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Shamli News: महाराष्ट्र से सिम, बिहार में खाते और यूपी-हरियाणा में की जा रही ठगी
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Wed, 17 Jun 2026 01:00 AM IST
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शामली। साइबर अपराधियों ने पुलिस और जांच एजेंसियों से बचने के लिए ठगी का नया मॉडल तैयार कर लिया है। गिरोह के सदस्य एक राज्य से फर्जी सिम खरीदते हैं, दूसरे राज्य में बैंक खाते खुलवाते हैं और अन्य राज्यों में लोगों के खातों में सेंधमारी कर रहे हैं। इससे अपराध करने वाले, बैंक खाता उपलब्ध कराने वाले और रकम निकालने वाले अलग-अलग राज्यों में हैं, जिससे पुलिस की चुनौती बढ़ गई है।
हाल ही में साइबर सेल और पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अंतरराज्यीय ठगी गिरोह के दिल्ली के सरोजनी नगर निवासी सादिक और आरिफ खान से पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ है। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि साइबर ठग पुलिस से बचने के लिए राज्यों की सीमाओं का फायदा उठा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र के अहमदनगर क्षेत्र से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल सिम कार्ड खरीदे जाते हैं। इन सिमों का इस्तेमाल कर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान समेत कई राज्यों के लोगों को कॉल और मेसेज भेजकर ठगी की जाती है।
ठगी की रकम बिहार के पटना और आसपास के क्षेत्रों में खुलवाए गए बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। इन खातों से रकम उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, गाजियाबाद तथा हरियाणा के रोहतक और गुरुग्राम के एटीएम से निकाल ली जाती है। पुलिस इस नेटवर्क का खुलासा होने के बाद इन पर शिकंजा कसने के लिए आगे की रणनीति भी इसी प्रकार से तैयार कर रही है।
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फ्रिज बेचने के नाम पर तीन लाख की ठगी
काजीवाड़ा निवासी शराफत से फ्रिज बेचने के नाम पर तीन लाख रुपये ठग लिए गए थे। जांच में पता चला कि ठगी में प्रयुक्त सिम महाराष्ट्र से खरीदी गई थी, बैंक खाता बिहार के पटना का था और रकम की निकासी रोहतक तथा मुजफ्फरनगर में की गई। पुलिस ने इस मामले में दिल्ली के शाहदरा निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
डिजिटल अरेस्ट दिखाकर छह लाख हड़पे
कैराना रोड निवासी मनोज कुमार को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर छह लाख रुपये की ठगी की गई। जांच में महाराष्ट्र के अहमदनगर का सिम था। बिहार के बैंक खाते में रकम गई और हरियाणा से इस रकम की निकासी की गई। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।
छह साल में 19 करोड़ रुपये की ठगी
वर्ष 2021 से वर्ष 2026 तक जनपद शामली में साइबर ठगी की 7,279 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इस दौरान साइबर अपराधियों ने 19 करोड़ 12 लाख 9 हजार 487 रुपये की ठगी की। पुलिस और साइबर सेल 9 करोड़ 91 लाख 64 हजार 895 रुपये की धनराशि बरामद अथवा होल्ड कराने में सफल रही है।
अब रिटायर्ड अधिकारियों के खातों का हो रहा इस्तेमाल
एसपी ने बताया कि साइबर अपराधी अब छात्रों और मजदूरों के बजाय रिटायर्ड अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जांच में दिल्ली पुलिस के एक सेवानिवृत्त सिपाही और एक रिटायर्ड शिक्षक के खातों के उपयोग की जानकारी मिली है।
सावधानी ही बचाव
एसपी ने लोगों से अपील की है कि कोई भी बैंक, पुलिस, ईडी, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से पूछताछ नहीं करती और न ही किसी को डिजिटल अरेस्ट करती है। ऐसी कॉल आते ही तुरंत कॉल काट दें। ओटीपी, बैंकिंग विवरण और व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
