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Shamli News: दस साल में 2 घंटे 11 मिनट घटा सबसे लंबा रोजा
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Wed, 18 Feb 2026 01:03 AM IST
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झिंझाना। पिछले दस वर्षों में सबसे लंबे रोजे की अवधि में 2 घंटे 11 मिनट की कमी आई है। वर्ष 2016 में सबसे लंबा रोजा 15 घंटे 45 मिनट का था, जबकि इस बार यह घटकर 13 घंटे 34 मिनट का रहने का अनुमान है। आने वाले वर्षों में इसमें और कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग तीस दिन तक रोजा रखकर इबादत करते हैं। रोजेदार सूर्योदय से सूर्यास्त तक बिना खाए-पिए खुदा की बंदगी करते हैं और नेक अमल में समय बिताते हैं।
सबसे छोटा रोजा 12 घंटे 46 मिनट का होगा
मौलाना तैय्यब कासमी के अनुसार हर रमजान में अवधि के हिसाब से एक रोजा सबसे लंबा और एक सबसे छोटा होता है। इस बार सबसे लंबा रोजा 13 घंटे 34 मिनट का और सबसे छोटा रोजा करीब 12 घंटे 46 मिनट का रहने का अनुमान है। इस तरह पिछले दस वर्षों में सबसे लंबे रोजे की अवधि में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
मौसम और दिन की लंबाई पर निर्भर करती है अवधि
मदरसा जामिया तुस्सालिहात के प्रबंधक मौलाना तैय्यब कासमी के अनुसार रोजे की अवधि मौसम और दिन की लंबाई के अनुसार घटती-बढ़ती है। गर्मियों में दिन लंबे होने से रोजे की अवधि ज्यादा होती है, जबकि सर्दियों में दिन छोटे होने से रोजे छोटे हो जाते हैं। जैसे-जैसे रमजान सर्दियों की ओर बढ़ेगा, रोजे की अवधि और कम होती जाएगी। 30 वां या अंतिम रोजा सबसे बड़ा होता है।
इस बार पांच जुमे हो सकते हैं
मौलाना आजम के अनुसार यदि 18 फरवरी की शाम चांद का दीदार होता है तो 19 फरवरी से रमजान शुरू हो सकता है और आखिरी रोजा 20 मार्च को होगा। इस दौरान पांच जुमे 20 फरवरी, 27 फरवरी, 6 मार्च, 13 मार्च और 20 मार्च को पड़ेंगे। इस हिसाब से इस बार आखिरी रोजा अलविदा जुमा के दिन होने की संभावना है।
सिर्फ भूखा रहने का नाम नहीं है रोजा
मौलाना जियाउल हक ने कहा कि रमजान सिर्फ भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि यह महीना सब्र, और इबादत का पैगाम देता है। इस मुकद्दस महीने में मुसलमानों को चाहिए कि वे ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत, कुरआन की तिलावत और जरूरतमंदों की मदद में बिताएं।
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रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग तीस दिन तक रोजा रखकर इबादत करते हैं। रोजेदार सूर्योदय से सूर्यास्त तक बिना खाए-पिए खुदा की बंदगी करते हैं और नेक अमल में समय बिताते हैं।
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सबसे छोटा रोजा 12 घंटे 46 मिनट का होगा
मौलाना तैय्यब कासमी के अनुसार हर रमजान में अवधि के हिसाब से एक रोजा सबसे लंबा और एक सबसे छोटा होता है। इस बार सबसे लंबा रोजा 13 घंटे 34 मिनट का और सबसे छोटा रोजा करीब 12 घंटे 46 मिनट का रहने का अनुमान है। इस तरह पिछले दस वर्षों में सबसे लंबे रोजे की अवधि में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
मौसम और दिन की लंबाई पर निर्भर करती है अवधि
मदरसा जामिया तुस्सालिहात के प्रबंधक मौलाना तैय्यब कासमी के अनुसार रोजे की अवधि मौसम और दिन की लंबाई के अनुसार घटती-बढ़ती है। गर्मियों में दिन लंबे होने से रोजे की अवधि ज्यादा होती है, जबकि सर्दियों में दिन छोटे होने से रोजे छोटे हो जाते हैं। जैसे-जैसे रमजान सर्दियों की ओर बढ़ेगा, रोजे की अवधि और कम होती जाएगी। 30 वां या अंतिम रोजा सबसे बड़ा होता है।
इस बार पांच जुमे हो सकते हैं
मौलाना आजम के अनुसार यदि 18 फरवरी की शाम चांद का दीदार होता है तो 19 फरवरी से रमजान शुरू हो सकता है और आखिरी रोजा 20 मार्च को होगा। इस दौरान पांच जुमे 20 फरवरी, 27 फरवरी, 6 मार्च, 13 मार्च और 20 मार्च को पड़ेंगे। इस हिसाब से इस बार आखिरी रोजा अलविदा जुमा के दिन होने की संभावना है।
सिर्फ भूखा रहने का नाम नहीं है रोजा
मौलाना जियाउल हक ने कहा कि रमजान सिर्फ भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि यह महीना सब्र, और इबादत का पैगाम देता है। इस मुकद्दस महीने में मुसलमानों को चाहिए कि वे ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत, कुरआन की तिलावत और जरूरतमंदों की मदद में बिताएं।