Shamli: चिकित्सकीय लापरवाही का मामला, गंगा अमृत हॉस्पिटल के दो चिकित्सकों पर तीन लाख रुपये का जुर्माना
शामली के जिला उपभोक्ता आयोग ने चिकित्सकीय लापरवाही के मामले में गंगा अमृत हॉस्पिटल के दो चिकित्सकों पर तीन लाख रुपये और बीमा कंपनी पर छह लाख से अधिक का जुर्माना लगाया।
विस्तार
शामली में चिकित्सकीय लापरवाही के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने गंगा अमृत हॉस्पिटल के दो चिकित्सकों पर तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं बीमा कंपनी को इलाज में खर्च हुई छह लाख 41 हजार 559 रुपये की राशि ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया गया है।
सीने में दर्द के बाद अस्पताल में कराया था भर्ती
शहर के मोहल्ला रेलपार निवासी शर्मिष्ठा ने 19 जुलाई 2022 को आयोग में परिवाद दायर किया था। इसमें दिल्ली सहारनपुर मार्ग स्थित गंगा अमृत हॉस्पिटल के चिकित्सक सुनील पंवार और चिकित्सक भंडारी तथा ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ शिकायत की गई थी।
परिवाद में बताया गया कि 10 मार्च 2022 को सीने में दर्द होने पर परिजनों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां चिकित्सकों ने परीक्षण कराने के बाद हृदयाघात होने की बात कही और जान बचाने के लिए स्टंट डालने की आवश्यकता बताई। इसके बाद रात करीब दस बजे चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर स्टंट डाल दिया और अगले दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
यह भी पढ़ें: किडनी कांड: 3.50 लाख रुपये में निकाल ली एमबीए के छात्र की किडनी, टेलीग्राम के जरिये हुआ सौदा, ये है पूरा मामला
तबीयत बिगड़ने पर दूसरे अस्पताल में हुआ खुलासा
घर पहुंचने के बाद महिला की तबीयत और अधिक खराब होने लगी। चिकित्सकों ने परिजनों को जल्दी ठीक होने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में उन्हें दोबारा अस्पताल बुलाकर दूसरा स्टंट डालने का दबाव बनाया गया।
19 मार्च को हालत ज्यादा खराब होने पर परिजन उन्हें करनाल के एक अस्पताल ले गए। वहां परीक्षण के बाद चिकित्सकों ने बताया कि महिला को गलत और लापरवाही से स्टंट डाला गया है। इसके बाद उन्हें चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
चंडीगढ़ में करीब एक सप्ताह तक इलाज के बाद महिला की जान बच सकी।
मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने पाया कि महिला का इलाज उपेक्षापूर्ण तरीके से किया गया था। आयोग ने चिकित्सक सुनील पंवार और चिकित्सक भंडारी को संयुक्त रूप से तीन लाख रुपये का मुआवजा जमा करने का आदेश दिया।
इसके अलावा बीमा कंपनी को इलाज में खर्च हुई छह लाख 41 हजार 559 रुपये की राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ परिवाद दायर करने की तिथि से भुगतान की तिथि तक अदा करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही दस हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भी देने को कहा गया है। आयोग ने आदेश दिया है कि 45 दिन के भीतर आदेश का पालन नहीं करने पर चिकित्सकों के खिलाफ उपभोक्ता अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।