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Siddharthnagar News: छलक रहे जाम से दिमाग बेलगाम, अपने-पराए का फर्क भूल ले रहे जान
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:27 AM IST
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शराबी बेटे ने मां को पटककर मार डाला, नशे में एक युवक की पिटाई ने ले ली जान
एक सप्ताह में शराब पीने वालों ने दिया तीन वारदात को अंजाम, दो की गई जान
जाम छलकाने का चस्का, अपनों के साथ गैरों पर भारी पड़ रहा है आक्रोश
सिद्धार्थनगर। नशे की लत जानलेवा हो चली है। खासतौर पर इस गर्मी में छलक रहे जाम से दिमाग बेलगाम हो रहा है और अपने-पराए का फर्क भूल लोग जान लेने पर आमादा हो जा रहे हैं। एक सप्ताह के भीतर जिले में शराब के नशे से जुड़े तीन गंभीर आपराधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें दो लोगों की जान चली गई। इसमें सबसे दर्दनाक वारदात सोमवार को हुई, जिसमें एक शराबी बेटे ने अपनी ही मां को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया जबकि दूसरे मामले में नशे में हुई मारपीट ने एक युवक की जान ले ली। इसमें सामने वाला तो प्रभावित हो ही रहा है, साथ ही वारदात को अंजाम देकर लोग जेल जा रहे हैं। इसका परिवार पर असर पड़ रहा है और सामाजिक पतन भी हो रहा है।
शहर से निकलकर गांव की और बढ़ता मयखाने का दायरा नई पीढ़ी को नशे की दलदल की ओर लेकर जा रहा है। दायरा बढ़ने का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जिले में मॉडल शॉप सहित कुल 286 शराब की दुकानें संचालित की जा रही हैं। नशे की गिरफ्त में आकर युवा पीढ़ी परिवार को तोड़ रही है और नशे में लोग हिंसक हो जा रहे हैं। जो वारदात सामने आ रहीं हैं, वह पुलिस और थाने तक आने वाले मामले हैं। ऐसी ही न जाने कितनी घटनाएं हो रही हैं जो गांव में ही दब जाती हैं। समाज के जागरूक लोगों का कहना है कि इन घटनाओं ने यह सवाल खड़े किए हैं कि आखिर शराब का बढ़ता चस्का लोगों की समझ-बूझ और संवेदनाओं को किस हद तक खत्म कर रहा है।
गर्मी बढ़ा रहा विचलन, प्रभावित हो रही सोचने-समझने की शक्ति
गर्मी के मौसम में शराब का असर और अधिक खतरनाक माना जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि तेज तापमान के बीच शराब का सेवन मस्तिष्क पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे व्यक्ति का आत्मनियंत्रण कमजोर पड़ जाता है, निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है और आक्रामकता बढ़ जाती है। यही वजह है कि मामूली विवाद भी हिंसक घटनाओं में बदल रहे हैं। हाल के मामलों में भी यही तस्वीर सामने आई है, जहां नशे में धुत लोगों ने अपनों और गैरों के बीच का फर्क तक भुला दिया।
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बोले विशेषज्ञ
शराब सीधे मस्तिष्क के उस हिस्से को प्रभावित करती है जो व्यक्ति के व्यवहार, निर्णय और भावनात्मक नियंत्रण को संचालित करता है। नशे की हालत में व्यक्ति का धैर्य कम हो जाता है और गुस्सा तेजी से बढ़ता है। गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी और उच्च तापमान इस प्रभाव को और बढ़ा देते हैं। ऐसे में हिंसक व्यवहार की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
डॉ. मोहम्मद अफजल खान, सहायक आचार्य, मानसिक रोग विभाग, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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बोले जानकार
शराब शहर की दुकानें शहर तक थीं तो नियंत्रण था लेकिन यह अब गांव और कस्बों में आ गई, जहां नियंत्रण नहीं है। युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में है। एक ओर दुकानें बढ़ रही हैं। दूसरी ओर सेहत की बात की जा रही है। दोनों एक साथ नहीं हो सकता है। शराब की लत केवल व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करती है। घरेलू हिंसा, आर्थिक संकट और सामाजिक तनाव के अधिकांश मामलों में शराब एक प्रमुख कारण बनकर सामने आता है। दुकानों को नियंत्रित करने की जरूरत है।
