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Siddharthnagar News: सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के हवाले चार जिलों की वायु गुणवत्ता व

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 20 Mar 2026 12:18 AM IST
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Citing experts from Siddharth University, the air quality and
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय का प्रशासनिक भवन
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के नाम एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर और बलरामपुर जिले की वायु गुणवत्ता की निगरानी का महत्वपूर्ण जिम्मा सौंपा है। इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण सिंह (मुख्य अन्वेषक) और डॉ. आजाद कुमार (सह-प्रधान अन्वेषक) करेंगे।
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पहले वर्ष के लिए 33.84 लाख रुपये के बजट वाले इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 8 केंद्रों पर पीएम10, पीएम2.5, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) जैसी हानिकारक गैसों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा।
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प्रोजेक्ट के अंतर्गत बस्ती और संतकबीरनगर में तीन-तीन, जबकि सिद्धार्थनगर और बलरामपुर में एक-एक केंद्र स्थापित किए जाएंगे। यहां सप्ताह में दो दिन 24 घंटे लगातार वायु गुणवत्ता का अनुश्रवण किया जाएगा और आंकड़े सीधे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और समाज के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगा।
विज्ञान संकाय की डीन प्रो. प्रकृति राय ने इसे शोधपरक संस्कृति की बड़ी सफलता बताते हुए विभाग के शिक्षकों को बधाई दी। वहीं विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण सिंह ने कहा कि यह परियोजना पूर्वांचल के इन जिलों की वायु गुणवत्ता की वास्तविक तस्वीर सामने लाएगी और नीति-निर्माण में सहायक होगी।
सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. आजाद कुमार ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाला वैज्ञानिक डेटा तैयार किया जाएगा, जिससे प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे। यह शोधार्थियों के लिए फील्ड वर्क और डेटा विश्लेषण सीखने का भी अच्छा अवसर होगा।
परियोजना के तहत चार साइंटिफिक असिस्टेंट, चार लैब असिस्टेंट और आठ फील्ड असिस्टेंट तैनात किए जाएंगे, जो आंकड़ों के संग्रह और विश्लेषण में सहयोग करेंगे। इसके अलावा धान के भूसे, कृषि अवशेषों के दहन और दीपावली के दौरान हवा में मौजूद हेवी मेटल्स का भी विशेष अध्ययन किया जाएगा।
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