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Siddharthnagar News: सुरक्षित मातृत्व अभियान में 43 गर्भवतियों की हुई जांच
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:37 AM IST
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेवा पर बुधवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत चला विशेष अभियान
भारतभारी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेवा पर बुधवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवतियों के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इसमें 43 गर्भवतियों की जांच कर उन्हें आवश्यक चिकित्सीय परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया गया।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास चौधरी के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच के दौरान पांच महिलाओं को उच्च जोखिम (हाई रिस्क) श्रेणी में चिह्नित किया गया। इनमें मुख्य रूप से खून की कमी, उच्च रक्तचाप और गर्भावस्था से जुड़ी अन्य जटिलताओं के लक्षण पाए गए।
डॉ. चौधरी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम वाली महिलाओं की समय रहते पहचान कर उचित उपचार और परामर्श दिया जाना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर भी किया जाता है ताकि जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित रह सकें।
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शिविर में गर्भवतियों के खून और पेशाब की जांच के साथ ही आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम संबंधी परीक्षण भी किए गए। चिकित्सकों ने महिलाओं को संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और सुरक्षित प्रसव के प्रति जागरूक किया।
बोले जिम्मेदार
उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान और उपचार से मातृ व शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से नियमित जांच और परामर्श दिया जा रहा है।
- डॉ. विकास चौधरी, अधीक्षक, सीएचसी बेवा
भारतभारी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेवा पर बुधवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवतियों के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इसमें 43 गर्भवतियों की जांच कर उन्हें आवश्यक चिकित्सीय परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया गया।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास चौधरी के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच के दौरान पांच महिलाओं को उच्च जोखिम (हाई रिस्क) श्रेणी में चिह्नित किया गया। इनमें मुख्य रूप से खून की कमी, उच्च रक्तचाप और गर्भावस्था से जुड़ी अन्य जटिलताओं के लक्षण पाए गए।
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डॉ. चौधरी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम वाली महिलाओं की समय रहते पहचान कर उचित उपचार और परामर्श दिया जाना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर भी किया जाता है ताकि जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित रह सकें।
शिविर में गर्भवतियों के खून और पेशाब की जांच के साथ ही आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम संबंधी परीक्षण भी किए गए। चिकित्सकों ने महिलाओं को संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और सुरक्षित प्रसव के प्रति जागरूक किया।
बोले जिम्मेदार
उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान और उपचार से मातृ व शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से नियमित जांच और परामर्श दिया जा रहा है।
- डॉ. विकास चौधरी, अधीक्षक, सीएचसी बेवा