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Siddharthnagar News: ढाई माह में विवेचना, 2 साल 11 माह में सजा-ए-मौत
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 29 Mar 2026 11:57 PM IST
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सिद्धार्थनगर। पथरा थाना क्षेत्र के खोरिया रघुवीर सिंह गांव में वर्ष 2023 में हुई 14 साल वर्षीय मो. उमर हत्याकांश्के मामले में सजा-ए-मौत का फैसला एक सबक के रूप में देखा जा रहा है। लोगों में इस निर्णय को लेकर चर्चा है कि आवेश में लिए गए नृशंस फैसले का परिणाम ऐसा ही होता है।
2 साल 11 माह में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बांसी सत्य प्रकाश आर्य ने गवाहों के बयान और साक्ष्यों का आकलन करने के बाद मौत की सजा सुनाई सिर्फ मृत्यु दंड ही नहीं हत्या में सामने आई क्रूरता को देखते हुए जान निकल जाने तक फंदे पर लटकाए जाने का आदेश दिया।
सिद्धार्थनगर से अपहरण करके बस्ती जिले के सरयू तट के निकट मौत के घाट उतार कर फेंकने की गुत्थी सुलझाना आसान नहीं थी। कड़ी से कड़ी को जोड़कर पुलिस को केस दर्ज करने से विवेचना पूरी करने और न्यायालय चार्ज शीट दाखिल करने में 2 माह 14 दिन का वक्त लगा। 15 दिन में न्यायालय ने मामले को संज्ञान में लिया और सुनवाई शुरू हुई। करीब 3 माह के भीतर आरोपियों का चार्ज फ्रेम हुआ और फिर मामले की सुनवाई बढ़ी। 2 साल 11 माह में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बांसी सत्य प्रकाश आर्य गवाहों के बयान साक्ष्यों का आंकलन करने के बाद अंतिम सुनवाई में मौत की सजा सुनाई।
इस फैसले की पूरे दिन चर्चा रही। तकरीबन 15 साल बाद जनपद में किसी मामले में मृत्यु दंड की सजा हुई जो समाज में इस प्रकार की प्रवृत्ति वालों के लिए एक कड़ा संदेश है। ऐसा विधि विशेषज्ञ व समाजशास्त्री मान रहे हैं। वह कोर्ट के फैसले का स्वागत कर रहे हैं और कह रहे हैं कि इस ऐतिहासिक फैसले से न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है। अपराध करने वाला कोई भी हो उसे सजा जरूर मिलती है। भले ही समय लगे, लेकिन आप अडिग होकर लड़ते रहे तो निश्चित ही सजा मिलेगी।
मॉनिटरिंग सेल की ओर से होती रही समीक्षा : जुलाई 2023 में सूबे की योगी सरकार ने आपराधिक मामलों में सजा दिलाए जाने के लिए ऑपरेशन कनविक्शन शुरू किया। इसमें एक अलग सेल मुख्यालय पर बना और थानों पर सेल बनाया गया।
इसमें टॉप गंभीर अपराध को वरीयता देते हुए न्यायालय में प्रक्रिया पूरी करने और गवाहों को न्यायालय तक पहुंचाने काम शुरू किया गया।
जिला स्तर पर कॉम करने वाले टीम हर थाने में हत्या, दुष्कर्म और अन्य जघन्य अपराध के मामलों में कौन गवाह है, केस कहां पहुंचा, इसका परीक्षण करके गवाहों से बात और न्यायालय के आदेश अनुसार नोटिस पर संबंधित को हाजिर कराने, यहां तक की जिस मामलों में पीड़ित पक्ष पर दबाव और प्रभाव की कोशिश की अगर आशंका है तो सुरक्षा मुहैया कराने का काम भी पुलिस करती है।
गवाहों को सुरक्षा का पूरा भरोसा और विश्वास दिलाकर न्यायालय तक पहुंचाने का काम करती है। इस मृत्युदंड के सजा के मामले में भी मॉनिटरिंग सेल का रोल रहा है।
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2 साल 11 माह में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बांसी सत्य प्रकाश आर्य ने गवाहों के बयान और साक्ष्यों का आकलन करने के बाद मौत की सजा सुनाई सिर्फ मृत्यु दंड ही नहीं हत्या में सामने आई क्रूरता को देखते हुए जान निकल जाने तक फंदे पर लटकाए जाने का आदेश दिया।
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सिद्धार्थनगर से अपहरण करके बस्ती जिले के सरयू तट के निकट मौत के घाट उतार कर फेंकने की गुत्थी सुलझाना आसान नहीं थी। कड़ी से कड़ी को जोड़कर पुलिस को केस दर्ज करने से विवेचना पूरी करने और न्यायालय चार्ज शीट दाखिल करने में 2 माह 14 दिन का वक्त लगा। 15 दिन में न्यायालय ने मामले को संज्ञान में लिया और सुनवाई शुरू हुई। करीब 3 माह के भीतर आरोपियों का चार्ज फ्रेम हुआ और फिर मामले की सुनवाई बढ़ी। 2 साल 11 माह में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बांसी सत्य प्रकाश आर्य गवाहों के बयान साक्ष्यों का आंकलन करने के बाद अंतिम सुनवाई में मौत की सजा सुनाई।
इस फैसले की पूरे दिन चर्चा रही। तकरीबन 15 साल बाद जनपद में किसी मामले में मृत्यु दंड की सजा हुई जो समाज में इस प्रकार की प्रवृत्ति वालों के लिए एक कड़ा संदेश है। ऐसा विधि विशेषज्ञ व समाजशास्त्री मान रहे हैं। वह कोर्ट के फैसले का स्वागत कर रहे हैं और कह रहे हैं कि इस ऐतिहासिक फैसले से न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है। अपराध करने वाला कोई भी हो उसे सजा जरूर मिलती है। भले ही समय लगे, लेकिन आप अडिग होकर लड़ते रहे तो निश्चित ही सजा मिलेगी।
मॉनिटरिंग सेल की ओर से होती रही समीक्षा : जुलाई 2023 में सूबे की योगी सरकार ने आपराधिक मामलों में सजा दिलाए जाने के लिए ऑपरेशन कनविक्शन शुरू किया। इसमें एक अलग सेल मुख्यालय पर बना और थानों पर सेल बनाया गया।
इसमें टॉप गंभीर अपराध को वरीयता देते हुए न्यायालय में प्रक्रिया पूरी करने और गवाहों को न्यायालय तक पहुंचाने काम शुरू किया गया।
जिला स्तर पर कॉम करने वाले टीम हर थाने में हत्या, दुष्कर्म और अन्य जघन्य अपराध के मामलों में कौन गवाह है, केस कहां पहुंचा, इसका परीक्षण करके गवाहों से बात और न्यायालय के आदेश अनुसार नोटिस पर संबंधित को हाजिर कराने, यहां तक की जिस मामलों में पीड़ित पक्ष पर दबाव और प्रभाव की कोशिश की अगर आशंका है तो सुरक्षा मुहैया कराने का काम भी पुलिस करती है।
गवाहों को सुरक्षा का पूरा भरोसा और विश्वास दिलाकर न्यायालय तक पहुंचाने का काम करती है। इस मृत्युदंड के सजा के मामले में भी मॉनिटरिंग सेल का रोल रहा है।