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Siddharthnagar News: विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव, कैसे हो मरीजों का इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 21 Apr 2026 02:33 AM IST
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विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव... भागदौड़ के साथ ढीली हो रही जेब
सीएचसी खेसरहा में हड्डी, शिशु रोग, एमडी मेडिसिन व महिला गायनी विशेषज्ञों की नहीं है तैनाती, अस्पताल में रोजाना 400 से अधिक मरीजों की होती है ओपीडी
सकारपार। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खेसरहा में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। इससे मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज या फिर निजी अस्पताल जाना पड़ रहा है। इससे जहां उन्हें दौड़भाग करनी पड़ रही है, वहीं जेब भी ढीली हो रही है।
सीएचसी में प्रतिदिन करीब 400 से 500 के बीच मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल में हड्डी रोग, शिशु रोग, एमडी मेडिसिन और महिला गायनी विशेषज्ञ की तैनाती न होने से उन्हें समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सीएचसी होने के बावजूद यहां मूलभूत विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। हड्डी से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों को जिला अस्पताल या निजी क्लीनिक का रुख करना पड़ता है, जिससे मरीजों का समय और पैसा दोनों की बर्बादी होती है। वहीं, नवजात और बच्चों के इलाज के लिए शिशु रोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों को बाहर का रुख करना पड़ता है।
वहीं, महिला मरीजों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं को अंदरुनी बीमारी के इलाज के लिए महिला विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती न होने से काफी दिक्कत हो रही है। गर्भवतियों को नियमित जांच और परामर्श के लिए दूर जाना पड़ता है, जिससे कई बार जोखिम भी बढ़ जाता है। ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण अधिकतर महिलाएं समय पर इलाज नहीं करा पातीं। हालांकि सीएचसी में तैनात सामान्य चिकित्सक मरीजों की इलाज के लिए अपनी ओर से पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की कमी के चलते जटिल समस्याओं वाले मरीजों को रेफर करना उनकी मजबूरी हो जाती है, जिससे बेहतर इलाज के अभाव में कई बार गंभीर मरीजों की जान भी चली जाती है। इससे क्षेत्र के मरीज न केवल बेहतर इलाज से वंचित हो जाते है, बल्कि उच्च अस्पतालों पर भी मरीजों का अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
क्षेत्रवासियों ने शासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि खेसरहा सीएचसी में जल्द से जल्द हड्डी रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और महिला गायनी की तैनाती की जाए ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके। सीएचसी पर तकरीबन 50 से अधिक गांवों के मरीज इलाज करवाने पहुंचते हैं।
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बोले जिम्मेदार
हमारे पास अभी विशेषज्ञों की कमी है। जैसे ही ऊपर से विशेषज्ञों की पोस्टिंग होती है तो तत्काल खेसरहा सीएचसी पर उनकी तैनाती कर दी जाएगी।
- डॉ. रजत कुमार चौरसिया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
कमर और पैर में दर्द था, इलाज करने के लिए सीएचसी पर आए थे। सीएससी पर तैनात डॉक्टर ने देखकर दवा दी है।
- मोहम्मद इसराइल, इमलिया
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शरीर में तेज बुखार बुखार के साथ ठंड लग रही थी। साथ ही पेट में दर्द भी हो रहा था। डॉक्टर ने देखकर दवा दी है।
- सावित्री देवी, निवासिनी, बसडीला
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सीएचसी खेसरहा में हड्डी, शिशु रोग, एमडी मेडिसिन व महिला गायनी विशेषज्ञों की नहीं है तैनाती, अस्पताल में रोजाना 400 से अधिक मरीजों की होती है ओपीडी
सकारपार। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खेसरहा में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। इससे मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज या फिर निजी अस्पताल जाना पड़ रहा है। इससे जहां उन्हें दौड़भाग करनी पड़ रही है, वहीं जेब भी ढीली हो रही है।
सीएचसी में प्रतिदिन करीब 400 से 500 के बीच मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल में हड्डी रोग, शिशु रोग, एमडी मेडिसिन और महिला गायनी विशेषज्ञ की तैनाती न होने से उन्हें समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सीएचसी होने के बावजूद यहां मूलभूत विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। हड्डी से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों को जिला अस्पताल या निजी क्लीनिक का रुख करना पड़ता है, जिससे मरीजों का समय और पैसा दोनों की बर्बादी होती है। वहीं, नवजात और बच्चों के इलाज के लिए शिशु रोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों को बाहर का रुख करना पड़ता है।
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वहीं, महिला मरीजों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं को अंदरुनी बीमारी के इलाज के लिए महिला विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती न होने से काफी दिक्कत हो रही है। गर्भवतियों को नियमित जांच और परामर्श के लिए दूर जाना पड़ता है, जिससे कई बार जोखिम भी बढ़ जाता है। ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण अधिकतर महिलाएं समय पर इलाज नहीं करा पातीं। हालांकि सीएचसी में तैनात सामान्य चिकित्सक मरीजों की इलाज के लिए अपनी ओर से पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की कमी के चलते जटिल समस्याओं वाले मरीजों को रेफर करना उनकी मजबूरी हो जाती है, जिससे बेहतर इलाज के अभाव में कई बार गंभीर मरीजों की जान भी चली जाती है। इससे क्षेत्र के मरीज न केवल बेहतर इलाज से वंचित हो जाते है, बल्कि उच्च अस्पतालों पर भी मरीजों का अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
क्षेत्रवासियों ने शासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि खेसरहा सीएचसी में जल्द से जल्द हड्डी रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और महिला गायनी की तैनाती की जाए ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके। सीएचसी पर तकरीबन 50 से अधिक गांवों के मरीज इलाज करवाने पहुंचते हैं।
बोले जिम्मेदार
हमारे पास अभी विशेषज्ञों की कमी है। जैसे ही ऊपर से विशेषज्ञों की पोस्टिंग होती है तो तत्काल खेसरहा सीएचसी पर उनकी तैनाती कर दी जाएगी।
- डॉ. रजत कुमार चौरसिया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
कमर और पैर में दर्द था, इलाज करने के लिए सीएचसी पर आए थे। सीएससी पर तैनात डॉक्टर ने देखकर दवा दी है।
- मोहम्मद इसराइल, इमलिया
शरीर में तेज बुखार बुखार के साथ ठंड लग रही थी। साथ ही पेट में दर्द भी हो रहा था। डॉक्टर ने देखकर दवा दी है।
- सावित्री देवी, निवासिनी, बसडीला

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