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जेतवन में साधना करते थे भगवान बुद्ध : देवानंद
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Mon, 16 Mar 2026 11:30 PM IST
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बोधि वृक्ष की पूजा करते थाईलैंड के अनुयायी।
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कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 70 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से बोधि वृक्ष व जेतवन परिसर में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि भगवान बुद्ध श्रावस्ती में अनाथपिंडिक के जेतवन परिसर में साधना व आराम के लिए रुकते थे। साथ ही महापुरुषों के बत्तीस लक्षणों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने समझाया कि इन लक्षणों से युक्त महापुरुषों की केवल दो ही गतियां होती हैं। यदि ऐसा महापुरुष घर में रहता है, तो वह धार्मिक, धर्मराजा और चक्रवर्ती सम्राट बनता है। उसके पास चक्ररत्न, हस्तिरत्न, अश्वरत्न, मनिरत्न, स्त्रीरत्न, गृहपतिरत्न और परिणायकरत्न जैसे सात रत्न होते हैं। वहीं, यदि वह गृह त्याग करता है, तो संसार के आवरण को हटाने में समर्थ अर्हत सम्यकसंबुद्ध होता है। अनुयायियों ने जेतवन परिसर के भ्रमण के साथ ही शिवली स्तूप, कौशाम कुटी और राहुल कुटी का भी भ्रमण किया और उनके इतिहास की जानकारी ली।
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सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि भगवान बुद्ध श्रावस्ती में अनाथपिंडिक के जेतवन परिसर में साधना व आराम के लिए रुकते थे। साथ ही महापुरुषों के बत्तीस लक्षणों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने समझाया कि इन लक्षणों से युक्त महापुरुषों की केवल दो ही गतियां होती हैं। यदि ऐसा महापुरुष घर में रहता है, तो वह धार्मिक, धर्मराजा और चक्रवर्ती सम्राट बनता है। उसके पास चक्ररत्न, हस्तिरत्न, अश्वरत्न, मनिरत्न, स्त्रीरत्न, गृहपतिरत्न और परिणायकरत्न जैसे सात रत्न होते हैं। वहीं, यदि वह गृह त्याग करता है, तो संसार के आवरण को हटाने में समर्थ अर्हत सम्यकसंबुद्ध होता है। अनुयायियों ने जेतवन परिसर के भ्रमण के साथ ही शिवली स्तूप, कौशाम कुटी और राहुल कुटी का भी भ्रमण किया और उनके इतिहास की जानकारी ली।
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