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Shamli News: आयोग ने बीमा कंपनी पर 5,50,942 रुपये का जुर्माना लगाया

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Apr 2026 01:12 AM IST
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The commission imposed a fine of Rs 5,50,942 on the insurance company.
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दंपती को क्लेम न देने पर आयोग ने सुनवाई कर आदेश सुनाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने क्लेम न देने के मामले में सुनवाई की। आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी पर 5,50,942 रुपये का जुर्माना लगाया है।
राजकुमार वर्मा व उनकी पत्नी सविता वर्मा निवासी गांव टिटौली हाल पता मोहल्ला जैनपुरी गढ़ीपुख्ता ने दो सितंबर 2022 को स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड शाखा कार्यालय आर्यपुरी बुढ़ाना रोड शामली के विरुद्ध परिवाद दायर कराया।
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उन्होंने बताया कि उन दोनों ने और अपने पुत्र सार्थक वर्मा के लिए बीमा कंपनी ने 19 अक्तूबर 2015 को पांच लाख रुपये का हेल्थ कवर दिया गया था। परिवादी राजकुमार व सविता वर्मा का कहना है कि कोरोना काल में दोनों का स्वास्थ्य खराब हो गया। 14 अप्रैल 2021 को निजी अस्पताल के चिकित्सक की सलाह से जांच कराई तो वे दोनों कोराेना पॉजिटिव पाए गए। चिकित्सक ने उन दोनों को पानीपत रेफर कर दिया।
राजकुमार वर्मा 14 अप्रैल से 18 अप्रैल 2021 तक अस्पताल में भर्ती रहे जबकि सविता वर्मा 14 अप्रैल से 22 अप्रैल 2021 तक भर्ती रही। अस्पताल में भर्ती होने की सूचना उन दोनों ने ईमेल से बीमा कंपनी को भेज दी थी। बीमा कंपनी को क्लेम के लिए सभी जरूरी कागज मेडिकल रिपोर्ट आदि उपलब्ध कराए गए, लेकिन बीमा कंपनी ने मेडिकल रिकाॅर्ड में विसंगति होना बताकर क्लेम को अस्वीकार कर दिया।
उन्होंने बीमा कंपनी के ग्रिवियांस रिड्रेसल अधिकारी को मेल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उन्होंने भी क्लेम को पूर्व के आधारों पर ही अस्वीकार कर दिया। राजकुमार ने बताया कि उनके इलाज में 1,74,300 रुपये और सविता वर्मा के इलाज पर 3,71,642 रुपये यानी कुल 5,25,942 रुपये खर्च आया।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने बीमा कंपनी को आदेशित किया कि परिवादियों के इलाज में खर्च हुए 5,25,942 रुपये नियमानुसार देय धनराशि दावा फार्म प्रस्तुत करने की तिथि 15 अप्रैल 2021 से भुगतान की तिथि तक छह प्रतिशत मय ब्याज की दर से परिवादियों को भुगतान हेतु आयोग में जमा करें।
बीमा कंपनी द्वारा किए गए अनुचित व्यापार व्यवहार हेतु बीमा कंपनी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी अधिरोपित किया। अर्थदंड की धनराशि परिवादी को देय न होकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी। बीमा कंपनी को आदेश का पालन 45 दिन के अंदर न करने पर उपभोक्ता अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
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