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Shravasti News: प्लास्टिक डिब्बे में डीजल देने पर पाबंदी, जरीकेन खरीदना मजबूरी

संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती Updated Wed, 17 Jun 2026 12:49 AM IST
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Ban on dispensing diesel in plastic containers; purchasing jerrycans becomes a necessity.
जरीकेन दिखाते रामकुमार मिश्रा।
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कटरा। शासन के निर्देशों का हवाला देकर पंप कर्मी किसानों को प्लास्टिक के डिब्बे या बोतलों में डीजल नहीं दे रहे हैं। इससे किसानों के सामने फसलों की सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पंप कर्मी किसानों से 2000 रुपये तक के जरीकेन खरीदने को कह रहे हैं और केवल उन्हीं में डीजल दे रहे हैं।

इस स्थिति से किसानों में भारी आक्रोश है, खासकर गरीब किसानों को परेशानी हो रही है। वे 2000 रुपये का जरीकेन खरीदने में असमर्थ हैं। कटरा के किसान राम कुमार मिश्रा ने बताया कि खरगौरा बस्ती के भारत पेट्रोल पंप पर उन्हें डीजल नहीं मिला। उनकी धान की नर्सरी सूख रही थी, फिर भी प्लास्टिक के डिब्बे में तेल देने से मना कर दिया गया। पंप कर्मियों ने कहा कि अब डीजल केवल ट्रैक्टर, पंपिंग सेट या लोहे के जरीकेन में ही मिलेगा। जब उन्होंने बाजार में जरीकेन की कीमत सुनी तो वे दंग रह गए। बलरामपुर जनपद के राजकिशोर को भी ऐसी ही समस्या का सामना करना पड़ा। वे गन्ने के खेत में पानी भरने के लिए 12 किलोमीटर साइकिल चलाकर श्रावस्ती आए थे, लेकिन बिना डीजल के वापस लौटना पड़ा।
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किराए पर इंजन लाने वालों की समस्या
खरगौरा बस्ती निवासी किसान रोशन पांडेय ने बताया कि उनके बेटे को डिब्बे में तेल नहीं मिला। वे किराए पर डीजल इंजन लाए थे, लेकिन डीजल न मिलने से परेशान हुए। मजबूरन उन्हें पंपिंग सेट के मालिक रामनरेश के साथ पंपिंग सेट ही पेट्रोल पंप पर ले जाना पड़ा। तब जाकर उन्हें तेल मिल पाया। चक्रभंडार निवासी महेश पटेल और नारायणपुर के विश्वनाथ भी बिना डीजल के लौटना पड़ा। दोनों ने बताया कि 2000 रुपये का जरीकेन खरीदना छोटे किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
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बटाई पर खेती करने वालों की चिंता
चक्रभंडार निवासी महेश पटेल और नारायणपुर के विश्वनाथ भी बिना डीजल के लौटे। उन्होंने बताया कि 2000 रुपये का जरीकेन खरीदना छोटे किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। खरगौरा बस्ती के किसान कल्पनाथ ने चिंता व्यक्त की कि उनके पास निजी जमीन नहीं है। यदि सिंचाई के लिए तेल नहीं मिलेगा, तो वे बटाई पर खेत नहीं ले पाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अब किसान कार्ड के बिना खाद भी नहीं मिल रही है, जिससे खेती करना मुश्किल हो रहा है।

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