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Siddharthnagar News: कागजों में सिमटी जलकुंडी परियोजना, बाढ़ मचा रही तबाही

संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 02 Jun 2026 02:02 AM IST
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Jalkundhi project remains confined to papers, floods wreak havoc
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सिद्धार्थनगर। जून शुरू हो चुका है और मानसून की दस्तक होने वाली है। मगर इससे बचाव के इंतजाम अब भी नाकाफी हैं। जिले का बाढ़ से बचाव के लिए कई परियोजनाएं बनीं। लाखों रुपये बाढ़ के पानी में बह गए लेकिन बाढ़ से निजात की उम्मीद लगाए लोगाें को अब भी हर साल दुश्वारी झेलनी पड़ रही है। ऐसे ही 91 साल पहले बाढ़ से बचाव के लिए बनी योजना कागजों में सिमटकर रह गई। भारत और नेपाल से जुड़ी इस परियोजना को अगर अमली जामा पहनाया गया होता तो न सिर्फ सिद्धार्थनगर बल्कि आसपास के जनपदों को बाढ़ से निजात मिल जाती। वहीं, बिजली उत्पादन से इन जिलों में विद्युत संकट भी समाप्त हो जाता।
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जानकारी के अनुसार, पूर्वांचल में प्रतिवर्ष लाखों हेक्टेयर फसल बाढ़ की भेंट चढ़ जाती है और जन धन का भारी नुकसान होता है। इससे छुटकारा दिलाने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने 91 वर्ष पूर्व 1935 में तराई क्षेत्र को बाढ़ से बचाने और जलविद्युत उत्पादन के लिए जलकुंडी परियोजना तैयार की गई थी। इसे संचालित करने के लिए देश की पहली सरकार के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भी नेपाल की सरकार से बात की थी, लेकिन यह परियोजना परवान नहीं चढ़ पाई। बाद में जिले के कई नेताओं ने इस परियोजना के लिए पहल की, लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका।
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जलकुंडी परियोजना के तहत नेपाल के भालूबांग के पास 56 मीटर और नलौरी के पास 163 मीटर ऊंचा बांध बनाने के साथ गहरा कुंड (जलाशय) बनाकर पानी को स्टोर किया जाना था। इस कुंड में राप्ती और उसकी सहायक नदी झिरमुख, खोला सहित कई नदियों के जल को एकत्रित किया जाना था। इसके बाद वहां डैम बनाकर बिजली का उत्पादन करने की योजना थी। इससे नेपाल सहित पूर्वांचल की बिजली व्यवस्था सुधर जाती और सिद्धार्थनगर सहित बस्ती, गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, संतकबीरनगर सहित करीब दर्जन भर जिले को बाढ़ छुटकारा मिल जाता। परियोजना को लेकर वर्ष 1954 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू व नेपाल के राजा त्रिभुवन वीर विक्रम शाह की बात भी हो चुकी थी, लेकिन परियोजना की शुरुआत ही नहीं हो सकी। इसके बाद प्रदेश की भाजपा सरकार में मंत्री रहे स्व. धनराज यादव ने भी इस परियोजना के लिए कई बार पहल की। वह इस परियोजना की फाइल को लेकर पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सहित अन्य कई बड़े नेताओं से मिले थे, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका।
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