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लापरवाही : वर्षों से हो रही आपूर्ति पर पानी की जांच कभी नहीं हुई
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सिद्धार्थनगर। शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण, हर जगह गंदा और मटमैला पानी आ रहा है। शिकायत के बाद भी समस्या दूर नहीं हो रही है। यही नहीं बांसी नगर पंचायत को छोड़कर पानी की भी कभी जांच नहीं कराई गई। जबकि सालों से वाटर सप्लाई चल रही है। बताया जा रहा है कि हर साल पानी की जांच कराने का नियम है। यह तब है जब दो महीने इंदौर में दूषित पानी पीने से कई की जान चली गई थी।
बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय, बांसी और शोहरतगढ़ और बढ़नी नगर पंचायत की पड़ताल की गई तो यहां मटमैला, पानी से बदबू आने की शिकायत मिली। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह सामने आई कि सालों से पुरानी पाइप से पानी की सप्लाई हो रही है। न पानी की गुणवत्ता की जांच कराई गई है और न ही कोई ठोस उपाय किए गए।
दो महीने पहले इंदौर में दूषित पानी के सेवन से कई मौत का मामला सामने आया था। इसके बाद डीएम के आदेश पर टंकी सफाई आदि हुई लेकिन पानी की गुणवत्ता की जांच केवल बांसी नगर पालिका की ओर से कराई गई। उसमें आयरन की मात्रा बढ़ने की बात आई थी। जबकि, जिला मुख्यालय और अन्य नगर पंचायत जहां पर वॉटर सप्लाई हो रही है। किसी ने पानी की जांच नहीं कराई है। ऐसे में दूषित पानी से यहां भी नगर लोगों की सेहत खराब होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। हर साल लोग पेट व अन्य बीमारियों का इलाज अस्पताल में करा रहे हैं।
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दो महीने पहले इंदौर में दूषित पानी के सेवन से कई मौत का मामला सामने आया था। इसके बाद डीएम के आदेश पर टंकी सफाई आदि हुई लेकिन पानी की गुणवत्ता की जांच केवल बांसी नगर पालिका की ओर से कराई गई। उसमें आयरन की मात्रा बढ़ने की बात आई थी। जबकि, जिला मुख्यालय और अन्य नगर पंचायत जहां पर वॉटर सप्लाई हो रही है। किसी ने पानी की जांच नहीं कराई है। ऐसे में दूषित पानी से यहां भी नगर लोगों की सेहत खराब होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। हर साल लोग पेट व अन्य बीमारियों का इलाज अस्पताल में करा रहे हैं।