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Siddharthnagar News: रहेगा या गिरेगा कांशीराम आवास, लैब टेस्ट के बाद होगा फैसला

Thu, 30 Jul 2026 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 30 Jul 2026 12:06 AM IST
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Decision on whether Kanshiram Awas will stand or be demolished to be taken after lab tests.
कांशीाम आवास का जर्जर भवन। संवाद
सिद्धार्थनगर। शहर में स्थित कांशीराम आवास के दो फ्लैट के छत ढहने के बाद इसकी गुणवत्ता की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय टीम जांच में जुटी है। यह टीम कांशीराम आवास की गुणवत्ता और रहने योग्य है या नहीं, इसके साथ भवन की मजबूती की प्राथमिक जांच कर रही है। टीम की प्राथमिक जांच में असुरक्षित पाए जाने के बाद भी उच्चस्तरीय तकनीकी और निर्माण सामग्री का लैब टेस्ट कराया जाएगा। इसमें भी अगर ढांचा असुरक्षित मिलता है तो आवास का भवन खाली कराने के साथ ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया संबंधी निर्णय हो सकेगा।
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कांशीराम आवास के एक हजार फ्लैट में रहने वाली पांच हजार से अधिक आबादी पर भवन जर्जर होने से हादसे का खतरा मंडरा रहा है।बारिश के दौरान 18 जुलाई को कांशीराम आवास के ब्लॉक संख्या 40 और 41 के दो फ्लैट की छत ढह गई थी। हालांकि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन अनहोनी की आशंका से कॉलोनीवासी सहम गए। भवन की मजबूती और असुरक्षित होने की चर्चाओं के बीच बड़े हादसे की आशंका जताई जाने लगी है।
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खबर अमर उजाला में प्रमुखता के साथ प्रकाशित हुई, जिसके बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने आवास में रहने वालों की सुरक्षा को देखते हुए भवन की गुणवत्ता की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित कर दी है। उन्होंने जांच कमेटी को एक सप्ताह के अंदर जांचकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिए गए। पीडब्लूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता कमल किशोर की अध्यक्षता में गठित कमेटी में सदस्य के तौर पर नगर पालिका ईओ अजय कुमार सिंह, परियोजना निदेशक डूडा नीरज अग्रवाल और सहायक अभियंता आवास एवं विकास परिषद सतीश कुमार शामिल हैं। जांच टीम ने काशीराम आवास में रहने वालों से जानकारी और पूछताछ के साथ ही सभी फ्लैट के छत, दीवार के उखड़े प्लास्टर आदि का निरीक्षण किया। टीम ने ग्राउंड फ्लोर से लेकर छत और छज्जा तक देख व जांचकर रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है।
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आवास के 40 ब्लॉक दिख रहे असुरक्षित
काशीराम आवास के 84 ब्लॉकों में हालांकि सभी की जर्जर हालत दिख रही है लेकिन 38 से 78 ब्लॉक की स्थिति ज्यादा खराब है। कांशीराम आवास के इस हिस्से में बारिश के मौसम में लंबे समय जलभराव रहता है, जिससे इन भवनों की नींव डूबी रहती है। वहीं, कई आवास जर्जर हो चुके हैं और छत से प्लास्टर गिरने के बाद उसमें डाला गया सरिया दिखने लगा है। वहीं, कई फ्लैट के प्लास्टर उखड़ने के साथ ही खिड़की और दरवाजे तक निकल चुके हैं। जांच टीम ने कांशीराम आवास के कई फ्लैट के दीवार और छत के टूटकर गिर रहे प्लास्टर को भी देखा। उन्होंने छत का प्लास्टर गिरने के बाद दिख रहे सरिया की भी जांच की है।
15 वर्ष में ही ढहने लगा कांशीराम आवास
उत्तर प्रदेश आवास और विकास परिषद की ओर से वर्ष 2011 में शहरी गरीब आवास योजना के तहत लगभग 50 करोड़ की लागत से नगर पालिका में एक हजार आवास का निर्माण हुआ था। निर्माण के 15 वर्ष बाद ही यह आवासीय भवन जर्जर हो चुका है और छत ढहने के साथ प्लास्टर उखड़ने लगे हैं। बता दें कि शहर के ऑफिसर्स कॉलोनी में तीन फ्लाेर में निर्मित काशीराम आवास में 84 ब्लॉक है, जिसमें प्रत्येक में 12 फ्लैट है। प्रत्येक फ्लैट में दो कमरे के साथ किचन और शौचालय का निर्माण कराया गया है। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने नौ अक्टूबर 2008 को इसका शिलान्यास किया था। वर्ष 2011 में निर्माण पूरा होने के बाद आवासों का आवंटन हुआ।

भवन के मजबूती की उच्चस्तरीय जांच जरूरी
जांच टीम ने हालांकि कांशीराम आवास भवन के बाहरी और आंतरिक हिस्सों का निरीक्षण करके दरारें, झुकाव, दीवारों की मोटाई और सीलन या जंग लगने के संकेतों की जांच की है। भवन की वास्तविक क्षमता और मजबूती की उच्चस्तरीय संस्थान द्वारा जांच की जरूरत है। इसके तहत भवन की तकनीकी और निर्माण सामग्री के लैब टेस्ट में कंक्रीट और स्टील की मजबूती जांच के तहत कंक्रीट के अंदर की दरारों, छिद्रों व गुणवत्ता का पता चल सकेगा। इसके साथ ही भवन की नींव, कॉलम, बीम और छत का तकनीकी और भौतिक मूल्यांकन कर भार वहन क्षमता का आंकलन करते हुए यह निष्कर्ष निकाला जा सकेगा कि भवन सुरक्षित है या नहीं।
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