छह साल में साइबर ठगी का बढ़ता ग्राफ
2021 : 371 शिकायतें, 47.41 लाख रुपये की ठगी
2022 : 1239 शिकायतें, 1.98 करोड़ रुपये की ठगी
2023 : 1387 शिकायतें, 2.94 करोड़ रुपये की ठगी
2024 : 1634 शिकायतें, 5.94 करोड़ रुपये की ठगी
2025 : 1931 शिकायतें, 4.21 करोड़ रुपये की ठगी
2026 : 717 शिकायतें, 3.55 करोड़ रुपये की ठगी
हाल ही में साइबर सेल और पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अंतरराज्यीय ठगी गिरोह के दिल्ली के सरोजनी नगर निवासी सादिक और आरिफ खान से पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ है। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि साइबर ठग पुलिस से बचने के लिए राज्यों की सीमाओं का फायदा उठा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र के अहमदनगर क्षेत्र से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल सिम कार्ड खरीदे जाते हैं। इन सिमों का इस्तेमाल कर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान समेत कई राज्यों के लोगों को कॉल और मेसेज भेजकर ठगी की जाती है।
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ठगी की रकम बिहार के पटना और आसपास के क्षेत्रों में खुलवाए गए बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। इन खातों से रकम उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, गाजियाबाद तथा हरियाणा के रोहतक और गुरुग्राम के एटीएम से निकाल ली जाती है। पुलिस इस नेटवर्क का खुलासा होने के बाद इन पर शिकंजा कसने के लिए आगे की रणनीति भी इसी प्रकार से तैयार कर रही है।
फ्रिज बेचने के नाम पर तीन लाख की ठगी
काजीवाड़ा निवासी शराफत से फ्रिज बेचने के नाम पर तीन लाख रुपये ठग लिए गए थे। जांच में पता चला कि ठगी में प्रयुक्त सिम महाराष्ट्र से खरीदी गई थी, बैंक खाता बिहार के पटना का था और रकम की निकासी रोहतक तथा मुजफ्फरनगर में की गई। पुलिस ने इस मामले में दिल्ली के शाहदरा निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
डिजिटल अरेस्ट दिखाकर छह लाख हड़पे
कैराना रोड निवासी मनोज कुमार को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर छह लाख रुपये की ठगी की गई। जांच में महाराष्ट्र के अहमदनगर का सिम था। बिहार के बैंक खाते में रकम गई और हरियाणा से इस रकम की निकासी की गई। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।
छह साल में 19 करोड़ रुपये की ठगी
वर्ष 2021 से वर्ष 2026 तक जनपद शामली में साइबर ठगी की 7,279 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इस दौरान साइबर अपराधियों ने 19 करोड़ 12 लाख 9 हजार 487 रुपये की ठगी की। पुलिस और साइबर सेल 9 करोड़ 91 लाख 64 हजार 895 रुपये की धनराशि बरामद अथवा होल्ड कराने में सफल रही है।
अब रिटायर्ड अधिकारियों के खातों का हो रहा इस्तेमाल
एसपी ने बताया कि साइबर अपराधी अब छात्रों और मजदूरों के बजाय रिटायर्ड अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जांच में दिल्ली पुलिस के एक सेवानिवृत्त सिपाही और एक रिटायर्ड शिक्षक के खातों के उपयोग की जानकारी मिली है।
सावधानी ही बचाव
एसपी ने लोगों से अपील की है कि कोई भी बैंक, पुलिस, ईडी, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से पूछताछ नहीं करती और न ही किसी को डिजिटल अरेस्ट करती है। ऐसी कॉल आते ही तुरंत कॉल काट दें। ओटीपी, बैंकिंग विवरण और व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
छह साल में साइबर ठगी का बढ़ता ग्राफ
2021 : 371 शिकायतें, 47.41 लाख रुपये की ठगी
2022 : 1239 शिकायतें, 1.98 करोड़ रुपये की ठगी
2023 : 1387 शिकायतें, 2.94 करोड़ रुपये की ठगी
2024 : 1634 शिकायतें, 5.94 करोड़ रुपये की ठगी
2025 : 1931 शिकायतें, 4.21 करोड़ रुपये की ठगी
2026 : 717 शिकायतें, 3.55 करोड़ रुपये की ठगी