डॉ. नरसिंह त्रिपाठी, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य
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एक नजर घटनाओं पर
केस - 1
मां की जान लेने वाला बेटा
तुलसियापुर। कठेला समय माता थाना क्षेत्र के विशुनपुर खुर्द गांव में रविवार की रात सुनील गिरी ने अपनी मां कैलाशी देवी (65) की हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि हत्यारोपी पुत्र शराब के नशे में अपनी पत्नी के साथ मारपीट कर रहा था। मां झगड़ा छुड़ाने गई तो आरोपी ने उसे घसीटकर पटक दिया, जिससे उसकी जान चली गई। घटना के बाद से आरोपी मौके से भाग निकला। पिता छोट्टन गिरी की तहरीर पर पुलिस ने सुनील गिरी पर गैर इरादतन हत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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केस - 2
मारपीट में चली गई युवक की जान
कठेला क्षेत्र में शराब के नशे में बीते सप्ताह शराब की दुकान पर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। युवक को पोल से बांधकर पीटा गया। पिटाई इस तरह की गई कि मारपीट में गंभीर रूप से घायल युवक की मौत हो गई। इसमें तीन लोगों पर गैरइरादतन हत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें मुख्य आरोपी को पुलिस ने जेल भेज दिया।
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सात पर दर्ज हुआ केस
पथरा थाना क्षेत्र के कस्बे में तीन दिन पहले ठेके पर शराब पीने के बाद रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद शुरू हुआ। इसमें मारपीट हुई, दुकानदार से भी विवाद की कोशिश की गई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। इस मामले में सात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि अगर समय रहते मामला शांत नहीं कराया गया होता तो बड़ा विवाद हो जाता।
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एक नजर शराब की खपत के आंकड़ों पर
जनपद में शराब की खपत की बात करें तो प्रति माह करीब करीब साढ़े आठ लाख लीटर देसी शराब की खपत है। ढाई लाख बोतल से अधिक बियर और सवा 14 लाख केन की बिक्री है। सबसे अच्छी बात यह है कि जनपद में कच्ची शराब न के बराबर है। अगर उसकी बिक्री होती तो न जाने कितना परिवार प्रभावित होता।
एक सप्ताह में शराब पीने वालों ने दिया तीन वारदात को अंजाम, दो की गई जान
जाम छलकाने का चस्का, अपनों के साथ गैरों पर भारी पड़ रहा है आक्रोश
सिद्धार्थनगर। नशे की लत जानलेवा हो चली है। खासतौर पर इस गर्मी में छलक रहे जाम से दिमाग बेलगाम हो रहा है और अपने-पराए का फर्क भूल लोग जान लेने पर आमादा हो जा रहे हैं। एक सप्ताह के भीतर जिले में शराब के नशे से जुड़े तीन गंभीर आपराधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें दो लोगों की जान चली गई। इसमें सबसे दर्दनाक वारदात सोमवार को हुई, जिसमें एक शराबी बेटे ने अपनी ही मां को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया जबकि दूसरे मामले में नशे में हुई मारपीट ने एक युवक की जान ले ली। इसमें सामने वाला तो प्रभावित हो ही रहा है, साथ ही वारदात को अंजाम देकर लोग जेल जा रहे हैं। इसका परिवार पर असर पड़ रहा है और सामाजिक पतन भी हो रहा है।
शहर से निकलकर गांव की और बढ़ता मयखाने का दायरा नई पीढ़ी को नशे की दलदल की ओर लेकर जा रहा है। दायरा बढ़ने का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जिले में मॉडल शॉप सहित कुल 286 शराब की दुकानें संचालित की जा रही हैं। नशे की गिरफ्त में आकर युवा पीढ़ी परिवार को तोड़ रही है और नशे में लोग हिंसक हो जा रहे हैं। जो वारदात सामने आ रहीं हैं, वह पुलिस और थाने तक आने वाले मामले हैं। ऐसी ही न जाने कितनी घटनाएं हो रही हैं जो गांव में ही दब जाती हैं। समाज के जागरूक लोगों का कहना है कि इन घटनाओं ने यह सवाल खड़े किए हैं कि आखिर शराब का बढ़ता चस्का लोगों की समझ-बूझ और संवेदनाओं को किस हद तक खत्म कर रहा है।
