहां से निकला। सेना की मदद से करीब 18 किमी चलकर थाईलैंड बॉर्डर तक पहुंचा। उनके साथ भारत के अन्य कई लड़के व लड़की भी थी। म्यांमार की सेना ने उसे सीमा पार करवाई और थाईलैंड की सेना के हैंडओवर कर दिया।
थाईलैंड की सेना उन्हें इमिग्रेशन ऑफिस लेकर पहुंची। फिर थाईलैंड की पुलिस ने भारत के दूतावास से संपर्क किया। थाईलैंड दूतावास में उन्हें 15 दिन इमिग्रेशन पर रखा गया और छह नवंबर 2025 रात नौ बजे के करीब गाजियाबाद एयर फोर्स बेस पर भारत की सेना लेकर पहुंची। वहां से उन्हें नोएडा ले जाया गया और जांच व पूछताछ के बाद उसे घर भेजा।
शशांक ने बताया कि उसने वहां के दूतावास में चार सितंबर को शिकायत दर्ज कराई थी। 21 अक्तूबर 2025 को केके पार्क म्यावाडी में म्यांमार की सेना आई, जिसकी मदद से वह वहां से निकला। सेना की मदद से करीब 18 किमी चलकर थाईलैंड बॉर्डर तक पहुंचा। उनके साथ भारत के अन्य कई लड़के व लड़की भी थी। म्यांमार की सेना ने उसे सीमा पार करवाई और थाईलैंड की सेना के हैंडओवर कर दिया।
थाईलैंड की सेना उन्हें इमिग्रेशन ऑफिस लेकर पहुंची। फिर थाईलैंड की पुलिस ने भारत के दूतावास से संपर्क किया। थाईलैंड दूतावास में उन्हें 15 दिन इमिग्रेशन पर रखा गया और छह नवंबर 2025 रात नौ बजे के करीब गाजियाबाद एयर फोर्स बेस पर भारत की सेना लेकर पहुंची। वहां से उन्हें नोएडा ले जाया गया और जांच व पूछताछ के बाद उसे घर भेजा।

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