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Siddharthnagar News: सिलिंडर के लिए लाइन...मैसेज आ रहा डिलीवर हो गया
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डुमरियागंज नगर में स्थित जैसवाल गैस एजेंसी के गोदाम पर लोगों की लगी लंबी कतार। संवाद
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सिद्धार्थनगर। जिले में रसोई गैस सिलिंडर के लिए एजेंसियों पर लग रहे कतार के बीच उपभोक्ताओं के सामने एक नई तरह की समस्या सामने आ रही है। शिकायत के अनुसार, बुकिंग के समय कई उपभोक्ता के मोबाइल पर ऑलरेडी बुक्ड का मैसेज मिल रहा है तो कई को बुकिंग के बाद उन्हें योर ऑर्डर इज डिलीवर्ड मैसेज का मिला है। जबकि उन्हें सिलिंडर मिला ही नहीं।
शिकायत लेकर वह एजेंसी पहुंचे तो कर्मचारियों की ओर से इसे तकनीकी गड़बड़ी बताई गई लेकिन एक-दो नहीं, बड़ी संख्या में सामने आई शिकायतों ने इस सफाई पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। शहर से लेकर कस्बों तक एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लगी भीड़ के बीच हाथ में मोबाइल लिए कई लोग एक ही सवाल पूछते दिखे कि जब हमने गैस ली ही नहीं तो बुकिंग और डिलीवरी कैसे हो गई। कई जगहों पर बहस और हंगामे की स्थिति बन जा रही है।
शाहपुर प्रतिनिधि के अनुसार, मोबाइल पर मिले मैसेज में सिलिंडर डिलीवर दिखा रहा है। जबकि रसोई गैस सिलिंडर घर पहुंचा ही नहीं। परेशान होकर लोग एजेंसी का चक्कर लगा रहे हैं। इससे ऑनलाइन बुकिंग करने वाले उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बृहस्पतिवार को जिले की सभी एजेंसियों पर 9882 गैस सिलिंडर का वितरण हुआ। शुक्रवार को 28 गैस एजेंसियों पर 9882 सिलिंडर वितरण का लक्ष्य रखा गया है।
घरेलू गैस की कामर्शियल सप्लाई का खेल : अचानक घरेलू गैस सिलिंडर की किल्लत की समस्या सामने आई तो कई मामले सामने आने लगे हैं। पहले पर्याप्त आपूर्ति के चलते उपभोक्ता अपनी डिलीवरी के बारे में पता नहीं करते थे अब पूरा खेल खुलता दिख रहा है। लोगों का आरोप है कि गैस एजेंसियों के पास उपभोक्ताओं का पूरा डाटा होता है। इसी का इस्तेमाल कर वह पहले निष्क्रिय अथवा उपयोग न करने वालों के साथ ही उपयोग करने उपभोक्ताओं की बुकिंग व डिलीवरी दर्ज कर देते थे।
जबकि निर्धारित सिलिंडर असल उपभोक्ता तक पहुंचता ही नहीं था। यहीं से यह सिलिंडर एजेंसी से कालाबाजारियों के माध्यम से होटल, ढाबों और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंचा दिया जाता था। अब भी यह खेल हो रहा है।
बिना उपभोक्ता की पुष्टि के बुकिंग और डिलीवरी : लोगों का आरोप है कि बिना उपभोक्ता की पुष्टि के बुकिंग और डिलीवरी कैसे दर्ज हो रही है। अगर एजेंसी स्तर से यह सब संभव है तो यह सिस्टम में बड़ी खामी का संकेत हैं।
सस्ते और महंगे के अंतर से पैदा हुआ लालच इस पूरे खेल की जड़ है।
वहीं वर्तमान में कामर्शियल गैस सिलिंडर की सप्लाई बंद होने के साथ ही घरेलू गैस की बुकिंग की समयसीमा लागू होने के बाद यह खेल सामने आया है।
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शिकायत लेकर वह एजेंसी पहुंचे तो कर्मचारियों की ओर से इसे तकनीकी गड़बड़ी बताई गई लेकिन एक-दो नहीं, बड़ी संख्या में सामने आई शिकायतों ने इस सफाई पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। शहर से लेकर कस्बों तक एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लगी भीड़ के बीच हाथ में मोबाइल लिए कई लोग एक ही सवाल पूछते दिखे कि जब हमने गैस ली ही नहीं तो बुकिंग और डिलीवरी कैसे हो गई। कई जगहों पर बहस और हंगामे की स्थिति बन जा रही है।
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शाहपुर प्रतिनिधि के अनुसार, मोबाइल पर मिले मैसेज में सिलिंडर डिलीवर दिखा रहा है। जबकि रसोई गैस सिलिंडर घर पहुंचा ही नहीं। परेशान होकर लोग एजेंसी का चक्कर लगा रहे हैं। इससे ऑनलाइन बुकिंग करने वाले उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बृहस्पतिवार को जिले की सभी एजेंसियों पर 9882 गैस सिलिंडर का वितरण हुआ। शुक्रवार को 28 गैस एजेंसियों पर 9882 सिलिंडर वितरण का लक्ष्य रखा गया है।
घरेलू गैस की कामर्शियल सप्लाई का खेल : अचानक घरेलू गैस सिलिंडर की किल्लत की समस्या सामने आई तो कई मामले सामने आने लगे हैं। पहले पर्याप्त आपूर्ति के चलते उपभोक्ता अपनी डिलीवरी के बारे में पता नहीं करते थे अब पूरा खेल खुलता दिख रहा है। लोगों का आरोप है कि गैस एजेंसियों के पास उपभोक्ताओं का पूरा डाटा होता है। इसी का इस्तेमाल कर वह पहले निष्क्रिय अथवा उपयोग न करने वालों के साथ ही उपयोग करने उपभोक्ताओं की बुकिंग व डिलीवरी दर्ज कर देते थे।
जबकि निर्धारित सिलिंडर असल उपभोक्ता तक पहुंचता ही नहीं था। यहीं से यह सिलिंडर एजेंसी से कालाबाजारियों के माध्यम से होटल, ढाबों और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंचा दिया जाता था। अब भी यह खेल हो रहा है।
बिना उपभोक्ता की पुष्टि के बुकिंग और डिलीवरी : लोगों का आरोप है कि बिना उपभोक्ता की पुष्टि के बुकिंग और डिलीवरी कैसे दर्ज हो रही है। अगर एजेंसी स्तर से यह सब संभव है तो यह सिस्टम में बड़ी खामी का संकेत हैं।
सस्ते और महंगे के अंतर से पैदा हुआ लालच इस पूरे खेल की जड़ है।
वहीं वर्तमान में कामर्शियल गैस सिलिंडर की सप्लाई बंद होने के साथ ही घरेलू गैस की बुकिंग की समयसीमा लागू होने के बाद यह खेल सामने आया है।