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Shamli: गंगा अमृत हॉस्पिटल के दो डॉक्टरों ने गलत तरीके से डाल दिया स्टेंट, आयोग ने लगाया ये जुर्माना
अमर उजाला नेटवर्क, शामली
Published by: Mohd Mustakim
Updated Thu, 02 Apr 2026 05:02 PM IST
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सार
रेलपार मोहल्ला निवासी शर्मिष्ठा ने न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में डॉ. सुनील पंवार और डॉ. भंडारी व इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ वाद दायर किया था। आयोग ने चिकित्सकों पर तीन लाख रुपये जुर्माना लगाया है।
सांकतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने गंगा अमृत हॉस्पिटल के दो चिकित्सकों पर गलत व लापरवाही से छल्ला डालने के मामले की कार्रवाई की है। आयोग ने हॉस्पिटल के दो चिकित्सकों पर तीन लाख रुपये और बीमा कंपनी पर इलाज में खर्च हुए छह लाख 41 हजार 559 रुपये का जुर्माना लगाया है।
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शहर के मोहल्ला रेलपार निवासी शर्मिष्ठा ने 19 जुलाई 2022 को आयोग में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित गंगा अमृत हॉस्पिटल व उसके चिकित्सक सुनील पंवार व डॉ. भंडारी और द ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी लि. बुढ़ाना रोड शामली के विरुद्ध परिवाद दायर कराया था। दायर परिवाद में बताया था कि दस मार्च 2022 को उसके सीने में दर्द होने के कारण उसके परिजनों ने इमरजेंसी फीस व अन्य सभी प्रतिफल धनराशि अदा कर गंगा अमृत हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।
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हॉस्पिटल के डॉ. सुनील पंवार व डॉ. भंडारी ने उसका इलाज किया। एक मार्च 2022 को सीने में तेज दर्द होने के कारण चिकित्सकों ने उसके सभी टेस्ट कराए और उसे हार्ट अटैक आना बताकर कहा कि स्टंट डालना पड़ेगा। स्टंट डाले बिना मरीज की जान को खतरा है। हॉस्पिटल की सलाह पर परिजनों ने सभी भुगतान कर स्टंट डालने को कह दिया। करीब 10 बजे रात में दोनों चिकित्सकों ने शर्मिष्ठा को स्टंट डाल दिया गया।
अगले दिन दो मार्च को चिकित्सकों ने उसे डिस्चार्ज कर दिया, लेकिन घर पहुंचते ही उसकी तबियत और ज्यादा खराब होने लगी। चिकित्सकों ने जल्दी ठीक होने का आश्वासन दिया। ज्यादा तबियत खराब होने पर 17 से 19 मार्च तक लगातार हॉस्पिटल बुलाया गया और दूसरा स्टंट डालने का दबाव बनाया गया।
19 मार्च को ज्यादा तबियत खराब होने पर परिजन उसे करनाल हॉस्पिटल ले गए, जहां सभी टेस्ट कर परिजनों को बताया गया कि शर्मिष्ठा को गलत व घोर लापरवाही से छल्ला डाला गया है। वहां से उसे चंडीगढ़ रेफर किया गया। 20 मार्च 2022 की रात में शर्मिष्ठा को भर्ती कर परिजनों को बताया कि छल्ला गलत व घोर लापरवाही से डाला गया। एक सप्ताह के इलाज के बाद परिवादिया की जान बच सकी।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने परिवाद पर सुनवाई कर हॉस्पिटल के डॉ. सुनील पंवार व डॉ. भंडारी को आदेशित किया कि उनके द्वारा परिवादिया के उपेक्षापूर्ण इलाज व लापरवाही के कारण हुए आर्थिक, मानसिक व शारीरिक क्षति हेतु तीन लाख रुपये संयुक्त रूप से अदा करने हेतु इस आयोग में जमा करें।
इसके अलावा बीमा कंपनी को इलाज में हुए खर्च छह लाख 41 हजार 559 रुपये मय नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से वाद दायर की तिथि से भुगतान की तिथि तक और वाद व्यय दस हजार रुपये शर्मिष्ठा को भुगतान हेतु आयोग में जमा करने का आदेश दिया। साथ ही आदेश का पालन 45 दिन में न करने पर चिकित्सकों को उनके विरुद्ध उपभोक्ता अधिनियम के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई।