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नदियों ने रास्ता बदला तो बदल गई जमीन: सर्वे और चकबंदी का जाल, फंसे 12 से ज्यादा गांवों के 25 हजार लोग
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: Rohit Singh
Updated Mon, 23 Mar 2026 11:53 AM IST
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सार
लंबे समय से इन गांवों में दाखिल-खारिज नहीं होने से खतौनी अपडेट नहीं हो पाई है। वहीं, नदी ने रास्ता बदला है तो अब इन गांवों के लोगों को मालिकाना हक की चिंता सताने लगी है। सदर तहसील के उत्तरास्रोत गांव में 1922 में चकबंदी हुआ था।
विशेष ग्राम चकबंदी अदालत में अधिकारियों को समस्या बताते ग्रामीण।फोटो 27 अगस्त 2024 की है
- फोटो : स्त्रोत- पुलिस
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विस्तार
सदर तहसील में नदी के किनारे वाले गांवों में सर्वे और चकबंदी में 12 से ज्यादा गांव लंबे समय से फंसे हैं। प्रक्रिया इतनी सुस्त है कि अभी तक रिकॉर्ड ही दुरुस्त नहीं हो पाया है। इन गांवों में लोगों को मैनुअल खतौनी ही मिल रही है, जिसके चलते सरकारी योजनाओं का लाभ भी इन्हें नहीं मिल रहा है।
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लंबे समय से इन गांवों में दाखिल-खारिज नहीं होने से खतौनी अपडेट नहीं हो पाई है। वहीं, नदी ने रास्ता बदला है तो अब इन गांवों के लोगों को मालिकाना हक की चिंता सताने लगी है। सदर तहसील के उत्तरास्रोत गांव में 1922 में चकबंदी हुआ था।
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इसके बाद यह गांव 1956 में बंदोबस्त (ऐसा राजस्व ग्राम जहां भूमि की पैमाइश, मालिकाना हक का निर्धारण और लगान (कर) निश्चित किया गया हो) में चला गया। 1972 में सरकार ने सिरदारी समाप्त कर गांव के लोगाें का नाम भूमिधर में दर्ज कर दिया लेकिन आज भी खतौनी में सिरदारी ही दर्ज है। इसके चलते लोगों का नाम खतौनी में नहीं चढ़ पाया।
गांव की प्रधान सुमन देवी का कहना है कि खतौनी में सिरदारी दर्ज होने से खतौनी अपडेट नहीं हो पा रही है। इसके चलते क्रय-विक्रय भी प्रभावित है। डीएम को पत्र देकर खतौनी में सुधार का अनुरोध किया जा चुका है।
गांव की प्रधान सुमन देवी का कहना है कि खतौनी में सिरदारी दर्ज होने से खतौनी अपडेट नहीं हो पा रही है। इसके चलते क्रय-विक्रय भी प्रभावित है। डीएम को पत्र देकर खतौनी में सुधार का अनुरोध किया जा चुका है।
वहीं, गांव के विजय और रंजीत का कहना है कि करीब 30 एकड़ खेत नदी की कटान में चला गया। रिकॉर्ड में तो गांव के लोगों का नाम है पर कब्जा अब दूसरे लोगों का है। विजय कहते हैं, खतौनी में नाम दुरुस्त नहीं होने से सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सर्वे और चकबंदी वाले गांवाें की रिपोर्ट मांगी जाएगी। सभी गांवों की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी ताकि लोगों के जमीनों का रिकॉर्ड अपडेट किया जा सके और खतौनी दुरुस्त हो जाए: दीपक मीणा, डीएम
सर्वे और चकबंदी वाले गांवाें की रिपोर्ट मांगी जाएगी। सभी गांवों की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी ताकि लोगों के जमीनों का रिकॉर्ड अपडेट किया जा सके और खतौनी दुरुस्त हो जाए: दीपक मीणा, डीएम
सदर तहसील के इन गांवों में चल रहा सर्वे
छितौना मुश्तकिल, छितौना एहतमाली, राजपुर दूवी, बरवार बुुजुर्ग, घोड़वा, टेढ़ाबीर, मंझरिया गैराबाद, उत्तरास्रोत, महाजी मंझरिया, राजावारी, उस्मानपुर, अतरौलिया नाहर।
जंगल कौड़िया में 29 साल से चल रही चकबंदी
सदर तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत जंगल कौड़िया के 16 टोलों के हजारों लोग 29 वर्ष पहले शुरू हुई चकबंदी प्रक्रिया के पूर्ण होने का इंतजार कर रहे हैं। अप्रैल 2024 में चकबंदी विभाग ने चार टीमों का गठन कर गांव में जमीन की पैमाइश और खेतों के चिह्नांकन का काम शुरू किया, जिससे ग्रामीणों में उम्मीद जगी। एक साल बाद भी 16 टोलों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
छितौना मुश्तकिल, छितौना एहतमाली, राजपुर दूवी, बरवार बुुजुर्ग, घोड़वा, टेढ़ाबीर, मंझरिया गैराबाद, उत्तरास्रोत, महाजी मंझरिया, राजावारी, उस्मानपुर, अतरौलिया नाहर।
जंगल कौड़िया में 29 साल से चल रही चकबंदी
सदर तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत जंगल कौड़िया के 16 टोलों के हजारों लोग 29 वर्ष पहले शुरू हुई चकबंदी प्रक्रिया के पूर्ण होने का इंतजार कर रहे हैं। अप्रैल 2024 में चकबंदी विभाग ने चार टीमों का गठन कर गांव में जमीन की पैमाइश और खेतों के चिह्नांकन का काम शुरू किया, जिससे ग्रामीणों में उम्मीद जगी। एक साल बाद भी 16 टोलों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों ने बताया कि 1962 की चकबंदी के बाद 1995 में फॉर्म-5 और 2019 में फॉर्म-23 के जरिये सूचनाएं एकत्र की गईं। इसके बावजूद प्रक्रिया अधूरी है। 27 अगस्त 2024 को चकबंदी आयुक्त उत्तर प्रदेश जीएस नवीन कुमार और तत्कालीन जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश के मार्गदर्शन में जंगल कौड़िया में विशेष चकबंदी अदालत लगाई गई।
इसमें उपसंचालक चकबंदी राज नारायण त्रिपाठी ने 80, बंदोबस्त अधिकारी शशिकांत शुक्ल ने 33, और चकबंदी अधिकारी माया शंकर सिंह ने छह मामलों की सुनवाई की। इसके बाद भी चकबंदी प्रक्रिया पूरी न होने से ग्रामीणों में निराशा बनी हुई है।
इस वित्तीय वर्ष में चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी। जंगल कौड़िया काफी बड़ा ग्राम सभा है। कई प्रकार के मुकदमे आते रहते हैं, जिनका निस्तारण करने में समय लगता है। धारा-52 की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू होगी: सुनील सिंह, सीओ, चकबंदी
इसमें उपसंचालक चकबंदी राज नारायण त्रिपाठी ने 80, बंदोबस्त अधिकारी शशिकांत शुक्ल ने 33, और चकबंदी अधिकारी माया शंकर सिंह ने छह मामलों की सुनवाई की। इसके बाद भी चकबंदी प्रक्रिया पूरी न होने से ग्रामीणों में निराशा बनी हुई है।
इस वित्तीय वर्ष में चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी। जंगल कौड़िया काफी बड़ा ग्राम सभा है। कई प्रकार के मुकदमे आते रहते हैं, जिनका निस्तारण करने में समय लगता है। धारा-52 की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू होगी: सुनील सिंह, सीओ, चकबंदी