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गर्मी बढ़ा रहा विचलन, प्रभावित हो रही सोचने-समझने की शक्ति
गर्मी के मौसम में शराब का असर और अधिक खतरनाक माना जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि तेज तापमान के बीच शराब का सेवन मस्तिष्क पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे व्यक्ति का आत्मनियंत्रण कमजोर पड़ जाता है, निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है और आक्रामकता बढ़ जाती है। यही वजह है कि मामूली विवाद भी हिंसक घटनाओं में बदल रहे हैं। हाल के मामलों में भी यही तस्वीर सामने आई है, जहां नशे में धुत लोगों ने अपनों और गैरों के बीच का फर्क तक भुला दिया।
बोले विशेषज्ञ
शराब सीधे मस्तिष्क के उस हिस्से को प्रभावित करती है जो व्यक्ति के व्यवहार, निर्णय और भावनात्मक नियंत्रण को संचालित करता है। नशे की हालत में व्यक्ति का धैर्य कम हो जाता है और गुस्सा तेजी से बढ़ता है। गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी और उच्च तापमान इस प्रभाव को और बढ़ा देते हैं। ऐसे में हिंसक व्यवहार की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
डॉ. मोहम्मद अफजल खान, सहायक आचार्य, मानसिक रोग विभाग, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
बोले जानकार
शराब शहर की दुकानें शहर तक थीं तो नियंत्रण था लेकिन यह अब गांव और कस्बों में आ गई, जहां नियंत्रण नहीं है। युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में है। एक ओर दुकानें बढ़ रही हैं। दूसरी ओर सेहत की बात की जा रही है। दोनों एक साथ नहीं हो सकता है। शराब की लत केवल व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करती है। घरेलू हिंसा, आर्थिक संकट और सामाजिक तनाव के अधिकांश मामलों में शराब एक प्रमुख कारण बनकर सामने आता है। दुकानों को नियंत्रित करने की जरूरत है।
डॉ. नरसिंह त्रिपाठी, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य
एक नजर घटनाओं पर
केस - 1
मां की जान लेने वाला बेटा
तुलसियापुर। कठेला समय माता थाना क्षेत्र के विशुनपुर खुर्द गांव में रविवार की रात सुनील गिरी ने अपनी मां कैलाशी देवी (65) की हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि हत्यारोपी पुत्र शराब के नशे में अपनी पत्नी के साथ मारपीट कर रहा था। मां झगड़ा छुड़ाने गई तो आरोपी ने उसे घसीटकर पटक दिया, जिससे उसकी जान चली गई। घटना के बाद से आरोपी मौके से भाग निकला। पिता छोट्टन गिरी की तहरीर पर पुलिस ने सुनील गिरी पर गैर इरादतन हत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
केस - 2
मारपीट में चली गई युवक की जान
कठेला क्षेत्र में शराब के नशे में बीते सप्ताह शराब की दुकान पर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। युवक को पोल से बांधकर पीटा गया। पिटाई इस तरह की गई कि मारपीट में गंभीर रूप से घायल युवक की मौत हो गई। इसमें तीन लोगों पर गैरइरादतन हत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें मुख्य आरोपी को पुलिस ने जेल भेज दिया।
सात पर दर्ज हुआ केस
पथरा थाना क्षेत्र के कस्बे में तीन दिन पहले ठेके पर शराब पीने के बाद रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद शुरू हुआ। इसमें मारपीट हुई, दुकानदार से भी विवाद की कोशिश की गई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। इस मामले में सात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि अगर समय रहते मामला शांत नहीं कराया गया होता तो बड़ा विवाद हो जाता।
एक नजर शराब की खपत के आंकड़ों पर
जनपद में शराब की खपत की बात करें तो प्रति माह करीब करीब साढ़े आठ लाख लीटर देसी शराब की खपत है। ढाई लाख बोतल से अधिक बियर और सवा 14 लाख केन की बिक्री है। सबसे अच्छी बात यह है कि जनपद में कच्ची शराब न के बराबर है। अगर उसकी बिक्री होती तो न जाने कितना परिवार प्रभावित होता।