{"_id":"69baeaf724bae3880700b011","slug":"lecture-on-intellectual-property-rights-emphasis-on-developed-india-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1001-155203-2026-03-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ पर व्याख्यान, विकसित भारत पर जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ पर व्याख्यान, विकसित भारत पर जोर
विज्ञापन
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. कविता शाह व डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की क
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर) के विज्ञान संकाय की ओर से गौतम बुद्ध प्रेक्षागृह में “बौद्धिक संपदा अधिकार: विकसित भारत@ 2047 में प्रासंगिकता” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। बुधवार को कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति प्रो. आशु रानी की उपस्थिति में हुआ।
मुख्य अतिथि प्रो. आशु रानी ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार, अनुसंधान एवं तकनीकी विकास को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क एवं डिजाइन जैसे अधिकार शोधकर्ताओं और आविष्कारों के कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार ज्ञान-आधारित समाज की आधारशिला हैं। विकसित भारत@ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नवाचार, अनुसंधान और रचनात्मकता को बढ़ावा देना है।
विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. प्रकृति राय ने विषय प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों में नवाचार की भावना विकसित करें। प्रो. एस.के. श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, परीक्षा नियंत्रक दीनानाथ यादव, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीता यादव, शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. जितेंद्र कुमार सिंह, प्रो. कौशलेन्द्र चतुर्वेदी, डॉ. लक्ष्मण सिंह, डॉ. अमित साहनी, डॉ. मयंक कुशवाहा, डॉ. अब्दुल हफीज, डॉ. शिवम शुक्ला, डॉ. रेनू त्रिपाठी, डॉ. विमल वर्मा सहित अनेक शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव ने किया तथा समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
-- -- -- -- -- --
दो विश्वविद्यालयों के बीच हुआ ओएमयू पर हस्ताक्षर
कार्यक्रम के दौरान सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर) एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त शोध परियोजनाओं पर कार्य करेंगे, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए आदान-प्रदान कार्यक्रम संचालित करेंगे तथा विभिन्न विषयों में विशेषज्ञता साझा करेंगे। साथ ही नए पाठ्यक्रमों के विकास, कार्यशालाओं, सेमिनारों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संयुक्त आयोजन भी किया जाएगा। आईक्यूएसी निदेशक प्रो. सौरभ ने बताया कि यह समझौता दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक विकास और अनुसंधान सहयोग को नई दिशा देगा।
Trending Videos
मुख्य अतिथि प्रो. आशु रानी ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार, अनुसंधान एवं तकनीकी विकास को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क एवं डिजाइन जैसे अधिकार शोधकर्ताओं और आविष्कारों के कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार ज्ञान-आधारित समाज की आधारशिला हैं। विकसित भारत
विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. प्रकृति राय ने विषय प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों में नवाचार की भावना विकसित करें। प्रो. एस.के. श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, परीक्षा नियंत्रक दीनानाथ यादव, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीता यादव, शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. जितेंद्र कुमार सिंह, प्रो. कौशलेन्द्र चतुर्वेदी, डॉ. लक्ष्मण सिंह, डॉ. अमित साहनी, डॉ. मयंक कुशवाहा, डॉ. अब्दुल हफीज, डॉ. शिवम शुक्ला, डॉ. रेनू त्रिपाठी, डॉ. विमल वर्मा सहित अनेक शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव ने किया तथा समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
दो विश्वविद्यालयों के बीच हुआ ओएमयू पर हस्ताक्षर
कार्यक्रम के दौरान सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर) एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त शोध परियोजनाओं पर कार्य करेंगे, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए आदान-प्रदान कार्यक्रम संचालित करेंगे तथा विभिन्न विषयों में विशेषज्ञता साझा करेंगे। साथ ही नए पाठ्यक्रमों के विकास, कार्यशालाओं, सेमिनारों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संयुक्त आयोजन भी किया जाएगा। आईक्यूएसी निदेशक प्रो. सौरभ ने बताया कि यह समझौता दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक विकास और अनुसंधान सहयोग को नई दिशा देगा।