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Shravasti News: पंजीकरण न फिटनेस, बच्चे लेकर भर रहे फर्राटा
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जमुनहा-बहराइच मार्ग पर ई-रिक्शा में बैठकर जाते विद्यार्थी।-
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श्रावस्ती/गिरंट बजार। शिक्षा सत्र तो नया शुरू हो गया, लेकिन व्यवस्थाएं अभी भी पुरानी ही चल रही हैं। निजी विद्यालयों में परिवहन सेवा के नाम पर मैजिक वाहनों की भरमार है। इन वाहनों के संचालन में नियमों को दरकिनार कर विद्यार्थियों को लाने ले जाने का काम किया जाता है।
निजी विद्यालयों में परिवहन सेवा के नाम पर ज्यादातर छोटे वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में चाहे इसको विभागीय लापरवाही कहें या फिर अभिभावकों की अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति उदासीनता, कि वह बच्चों को वाहनों में बैठाने से पहले न तो उसकी स्थिति की परवाह करते हैं और न ही सुरक्षा मानकों को ही परखते हैं। बसों में तो काफी हद तक सुरक्षा के मानकों को पूरा कर लिया जाता है, लेकिन यदि इन छोटे वाहनों का बारीकी से निरीक्षण किया जाए तो कई खामियां उजागर हो सकती हैं।
इनमें न ही अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था होती है और न ही प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की। इनमें सीसीटीवी कैमरे व जीपीएस यंत्र भी नजर नहीं आता है। जिले में कुल 54 विद्यालयों में 132 वाहनों का संचालन किया जा रहा है। इनमें से 12 वाहन ऐसे हैं जिनकी पंजीयन अवधि समाप्त हो चुकी है। वहीं, नौ वाहनों की फिटनेस भी समाप्त है। वाहन पर 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार का स्लोगन तो लिखा मिल जाएगा, लेकिन ये वाहन मौका पाते ही अनियंत्रित रफ्तार में दौड़ाए जाते हैं।
फिटनेस कराते समय पूरे होते हैं मानक
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी विनीत कुमार मिश्रा ने बताया कि जब वाहनों का फिटनेस कराना होता है तो संबंधित वाहन में सभी मानक पूरे मिलते हैं। हालांकि स्कूली वाहनों में मानकों की जांच के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही सभी वाहनों को ऑनलाइन दर्ज कर उनके निर्धारित मानक भी दर्ज किए रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद यदि कोई वाहन मानक विहीन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निजी विद्यालयों में परिवहन सेवा के नाम पर ज्यादातर छोटे वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में चाहे इसको विभागीय लापरवाही कहें या फिर अभिभावकों की अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति उदासीनता, कि वह बच्चों को वाहनों में बैठाने से पहले न तो उसकी स्थिति की परवाह करते हैं और न ही सुरक्षा मानकों को ही परखते हैं। बसों में तो काफी हद तक सुरक्षा के मानकों को पूरा कर लिया जाता है, लेकिन यदि इन छोटे वाहनों का बारीकी से निरीक्षण किया जाए तो कई खामियां उजागर हो सकती हैं।
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इनमें न ही अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था होती है और न ही प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की। इनमें सीसीटीवी कैमरे व जीपीएस यंत्र भी नजर नहीं आता है। जिले में कुल 54 विद्यालयों में 132 वाहनों का संचालन किया जा रहा है। इनमें से 12 वाहन ऐसे हैं जिनकी पंजीयन अवधि समाप्त हो चुकी है। वहीं, नौ वाहनों की फिटनेस भी समाप्त है। वाहन पर 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार का स्लोगन तो लिखा मिल जाएगा, लेकिन ये वाहन मौका पाते ही अनियंत्रित रफ्तार में दौड़ाए जाते हैं।
फिटनेस कराते समय पूरे होते हैं मानक
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी विनीत कुमार मिश्रा ने बताया कि जब वाहनों का फिटनेस कराना होता है तो संबंधित वाहन में सभी मानक पूरे मिलते हैं। हालांकि स्कूली वाहनों में मानकों की जांच के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही सभी वाहनों को ऑनलाइन दर्ज कर उनके निर्धारित मानक भी दर्ज किए रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद यदि कोई वाहन मानक विहीन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।